bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
Awadhi
/
Deuteronomy 27
Deuteronomy 27
Awadhi
← Chapter 26
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 28 →
1
मूसा अउर इस्राएल क प्रमुखन मनइयन क आदेस दिहस। उ कहेस, “ओन सबहिं आदेसन क माना जेनका मइँ आजु देत हउँ।
2
जउने दिन तू यरदन नदी पार कइके उ देस मँ घुसा जेका यहोवा तोहार परमेस्सर तू पचन्क देत अहइ उ दिन, आपन बरे बहोत बड़की सिलन क तइयार करा। इ सबइ सिला क पलसतर स ढाँकि द्या।
3
तब इ उपदेस क सब बातन इ पाथरन पइ लिखी द्या। तू पचन्क इ तब करइ चाही जब तू पचे यरदन नदी क पार पहोंच जा। तब उ देस मँ जाइ सकब्या जउन मँ दूध अउर सहद बहत अहइ जेका यहोवा तोहार परमेस्सर तू पचन्क देत अहइँ। यहोवा तोहरे पुरखन क परमेस्सर ऍका दइके आपन बचन क पूरा किहस ह।
4
“यरदन नदी क पार जाइके पाछे तू पचन्क इ सिलन क एबाल पहाड़े पइ आजु क मोरे आदेस क मुताबिक स्थापना करइ चाही। तू पचन्क इ पाथरन क चूना क लेप स ढाँकि देइ चाही।
5
हुआँ पइ यहोवा आपन परमेस्सर क वेदी बनावइ बरे भी कछू सिला क उपयोग करा। पाथरन क काटइ बरे लोहा क अउजारन क उपयोग जिन करा।
6
तू पचन्क यहोवा आपन परमेस्सर क वेदी पूरा पाथरन स बनावा अउर तब यहोवा आपन परमेस्सर बरे एह पइ होमबलि चढ़ावा।
7
तोहका मेलबलि चढ़ावइ चाही अउर ओनका खाइ चाही। खा अउर यहोवा आपन परमेस्सर क मौजूदगी मँ खुसी क समइ बितावा।
8
तू पचन्क इ सबइ उपदेसन क पाथर क सिलन पइ साफ साफ लिखि देइ चाही।”
9
मूसा अउर लेवी बंसी याजकन इस्राएल क सबहिं लोगन स बात किहस। उ कहेस, “इस्राएलियो, सान्त रहा अउ सुना! आजु तू लोग, यहोवा आपन परमेस्सर क लोग होइ गवा।
10
एह बरे तू पचन्क उ सब कछू जरूर करइ चाही जउन यहोवा तोहार परमेस्सर कहत ह। तू पचन्क ओकरे ओन आदेसन अउ नेमन क जरूर मानइ चाही जेनका मइँ आजु तू पचन्क दइ देत हउँ।”
11
उहइ दिन, मूसा लोगन क आदेस दिहेस,
12
“जब तू पचे यरदन नदी क पार जाब्या ओकरे पाछे इ सबइ परिवार समूह गिरिज्जीम पहाड़े पइ खड़ा होइ के लोगन्क आसीर्बाद देइहीं: सिमोन, लेवी, यहूदा, इस्साकार, यूसुफ अउ बिन्यामीन।
13
अउर इ सबइ परिवार समूह एबाल पहाड़े पइ अभिसाप बाँचिहीं: रूबेन, गाद, आसेर, जबूलून, दान अउर नप्ताली।
14
“अउर लेवी बंसी इस्राएल क सबहिं लोगन स ऊँची अवाजे मँ कइँहीं:
15
“‘उ मनई अभिसाप स दबा बा जउन लबार देवता बनावत ह अउर ओका गुप्त ठउरे मँ धरत ह। लबार देवतन सिरिफ उ सबइ मूरतियन अहइँ जेका कउनो कारीगर काठ, पाथर या धातु क बनावत ह। यहोवा ओन चीजन स घिना करत ह!’ “तब सबहिं लोग जवाब देइहीं, ‘आमीन!’
16
“लेवी बंसी कइहीं, ‘उ व्यक्ति अभिसापित अहइ जउन आपन महतारी अउर बाप क बेज्जत करत ह।’ “सबहिं लोग जवाब देइहीं, ‘आमीन!’
17
“लेवी बंसी कइहीं: ‘उ व्यक्ति अभिसापित अहइ जउन आपन पड़ोसी क चउहद्दी-चीन्हा क खिसकावत ह।’ “तब सबहिं लोग कइहीं, ‘आमीन!’
18
“लेवी बंसी कइहीं: ‘उ व्यक्ति अभिसापित अहइ जउन आँधर क कुमार्ग पर चलावत ह।’ “तब सबहिं लोग कइहीं, ‘आमीन!’
19
“लेवी बंसी कइहीं: ‘उ व्यक्ति अभिसापित अहइ जउन बिदेसियन, अनाथन अउर राँड़ मेहररुअन क संग निआव नाहीं करत।’ “तब सब लोग कइहीं, ‘आमीन!’
20
“लेवी बंसी कइहीं: ‘उ व्यक्ति अभिसापित अहइ जउन आपन बाप क पत्नी क संग तने क सम्बंध रखत ह काहेकि उ आपन बाप क नंगा क तरह करत ह।’ “तब सबहिं लोग कइहीं, ‘आमीन!’
21
“लेवी बंसी कइहीं: ‘उ व्यक्ति अभिसापित अहइ जउन कउनो तरह क जनावर क संग तने क सम्बंध रखत ह।’ “तब सबहिं लोग कइहीं, ‘आमीन!’
22
“लेवी बंसी कइहीं: ‘उ व्यक्ति अभिसापित अहइ जउन आपन महतारी क बिटिया या आपन बाप क बिटिया, आपन बहिन क संग तने क सम्बंध रखत ह।’ “तब सबहिं लोग कइहीं, ‘आमीन!’
23
“लेवी बंसी कइहीं: ‘उ व्यक्ति अभिसापित बाटइ जउन आपन सास क संग तने क सम्बंध रखत ह।’ “तब सबहिं लोग कइहीं, ‘आमीन।’
24
“लेवी बंसी कइहीं: ‘उ व्यक्ति अभिसापित अहइ जउन दूसर मनई क लुकाई क कतल करत ह!’ “तब सबहिं लोग कइहीं, ‘आमीन!’
25
“लेवी बंसी कइहीं: ‘उ व्यक्ति अभिसापित अहइ जउन निदोर्ख क कतल बरे धन वसूलत ह!’ “तब सबहिं लोग कइहीं, ‘आमीन!’
26
“लेवी बंसी कइहीं: ‘उ व्यक्ति अभिसापित अहइ जउन इ उपदेसन क समर्थन नाहीं करत अउर ओका पालन नाहीं करत।’ “तब सबहिं लोग कइहीं, ‘आमीन!’
← Chapter 26
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 28 →