Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
वास्तव मे जाबत धरि अपना सभ एहि “तम्बू” मे छी, अर्थात्, एहि भौतिक शरीर मे, तँ बोझ सँ दबायल कुहरैत छी। कारण, अपना सभ एहि तम्बू केँ उतारऽ चाहैत छी, से बात नहि अछि, मुदा ओहि स्वर्गिक शरीर केँ उपर सँ धारण करऽ चाहैत छी जाहि सँ एहि मरणशील शरीरक स्थान पर अनन्त काल तक जीवित रहऽ वला प्राप्त करी।