Acts 3:2 — Compare Translations

10 translations compared side by side

Hindi (Roman Script)
aur log aek janm ke langade ko la rahe the, jis ko ve prati din mandair ke us dar par jo sundar kahalata haai, baaitta dete the, ki vah mandair men janevalon se bheekh mange.
Hindi 2017 (नया नियम)
और लोग एक जन्‍म के लंगड़े को ला रहे थे, जिसको वे प्रति दिन मन्‍दिर के उस द्वार पर जो ‘सुन्‍दर’ कहलाता है, बैठा देते थे, कि वह मन्‍दिर में जानेवालों से भीख माँगे।
Hindi Bible (ERV) (पवित्र बाइबल)
तभी एक ऐसे व्यक्ति को जो जन्म से ही लँगड़ा था, ले जाया जा रहा था। वे हर दिन उसे मन्दिर के सुन्दर नामक द्वार पर बैठा दिया करते थे। ताकि वह मन्दिर में जाने वाले लोगों से भीख के पैसे माँग लिया करे।
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
लोग एक मनुष्‍य को ले जा रहे थे, जो जन्‍म से लँगड़ा था। वे उसे प्रतिदिन ला कर मन्‍दिर के ‘सुन्‍दर’ नामक फाटक के पास छोड़ देते थे, जिससे वह मन्‍दिर के अन्‍दर जाने वालों से भीख माँग सके।
Hindi Bible HHBD
और लोग एक जन्म के लंगड़े को ला रहे थे, जिस को वे प्रति दिन मन्दिर के उस द्वार पर जो सुन्दर कहलाता है, बैठा देते थे, कि वह मन्दिर में जानेवालों से भीख मांगे।
Hindi Fiji (Nawa Haup)
Sab roj wahi ṭaaim ek janam ke langṛa admi ke log le jaay ke Mandir ke duaari pe beiṭhaay dewat rahin. Mandir ke duaari ke naam Sundar Gaiṭ raha jahañ langṛa admi beiṭh ke bhittar jaay waala log se bheek maañgat raha.
Hindi HINOVBSI (पवित्र बाइबिल OV (Re-edited) Bible (BSI))
और लोग एक जन्म के लंगड़े को ला रहे थे, जिसको वे प्रतिदिन मन्दिर के उस द्वार पर जो ‘सुन्दर’ कहलाता है, बैठा देते थे कि वह मन्दिर में जानेवालों से भीख माँगे।
Hindi HSB 2023 (नवीन हिंदी बाइबल)
लोग जन्म से लंगड़े एक मनुष्य को लाकर प्रतिदिन मंदिर-परिसर के सुंदर नामक द्वार के पास बैठा देते थे कि वह मंदिर-परिसर में प्रवेश करनेवालों से भीख माँगे।
Hindi HSS 2019 (सरल हिन्दी बाइबल)
उसी समय जन्म से अपंग एक व्यक्ति को भी वहां ले जाया जा रहा था, जिसे प्रतिदिन मंदिर के ओरियन अर्थात् सुंदर नामक द्वार पर छोड़ दिया जाता था कि वह वहां प्रवेश करते व्यक्तियों से भिक्षा विनती कर सके.
Hindi IRVHIN (इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019)
और लोग एक जन्म के लँगड़े को ला रहे थे, जिसको वे प्रतिदिन मन्दिर के उस द्वार पर जो ‘सुन्दर’ कहलाता है, बैठा देते थे, कि वह मन्दिर में जानेवालों से भीख माँगे।