bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
Awadhi
/
Acts 4
Acts 4
Awadhi
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 5 →
1
अबहिं पतरस अउर यूहन्ना मनइयन स बतियात रहेन कि याजक, मन्दिर क सिपाहियन क मुखिया अउर कछू सदूकीयन ओनकइ लगे आएन।
2
उ पचे ओनसे इ बाते प भिनका रहेन कि पतरस अउर यूहन्ना उपदेस देत भए ईसू क मरे हुएन मँ स जी उठइ क जरिए पुनरूत्थान क प्रचार करत रहेन।
3
तउ उ पचे ओका बन्दी बनइ लिहेन अउर काहेकि उ समइ साँझ होइ ग रही, ऍह बरे दूसर दिना हौलात मँ राखेन।
4
मुला उ पचे उ संदेसा सुनेन कि ओनमाँ स बहोतन ओह प बिसवास अउर इ तरह ओनकइ गनती पाँच हजार ताईं पहोंच गइ।
5
दूसरे दिन यहूदी नेतन बुजुर्ग यहदी नेतन अउर धरम सास्तिरियन यरूसलेम मँ बटुरेन।
6
महायाजक हन्ना, काइफा, यूहन्ना, सिकन्दर अउर महायाजक क परिवारे क सबहिं मनई भी हुवाँ हाजिर रहेन।
7
उ सबइ इ प्रेरितन क आपन समन्वा खड़ा कइके पूछइ लागेन, “तू पचे कउने सक्ती या अधिकार स इ काम किहे ह?”
8
फिन पवित्तर आतिमा क सवार होए स पतरस ओनसे कहेस, “हे मनइयन क नेतन अउर बुजुर्ग नेतन।
9
जदि आजु हमसे एक बीमार मनई क संग कीन्ह भलाई क बारे मँ इ पूछब पछोरब होत अहइ कि उ नीक कइसे होइ गवा।
10
तउ तू सबन्क अउर इस्राएल क मनइयन क इ पता होइ जाइ चाही कि इ काम नासरी ईसू मसीह क नाउँ स भवा ह जेका तू पचे क्रूस प चढ़ाइ दिहा ह जेका परमेस्सर मरि जाए प पुनर्जीवित कइ दिहस ह। उहइ क जरिए पूरी तरह स नीक भवा इ मनई तोहरे समन्वा ठाड़ बा।
11
इ ईसू उहइ ‘पाथर अहइ जेका तू सबइ राजमिस्तरी लोग तुच्छ जान्या रहा, उहइ बहोत खास पाथर बन गवा अहइ।’
12
कउनो दूसर स उद्धार नाहीं अहइ, संसारे मँ अउर दूसर नाउँ नाहीं अहइ जेहसे मानव जाति बचाई जाय सकइ। हम सब ईसू स ही उद्धार पाउब!”
13
उ पचे जब पतरस अउर यूहन्ना क निडर होब निहारेन अउर इ समुझेन कि पतरस अउर यूहन्ना अनपढ़ अउर साधारण मनइ रहेन तउ ओनका बहोत अचरज भवा। फिन उ पचे जान गएन कि इ सबइ ईसू क संग रहि चुका बाटेन।
14
अउर काहेकि उ पचे उ मनई क जउन चंगा भ रहा, ओनकइ संग खड़ा भवा लखत रहेन। तउ ओनकइ लगे तनिकउ बोलइ क कछू नाहीं रहा।
15
उ पचे ओनसे यहूदी महासभा स निकर जाइ क कहेन अउर फिन उ सबइ इ कहत भए आपुस मँ बिचार करइ लागेन कि,
16
“इ पचन्क संग कइसा बिवहार कीन्ह जाइ? काहेकि यरूसलेम मँ बसइया हर कउनो जानत ह कि ऍनके जरिये एक ठु अजरज क काम कीन्ह गवा ह अउर हम ओका मना नाहीं कइ सकित।
17
मुला हम ऍनका चिताउनी दइ देइ कि उ सबइ इ नाउँ क बात कउनो अउर मनई स जिन करइँ काहेकि मनइयन म इ बात क संचरइ क अउर फैलि जाइ स रोक जाइ सकइ।”
18
तउ पचे ओनका भीतर बोलाएन अउर हुकुम दिहेन कि उ पचे ईसू क नाउँ पन तउ कउनो स कछू बात करइँ अउर न ही उपदेस देइँ।
19
मुला पतरस अउर यूहन्ना ओनका जवाब दिहेन, “तू पचे ही फरियावा, क परमेस्सर क समन्वा हमरे बरे इ नीक होइ कि परमेस्सर न सुनिके हम तोहार सुनी?
20
हम, जउन कछू हम पचे लखा ह अउर सुना ह, ओका कहे क आलावा अउर कछू नाहिं कर सकित।”
21
फिन उ पचे ओनका धमकाए क पाछे छोड़ दिहन। ओनका सजा देइ क कउनो रस्ता नाहीं मिलि सका काहेकि जउन कछू भवा रहा, ओकरे बरे सबहिं मनइयन परमेस्सर क स्तुति करत रहेन। जउने मनई क नीक करइ क इ काम कीन्ह गवा रहा, ओकर उमिर चालीस बरिस स जिआदा रही।
23
जब ओनका छोड़ दीन्ह गवा तउ आपन ही मनइयन क लगे आइ गएन अउर ओनसे जउन कछू मुख्ययाजक अउर बुजुर्ग यहूदी नेतन कहेन, उ सब ओनका कहिके सुनावा गवा।
24
जब उ पचे इ सुनेन तउ मिलिके उँची आवाज मँ परमेस्सर क गोहरावत भवा बोलेन, “स्वामी, तू ही अकास, धरती, समुद्दर अउर ओकरे अंदर जउन कछू अहइ, ओका बनाया ह।
25
तू ही पवित्तर आतिमा क जरिये आपन सेवक, हमरे पूर्वज दाऊद क मुँहना स कहे रहा: ‘देखाएन इ जानित आपन अहंकार काहे? मनइयन वृथा ही कुचाल काहे किहेन?
26
इ धरती क राजा लोग आपन क तइयार किहेन ओनके खिलाफ जुद्ध बरे। अउर राजा बटुर गएन पर्भू अउर ओकरे मसीह क खिलाफत मँ।’
27
हाँ, हेरोदेस अउर पुन्तियूस पिलातुस भी इ सहर मँ गैर यहूदियन अउर इस्त्राएलियन क संग मिलिके तोहरे पवित्तर सेवक ईसू क खिलाफ, जेकर तू मसीह रूप मँ अभिसेक किहे ह, सचमुच उ पचे एक अउट ग रहेन।
28
उ पचे बटुर गएन काहेकि तोहार सक्ती अउर इच्छा क अनुसार जउन कछू पहिले ही तय होइ चुका रहा उ पूरा होइ।
29
अउर अबहिं हे पर्भू, ओनकइ धमकिन प धियान द्या अउर आपन सेवक लोगन क निडर होइके ‘तोहार बचन’ सुनावइ क सक्ती द्या।
30
जब कि चंगा किहे क पाछे आपन हाथ बढ़ाया अउर अद्भुत चीन्हन अउर अद्भुत कारजन तोहरे पवित्तर सेवकन क जरिये ईसू क नाउँ प कीन्ह जात रहत हीं।”
31
जब उ पचे पराथना कइ चुकेन तउ जउने ठउरे प उ सबइ बटुरा रहेन, उ हल गवा अउर ओन सब मँ “पवित्तर आतिमा” समाइ गवा। अउर उ पचे निडर होइके परमेस्सर क बचन बोलइ लागेन।
32
बिसवासियन क इ समूचा दल एक मन अउर एक आतिमा स साथ रहा। कउनो भी इ नाहीं कहत रहा कि ओकर कउनो भी चीज ओकर आपन अहइ। ओनकइ लगे जउन कछू होत, उ पचे सब कछू क आपुस मँ बाँट लेतेन।
33
अउर प्रेरितन पूरी सक्ती क संग पर्भू ईसू क पुनरूत्थान क बारे मँ साच्छी देत रहेन। परमेस्सर क महान बरदान ओन पइ बना रहत।
34
दले मँ कउनो क कउनो चीज क कमी नाहीं रहत रही। काहेकि जउन कउनो क लगे खेत या घर होत, उ पचे ओका बेच देत रहेन अउर ओसे जउन धन मिलत,
35
ओका लिआइके प्रेरितन क गोड़वा प धइ देतेन। अउर जेका जेतॅनी जरूरत होत, ओका ओतॅना धन दइ दीन्ह जात।
36
उदाहरण बरे यूसुफ नाउँ क, साइप्रस मँ पइदा भवा, एक लेवी रहा, जेका प्रेरितन बरनाबास (अर्थात् “सान्ति क पूत”) भी कहा करत रहेन।
37
उ एक ठु खेत बेंच दिहेस जेकर उ मालिक रहा अउर उ धन लाइके प्रेरितन क गोड़वा प धइ दिहस।
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 5 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28