bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
Awadhi
/
Job 5
Job 5
Awadhi
← Chapter 4
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 6 →
1
“अय्यूब अगर तू चाहा तउ पुकारिके लखि ल्या मुला तोहका कउनो भी जवाब नाही देइ। तू कउनो भी सरगदूत कइँती मुड़ नाहीं सकत ह।
2
मूरख क किरोध उहइ क नास कइ देइ। मूरख मनई क ईर्स्या ओका ही मरि डइहीं।
3
मइँ एक मूरख क लखे रहेउँ जउन सोचत रहा कि उ सुरच्छित बाटइ। जेकर घर एका-एक सरापित कइ दीन्ह ग रहा ।
4
अइसे मूरख मनई क सन्तानन क कउनो भी मदद नाहीं कइ सका। कचहरी मँ ओनका बचइया कउनो नाहीं रहा।
5
ओकरी फसल क भूखे लोग खाइ गएन। हिआँ तलक कि भूखे लोग काँटन क झाड़ियन क बीच जमा भवा अन्न क उठाइ लइ गएन। जउन कछू भी ओन लोगन क लगे रहा उ सबइ चिजियन क लालची मनइयन उठाइके लइ गएन।
6
मुसीबत माटी स नाहीं निकरत ह, न ही विपत्ति मैदान मँ जामत ह।
7
मनई क जन्म दुःख भोगइ बरे भवा ह। इ ओतना ही फुरइ अहइ जेतना फुरइ अहइ कि आगी स चिनगारी ऊपर उठत ह।
8
मुला अय्यूब, अगर तोहरी जगह मइँ होतेउँ तउ मइँ परमेस्सर क लगे जाइके आपन दुःखड़ा कहितेउँ अउर ओकरे लगे राय माँगतेउँ।
9
परमेस्सर क कारनामा समुझइ मँ बहोत अदभुत अहइँ। परमेस्सर क अजूबा गना नाहीं जाइँ।
10
परमेस्सर धरती पइ बर्खा क पठवत ह, अउर उहइ खेतन मँ पानी पठवा करत ह।
11
परमेस्सर विनम्र लोगन क ऊपर उठावत ह। उ ओका ऊपर उठाइके दुःखी क जन क बचावत ह।
12
परमेस्सर चालाक अउ दुट्ठ लोगन क कुचाल क रोक देत ह। एह बरे ओनका सफलता नाहीं मिला करत।
13
परमेस्सर चतुर क उहइ क चतुराइ भरी जोजना मँ पखरि लेत ह। एह बरे ओनकर चतुराइ भरी सबइ जोजना असफल होतिन।
14
उ सबइ चालाक लोग दिन क प्रकास अँन्धियारा क नाई होइ गवा। हिआँ तलक कि दुपहर मँ भी उ पचे आधी-रात क जइसा ठोकर खात हीं।
15
परमेस्सर दीन मनई क मउत स बचावत ह अउर ओनका सक्तीसाली चतुर लोगन क सक्ती स बचावत ह।
16
एह बरे दीन मनई क भरोसा अहइ कि परमेस्सर इ होइ क निआव नाही करब।
17
“उ मनई भाग्यवान अहइ, जेकर परमेस्सर सुधार करत ह एह बरे जब सर्व सक्तीसाली परमेस्सर तू पचन्क सजा देत होइ तउ तू आपन दुःखड़ा जिन रोआ।
18
परमेस्सर ओन घावन पइ पट्टी बाधँत ह जेनका उ दिहस ह। उ चोट पहोंचावत ह मुला ओकर ही हाथ चंगा भी करत हीं।
19
उ तोहका छ: विपत्तियन स बचावा। हा! सात विपत्तियन मँ तोहका कउनो नोस्कान न होइ।
20
अकाल क समइ परमेस्सर तोहका मउत स बचाइ अउर परमेस्सर जुद्ध मँ तोहर मउत रच्छा करी।
21
जब लोग आपन कठोर सब्दन स तोहरे बरे बुरी बात बोलिहीं, तब परमेस्सर तोहर रच्छा करी। विपत्तियन क समइ तोहका डेराइ क जरुरत नाहीं होइ।
22
तू विनास अउ भुखमरी स समइ मँ भी खुस रहब्य़ा। अउर तोहका जगंली जनावरन स भी कबहुँ नाहीं डेराइ चाहीं।
23
मैदानन क चट्टानन तोहार साथी क होइ। जंगली जनावरन भी तोहरे संग सान्ति रखत हीं।
24
तू सान्ति स रहब्या काहेकि तोहार तम्बू सुरच्छित अहइ। तू पचे आपन भेड़न क बाड़ा भी लखब्या, अउर ओहमाँ एक भी भेड़ हेराइ नाहीं।
25
तोहर बहोत सन्तानन होइहीं। उ सबइ एँतना होइहीं जेतना घासे क पाती भुइयाँ पइ अहइँ।
26
तू उ पका भवा गोहूँ जइसा होब्या जउन कटनी क समइ तलक पकत ह। हाँ, तू पूरी उमर तलक जिअत रहब्या।
27
“अय्यूब, हम पचे इ सबइ बातन जाँचित ह अउर हम पचे जानित ह कि इ सबइ फुर अहइँ। एह बरे अय्यूब मोर सुना अउर तू इ सबन्क खुद आपन समुझ ल्या।”
← Chapter 4
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 6 →