bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
Awadhi
/
Deuteronomy 30
Deuteronomy 30
Awadhi
← Chapter 29
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 31 →
1
“जउन मइँ कहेउँ ह तू पचन पइ होइके रही। तू पचे आसीर्बाद स बढ़िया चीजन पउब्या अउ अभिसाप स बुरी चीजन पउब्या। यहोवा तोहार परमेस्सर तू पचन्क दूसर रास्ट्रन मँ पठई। तब तू पचे एकरे बारे मँ सोचब्या।
2
उ समइ तू पचे अउर तोहार संतानन यहोवा, आपन परमेस्सर क लगे लौटिहीं। तू पचे पूरा तन-मन स ओन आदेसन क मनब्या जउन आजु हम पचे दीन्ह ह।
3
तबहिं यहोवा तोहार पचन्क परमेस्सर तू पचन्पइ दयालु होइ। यहोवा तू पचन्क फुन अजाद करी। उ ओन रास्ट्रन स तू पचन्क लउटाई जहाँ उ तू पचन्क पठए रहा।
4
चाहे तू पचे पृथ्वी क सब त दूर जगह पइ पठइ दीन्ह गवा होइ, यहोवा तोहार परमेस्स तू पचन्क बटोरी अउर तू पचन्क हुआँ स वापस लिआइ।
5
यहोवा तू पचन्क उ देस मँ लिआइ जउन तोहरे पुरखन क रहा अउर उ देस तोहार होइ। यहोवा तोहार भला करी अउर तोहरे लगे ओसे जियादा होइ, जेतॅना तोहरे पुरखन क लगे रहा अउर तोहरे रास्ट्र मँ ओसे जियादा लोग जेतना ओनके लगे कबहुँ रहेन।
6
यहोवा तोहार परमेस्सर, तू पचन्क अउ तोहरे संतानन क हिरदय क खतना करी कि उ सबइ ओकरी अगया मानइ चइहीं। तब तू पचे यहोवा क आपन सम्पूर्ण हिरदय अउ आतिमा स पिरेम करब्या अउर तू पचे जिअत रहब्या!
7
“अउर यहोवा तोहार परमेस्सर इ सबइ अभिसापन क तोहरे ओन दुस्मनन पइ उतारी जउन तोहसे घिना करत हीं अउर तू पचन्क परेसान करत हीं
8
अउर तू फुन यहोवा क आग्या क मनब्या। तू पचे ओन सबहिं आदेसन क मनब्या जेनका मइँ आजु तू पचन्क दिहेउँ ह।
9
यहोवा तोहार परमेस्सर तू पचन्क ओन सब मँ सफल बनाई जउन तू पचे करब्या। उ तू पचन्क बहोत स गदेलन बरे, तोहरे गोरुअन क बहोत बछवन अउर तोहरे खेतन क नीक फसल होइ क वरदान देइ। यहोवा तोहरे बरे भला होइ। यहोवा तोहार भला करइ मँ वइसेन ही खुस होइ जइसेन खुस उ तोहरे पुरखन क भला करइ मँ होत रहा।
10
मुला तू पचन्क उ सब कछू जरूर करइ चाही जउन यहोवा तोहार परमेस्सर तू पचन्स करइ बरे कहत ह। तू पचन्क ओकरे अउ हुकुमन जउन व्यवस्था क किताबे मँ लिखे भए क जरूर मानइ चाही। तू पचन्क यहोवा आपन परमेस्सर कइँती आपन पूरा हिरदय अउर आतिमा स अर्पित होइ जाइ चाही।
11
“आजु जउन आदेसन क मइँ तू पचन्क देत हउँ, उ तोहरे बरे बहोत कठिन नाहीं बा। इ तोहरी पहोंच क बाहेर नाहीं अहइ।
12
इ आदेस सरग मँ नाहीं अहइ जेहसे तू पचन्क कहइ क पड़इ ‘हम लोगन बरे सरगे मँ कउन जाइ अउ ओका हम लोगन क लगे लिआइ जेहसे हम पचे ओका सुनि सकी अउर ओकर पालन करइ सकी?’
13
इ आदेस समुद्दर क दूसरे पार नाहीं अहइ जेहसे तू पचे इ कहा कि ‘हमरे बरे समुद्दर कउन पार करी अउर ऍका लिआइ जेहसे हम पचे ऍका सुनि सकी अउर कइ सकी?’
14
नाहीं, यहोवा क बचन तोहरे लगे अहइ। इ तोहरे मुँह अउर तोहरे हिरदय मँ अहइ जेहसे तू पचे ऍका कइ सका।
15
“मइँ आजु तोहरे पचन्क समन्वा जिन्नगी अउ मउत, समृद्धि अउ विनास धइ दिहेउँ ह।
16
मइँ आजु तू पचन्क आदेस देत अहउँ कि यहोवा आपन परमेसर स पिरेम करा, ओकरे राहे पइ चला अउ ओकरे आदेसन, नेमन अउ हुकुमन क माना। तब तू पचे जिअत रहब्या अउ तोहार रास्ट्र जियादा तादाद मँ होइ। अउर यहोवा तोहार परमेस्सर तू पचन्क उ देस मँ आसीर्बाद देइ जेका आपन बनावइ बरे तू पचे हुआँ जात अहा।
17
मुला अगर तू पचे यहोवा स मुँह फेरत अहा अउ ओकर नाफरमानी करत अहा अउर दूसर देवतन क सेवा अउ पूजा मँ बहकावा जात अहा।
18
तब तू पचे पूरी तरह बरबाद कइ दीन्ह जाब्या। मइँ चिताउनी देत अहउँ, तू पचे यरदन नदी क पार क उ देस मँ लम्बे समइ तलक नाहीं रहब्या जेहमाँ आवइ बरे तू पचे तइयार अहा अउर जेका तू पचे आपन बनउब्या।
19
“आजु मइँ तू पचन्क दुइ राहन क चुनइ क छूट देत हउँ। मइँ धरती अउ अकास क तोहरे साच्छी बरे बुलाए हउँ। तू पचे जिन्नगी क चुन सकत ह, या तू पचे मउत क चुन सकत ह। जिन्नगी क चुनब वरदान लिआइ अउर मउत क चुनब अभिशाप। एह बरे जिन्नगी क चुना। तबहिं सिरिफ तू पचे अउर तोहार गदेलन जिअत रइहीं।
20
तू पचन्क यहोवा आपन परमेस्सर स पिरेम करइ चाही अउ ओकर आग्या मानइ चाही। ओसे अउर ओसे चिपक जा। काहेकि यहोवा तोहार जिन्नगी अहइ, अउर यहोवा तू पचन्क उ देस मँ लम्बा जीवन देइ जेका उ तोहरे पुरखन इब्राहीम, इसहाक अउ याकूब क देइ क बचन दिहे रहा।”
← Chapter 29
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 31 →