Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
ई सभ, अर्थात्, अपना सँ बनाओल धार्मिक नियम केँ माननाइ, नम्रताक आडम्बर देखौनाइ, आ अपना शरीर केँ कष्ट देनाइ, ओहन बात अछि जाहि मे निःसन्देह बुद्धिक बात तँ बुझाइत अछि, मुदा शारीरिक अभिलाषा सभ केँ रोकऽ मे एहि सभ सँ कोनो लाभ नहि होइत अछि।