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Malachi 4
Malachi 4
Awadhi
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1
“निआव क समइ आवत ह। इ गरम भट्ठी जइसा होइ। सबहिं घमण्डी मनई उ समइ सजा पइहीं। उ पचे सबहिं बुरा करम करइवाले लोग सूखी घास क तरह बरिहीं। उ पचे उ पेड़ क जइसा बरत होइहीं, जउन सिखर स ठुँठ तलक बिना कछू छोड़े बारत हीं” सर्वसक्तीमान यहोवा इ सब कहेस।
2
“मुला, तू सबइ जउन मोर नाउँ क सम्मान किहेस ह, तू पचन पइ अच्छाई उदय होत भए सूरज क तरह चमकी। इ सूरज क किरणन क तरह तन्दुरुस्ती लिआब्या। तू पचे अइसे ही अजाद अउ खुस होब्या जइसे अपने थान स अजाद भए बछवन।
3
तब तू पचे ओन बुरे लोगन्क कुचरि डउब्या, उ पचे तोहरे सबन क गोड़े क नीचे राखी जइसे होइहीं। मइँ निआव क समइ इ सबइ घटना क घटित कराउब।” सर्वसक्तीमान यहोवा इ सब कहेस।
4
“मूसा क व्यवस्था क सुमिरा अउर अनुपालन करा। मूसा मोर सेवक रहा। मइँ होरेब पर्वते पइ ओन कानूनन अउ नेमन क ओका दिहेउँ। उ सबइ नेम इस्राएल क सबहिं लोगन बरे अहइँ।”
5
यहोवा कहेस, “लखा, मइँ नबी एलिय्याह क तोहरे लगे पठउब। उ यहोवा क हिआँ स उ महान अउ खउफनाक निआव क समइ स पहिले आइ।
6
एलिय्याह महतारी-बाप अउर गदेलन क बीच पुन: रिस्ता कायम करी। वरना, मइँ, परमेस्सर आउब अउर तोहरे सबन क देस क पूरी तरह नस्ट करब।”
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