bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
Awadhi
/
1 Samuel 16
1 Samuel 16
Awadhi
← Chapter 15
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 17 →
1
यहोवा समूएल स कहेस, “तू कब ताई साऊल बरे दुःखी रहब्या? मइँ तोहका बताइ दिहेउँ ह कि साऊल इस्राएल क राजा न होइ तउ भी तू पछतात बाट्या। आपन सींग मँ तेल भरा अउ चल पड़ा। मइँ तोहका यिसै नाउँ क मनई क लगे पठवत हउँ। यिसै बेतलेहेम मँ रहत ह। मइँ ओकरे पूतन मँ स एक क नवा राजा चुनेउँ ह।”
2
मुला समूएल कहेस, “जदि मइँ जाउँ तउ साऊल इ खबर क सुनी। तबहिं उ मोका मारि डावइ क जतन करी।” यहोवा कहेस, “बेतलेहेम जा। एक बछवा आपन संग लइ जा। इ कहा, ‘मइँ यहोवा क बलि चढ़ावइ आइ अहउँ।’
3
यिसै क बलि क टेमॅ बोलाँवा। तब मइँ तोहका बताउब कि तोहका का करब अहइ। तोहका उ मनई क अभिसेक करइ चाही जेका मइँ देखाँउब।”
4
समूएल उहइ किहेस जउन यहोवा ओका करइ क कहे रहेन। समूएल बेतलेहेम गवा। बेतलेहेम क पुरख डर स काँप गएन। उ पचे समूएल स भेंटेन अउ उ सबइ ओसे पूछेन, “का आप लोग सान्ति स आइ अहेन?”
5
समूएल जवाब दिहेस, “हाँ, मइँ सान्ति स आवा हउँ। मइँ यहोवा क बलि-भेंट चढ़ावइ आवा हउँ। आपन क तइयार करा अउ मोरे संग बलि भेंट मँ आवा।” समूएल यिसै अउ ओकरे बेटहनन क तइयार किहेस। तब समूएल ओनका आवइ अउ बलि भेंट मँ हाथ बटावइ बरे बोलावा दिहेस।
6
जब यिसै अउर ओकर पूत आएन, तउ समूएल एलीआब क लखेस। समूएल सोचेस, “सचमुच इहइ उ मनई बा जेका यहोवा चुनेस ह।”
7
मुला यहोवा समूएल स कहेस, “एलीआब सुन्नर बा मुला ओकरे बारे मँ जिन विचारा। एलीआब लम्बा बा मुला ओकरे बारे मँ जिन सोचा। परमेस्सर ओन चीजन्क नाहीं निहारत जेका मामूली मनई लखत हीं। लोग मनई क बाहरी रुप क निहारत हीं, मुला यहोवा मनई क हिरदइ क लखत ह। एलीआब नीक मनई नाहीं अहइ।”
8
तब यिसै आपन दूसर पूत अबीनादाब क बोलाएस। अबीनादाब समूएल क लगे स गुजरा। मुला समूएल कहेस, “नाहीं, इहइ उ मनई नाहीं अहइ कि जेका यहोवा चुने बा।”
9
तब यिसै सम्मा क समूएल क लगे स गुजरइ क कहेस। मुला समूएल कहेस, “नाहीं, यहोवा इ मनई क भी नाहीं चुने अहइ।”
10
यिसै आपन साताहु पूतन क समूएल क देखाँएस। मुला समूएल यिसै स कहेस, “यहोवा इ मनइयन मँ स कउनो क भी नाहीं चुने अहइ।”
11
तब समूएल यिसै स पूछेस, “का तोहार सबहिं पूत इ सबइ ही बाटेन?” यिसै जवाब दिहेस, “नाहीं मोर सबन त छोट एक अउर पूत अहइ, मुला उ भेड़िन क रखवारी करत ह।” समूएल कहेस, “ओका बोलावा। ओका हिआँ लिआवा। हम पचे तब तलक खइया क खाइ बरे नाहीं बइठब जब तलक उ आइ नाहीं जात।”
12
यिसै कउनो क आपन सब ते छोटका बेटवा क लइ आवइ बरे पठएस। उ सुन्नर अउ लाल बार वाला नउजवान रहा। इ बहोत सुन्नर रहा। यहोवा समूएल स कहेस, “उठा, एका तेल स अभिसेक करा। इ उहइ व्यक्ति अहइ।”
13
समूएल तेल स लबालब भरा सीगं उठाएस अउ उ खास तेल क यिसै क सब ते छोट पूत क मूँड़े प ओकरे भाई लोगन क समन्वा उड़ेरेस। उ दिना क पाछे यहोवा क आतिमा दाऊद प उतरा। समूएल आपन घर, रामा क लउटि गवा।
14
यहोवा क आतिमा साऊल क तजि दिहेस। तब यहोवा साऊल प एक परेत आतिमा पठएस। उ ओका बहोत परेसान किहेस।
15
साऊल क नउकरन ओसे कहेन, “परमेस्सर क जरिए पठइ गइ एक परेत आतिमा तोहका परेसान करत बाटइ।
16
हम सबन क हुकुम द्या हम पचे कउनो क हेरब जउन वीणा बजाइ। जदि परेत आतिमा यहोवा क हियाँ स तोहरे ऊपर आइ अहइ तउ उ मनई वीणा बजाइ। तब उ परेत आतिमा तोहका अकेल्ले मँ तजि देइ अउर तू चंगा अनुभव करब्या।”
17
ऍह बरे साऊल आपन नउकरन स कहेस, “अइसे मनई क हेरा जउन वीणा ठीक तरह बजावत ह अउर ओका मोरे लगे लइ आवा।”
18
नउकरन मँ स एक कहेस, “बेतलहेम मँ रहइवाला एक मनई अहइ। मइँ यिसै क पूत क लखेउँ ह। उ जानत ह कि वीणा कइसे बजाइ जात ह। उ एक बीर पुरुख भी बा अउ अच्छी तरह लड़त ह। उ चउकन्ना बा अउ सुन्नर भी अहइ अउर यहोवा ओकरे संग अहइ।”
19
ऍह बरे साऊल यिसै क लगे दूत पठएस। उ पचे यिसै स उ कहेस जउन साऊल स कहे रहा। “तोहार पूत दाऊद नाउँ क अहइ। उ तोहार भेड़ी क रखवारी करत ह। ओका मोरे लगे पठवा।”
20
फुन यिसै साऊल क भेंट देइ बरे कछू चीज तइयार किहेस। यिसै एक गदहा, कछू रोटी अउ एक गगरी दाखरस अउ एक बोकरी क बच्चा लिहेस। यिसै उ चीजन क दाऊद क दिहेस, अउर उ साऊल क लगे पठइ दिहेस।
21
इ तरह दाऊद साऊल क लगे गवा अउ ओकरे समन्वा ठाड़ भवा। साऊल दाऊद स बहोत पिआर किहेस। फुन दाऊद साऊल क हथियार लइ चलइवाला बन गवा।
22
साऊल यिसै क लगे एक खबर पठएस, “दाऊद क मोरे लगे रहइ अउ मोर सेवा करइ द्या। मइँ ओका बहोत पसन्द करत हउँ।”
23
जब कबहुँ परमेस्सर क परेत आतिमा साऊल प आवत, तउ दाऊद आपन बाँसुरी उठावत अउ ओका बजावइ लागत। परेत आतिमा साऊल क तजि देत अउ उ चंगा महसूस करइ लागत।
← Chapter 15
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 17 →