Isaiah 1:5 — Compare Translations

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Awadhi
परमेस्सर कहत ह, “मइँ तू सबइ लोगन क अउर दण्ड काहे देत रहउँ? मइँ तू पचन्क दण्ड दिहेउँ, मुला तू पचे नाहीं बदल्या। तू पचे मोरे बिरूद्ध विद्रोह करत ही रह्या। अब हर मूँड़ घायल अहइ अउ हर हिरदय दुखी अहइ।