Bhilali (भगवानेन छाचला बुल)
काहाकी मेसे धाक छे, काय असो नी हवे, की मे आवीन जसु चाहो, असु तुहुंक नी जड़ो; ने मेसे बी जसा नी चाहजे असात जड़ो, ने तुहुं तुंद्रे मां झगड़ा हय र्या, जळन कर र्या, रीसवाय र्या, आपसान ने भलो हवणेन वीच्यार कर्या, दीसरान वाक नीकाळ र्या, चुगली कर र्या, मटाय कर र्या, ने बीरजु पाड़ी र्या।