mewari
जद्याँ ईसू कनारे उतरियो, तो वणी नगर को एक मनक वाँकाऊँ मल्यो, जिंमें हुगली आत्मा ही अन वो घणा दनाऊँ नागो-पुगो फरतो हो वो घरे ने रेतो हो, पण कबराँ मेंईस रेतो हो। अन जद्याँ मनक वींका हात-पगाँ ने हाँकळा अन बेड़्याऊँ बांदता हा, तो वो वणा ने तोड़ नाकतो हो, अन हुगली आत्मा वींने हुन्ना काकड़ में ले जाती ही। वो ईसू ने देकन हाको करबा लागो अन धोग देन केबा लागो, “हो परम-परदान परमेसर का बेटा ईसू, मने थाँकाऊँ कई लेणो-देणो। मूँ अरज करूँ हूँ, मने दुक मती दो।” काँके, ईसू वणी हुगली आत्माने वणी मनक मेंऊँ निकळबा की आग्या दे रिया हा।