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Haryanvi Bible (हरियाणवी)
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1
जिब हम बच लिकड़े, तो बेरा लाग्या के यो माल्टा टापू कुह्वावै सै।
2
ओड़ै के बासिन्दयां नै म्हारै पै अनोक्खी दया करी, क्यूँके मिह बरसण कै कारण ठण्ड थी, ज्यांतै आग सुलगाकै हम सारया ताहीं ठहराया।
3
जिब पौलुस नै लाकड़ियाँ का भरोटा कठ्ठा करकै आग पै धरया, तो एक साँप आँच पाकै लिकड़या अर उसकै हाथ तै लिपट गया।
4
जिब उन बासिन्दयां नै साँप ताहीं उसकै हाथ तै लिपटे होड़ देख्या, तो आप्पस म्ह कह्या, “साच्चए यो माणस खून्नी सै के फेर भी समुन्दर तै बच ग्या, तोभी न्याय नै जिन्दा कोनी रहण दिया।”
5
फेर उसनै साँप ताहीं आग म्ह झटक दिया, अर उस ताहीं किमे नुकसान कोनी होया।
6
पर वे लोग बाट देक्खै थे के वो सूज जावैगा या चाणचक पड़कै मर जावैगा, पर जिब वे घणी वार ताहीं देखदे रहे अर देख्या के उसका किमे भी कोनी बिगड़या, तो अपणा विचार बदलकै कह्या, “यो तो कोए देवता सै।”
7
उस जगहां कै लोवै-धोवै उस टापू कै प्रधान पुबलियुस की धरती थी। उसनै म्हारै ताहीं अपणे घरां ले जाकै तीन दिन मित्तर की ढाळ सेवा-पाणी करी।
8
पुबलियुस का बाप बुखार अर बवासीर तै बीमार पड्या था। आखर म्ह पौलुस नै उसकै धोरै कमरे म्ह जाकै प्रार्थना करी अर उसपै हाथ धरकै उस ताहीं ठीक करया।
9
जिब इसा होया तो उस टापू के बाकी बीमार पौलुस कै धोरै आये अर वे चंगे करे गये।
10
उननै म्हारा घणा आदर-मान करया, अर जिब हम चाल्लण लाग्गे तो जो किमे म्हारै खात्तर जरूरी था, उननै जहाज पै धर दिया।
11
तीन महिन्ने कै पाच्छै हमनै सिकन्दरिया जावण आळे जहाज पै सफर शरु करया, यो जहाज ठण्ड़ के कारण इस टापू म्ह ठैहरा होया था, इस जहाज के आगले भाग पै एक जोड़ी देवत्यां का एक निशान था। (दियुसकूरी गढ़ी होई थी)
12
सुरकूसा नगर म्ह लंगर गेर कै हम तीन दिन टिके रहे।
13
ओड़ै तै आग्गै बढ़कै हम रेगियुम नगर म्ह आये, अर एक दिन कै पाच्छै दक्षिणी हवा चाल्ली, फेर हम दुसरे दिन पुतियुली नगर म्ह आये।
14
ओड़ै हमनै बिश्वासी भाई मिले, उनकै कहणे तै हम उनकै उरै सात दिन ताहीं रहे, अर इस तरियां तै हम रोम देश कान्ही चाल्ले।
15
कुछ बिश्वासी भाई रोम देश तै म्हारी खबर सुणकै अप्पियुस कै चौक अर तीन-सराए ताहीं म्हारै तै फेटण नै लिकड़ आये, जिन नै देखकै पौलुस नै परमेसवर का धन्यवाद करया अर बड़ा उत्साहित होया।
16
जिब हम रोम नगर म्ह पोहचे, तो पौलुस ताहीं एक सिपाही कै गेल्या जो उसकी रुखाळी करै था, एक्ले रहण का हुकम मिलग्या।
17
तीन दिन कै पाच्छै उसनै यहूदियाँ कै खास माणसां ताहीं बुलाया, अर जिब वे कठ्ठे होए तो उनतै कह्या, “हे भाईयो, मन्नै अपणे माणसां कै या बाप-दाद्या कै बीवारां कै बिरोध म्ह किमे भी कोनी करया, तोभी कैदी बणाकै यरुशलेम नगर तै रोमी सरकार कै हाथ्थां सौंप्या गया।
18
उननै मेरै ताहीं जाँचकै छोड़ देणा चाह्या, क्यूँके मेरै म्ह मौत कै जोग्गा कोए कसूर कोनी था।
19
पर जिब यहूदी अगुवें इसकै बिरोध म्ह बोल्लण लाग्गे, तो मन्नै कैसर की दुहाई देणी पड़ी यो न्ही के मन्नै अपणे माणसां पै कोए दोष लाणा था।
20
ज्यांतै मन्नै थारे ताहीं बुलाया सै के थारे तै मिलूं अर बतळाऊँ, क्यूँके इस्राएल की आस कै खात्तर वो मसीह इस बेल तै जकड़े होए सै।”
21
उननै उसतै कह्या, “ना हमनै तेरे बारै म्ह यहूदिया परदेस तै चिट्ठी पाई, अर ना बिश्वासी भाईयाँ म्ह तै किसे नै आकै तेरे बारै म्ह किमे बताया अर ना बुरा कह्या।
22
पर तेरा विचार के सै? वोए हम तेरे तै सुणणा चाहवां सां, क्यूँके हमनै बेरा सै के हरेक जगहां इस पंथ कै बिरोध म्ह माणस बात करै सै।”
23
फेर जो यहूदी पौलुस कै गैल थे, उननै उसकै खात्तर एक दिन ठहराया, अर घणे माणस उसकै उरै कठ्ठे होए, अर वो परमेसवर कै राज्य की गवाही देंदा होया, अर मूसा नबी के नियम-कायदे अर नबियाँ की किताबां तै यीशु कै बारै म्ह समझा-समझाकै सबेरै तै साँझ ताहीं वर्णन करदा रहया।
24
फेर कुछां नै उन बात्तां ताहीं मान लिया, अर कुछां नै बिश्वास कोनी करया।
25
जिब वे आप्पस म्ह एक पंथ कोनी होए, तो पौलुस की इस बात कै कहण पै चाल्ले गये “पवित्र आत्मा नै यशायाह नबी कै जरिये थारे बाप-दाद्या तै सही ए कह्या था,”
26
“जाकै इन माणसां तै कह, के सुणदे तो रहोगे, पर ना समझोगे, देखदे तो रहोगे, पर ना बुझ्झोगे!
27
क्यूँके ‘इन माणसां का मन मोट्टा अर उनके कान भारया हो गये सै, अर उननै अपणी आँख मूंद ली सै, इसा ना हो के वे कदे आँखां तै देक्खै अर कान्ना तै सुणै अर मन तै समझै अर पलटै, अर मै उन ताहीं ठीक करुँ।’
28
“इस करकै थम जाणो सो के परमेसवर कै इस उद्धार की कथा गैर यहूदियाँ कै धोरै भेज्जी गयी सै, अर वे स्वीकार करैगें।”
29
जिब उसनै न्यू कह्या तो यहूदी आप्पस म्ह घणे बहस करण लाग्गे अर ओड़ै तै चले गये।
30
वो पूरे दो साल अपणे किराए कै घर म्ह रहया,
31
अर जो उसकै धोरै आवै थे, उन सारया तै मिलदा रहया अर बिना रोक-टोक घणा निडर होकै परमेसवर कै राज्य का प्रचार करदा अर प्रभु यीशु मसीह की बात सिखान्दा रहया।
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