Bhilali (भगवानेन छाचला बुल)
ने तत्यार ईसु कह्यु, “मेसेक कुण छीम्यो?” जत्यार आखा मे नी छीम्यु, मे नी छीम्यु, कहीन मना करने बाजी गुय, ती पतरस ने तेरा साती कह्या, “ए मालीक! तुसेक मालुम नी हय काय? की चारे मेर सी माणसे तुसेक घेरवी रया, ने तारे पर धकलाय्न पड़े-पड़े तसा हय र्या।”