bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Bundeli
/
Bundeli
/
1 Timothy 6
1 Timothy 6
Bundeli
← Chapter 5
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
1
जितेक चाकर जूए के नेंचें आंय, बे अपने अपने मालक को बड़े मान के जोग जानें, जीसे परमेसुर के नाओं और उपदेस की निन्दा न होबे।
2
और जिन के मालक बिसवासी आंय, इन हां बे भईया होबे के कारन तुच्छ न जानें; बल्कि उन की और भी सेवा करें, कायसे ईसे लाभ उठाबेवारे बिसवासी और प्रेमी आंय: इन बातन के लाने उपदेस करियो और समझात रहियो।
3
जदि कोऊ और परकार कौ उपदेस देत आय; और साजी बातन हां, माने हमाए पिरभू यीशु मसीह की बातन को और ऊ उपदेस को नईं मानत, जो भक्ति के अनसार आय।
4
तो बो घमण्डी हो गओ, और कछु नईं जानत, पर ऊहां बिवाद और शब्दों पै बहस करबे कौ रोग आय, जिन से डाह, और लड़ाई, और निन्दा की बातें, और बुरय बुरय शक।
5
और उन मान्सन में बेकार के झगड़ा पैदा होत आंय, जिन की मती बिगड़ गई आय और बे सत्य से अलग हो गए आंय, जो समझत आंय कि भक्ति कमाई कौ दोरो आय।
6
पर संतोस के संग्गै भक्ति बड़ी कमाई आय।
7
कायसे न हम संसार में कछु लाए आंय और न कछु लै जा सकत आंय।
8
और जदि हमाए ऐंगर खाबे और पहनबे को होबै, तो इनईं पर संतोस करो चईये।
9
पर जो मालदार होबो चाहत आंय, बे ऐसी परीछा, और बेकार के काम और नुसकान में फंसत आंय, जो मान्सन हां बिगाड़ देत आय और बिनास के समन्दर में डुबो देत आय।
10
कायसे रुपईया कौ लोभ सब परकार की बुराईयन की जड़ आय, जीहां पाबे की कोसिस करत भए कितेक जनें बिसवास की गैल से भटक के अपने आप हां बिलात परकार के दुखों से छलनी कर लओ आय।
11
पर हे परमेसुर के जन, तें इन बातन से भाग; और धरम, भक्ति, बिसवास, प्रेम, धीरज और नम्रता कौ पीछा कर।
12
बिसवास की अच्छी कुस्ती लड़; और ऊ अनन्त जीवन को धर ले, जीके लाने तें बुलाओ गओ, और बिलात गवाह के सामूं अच्छो स्वीकार करो हतो।
13
मैं तोहां परमेसुर हां जो सब हां जीयत रखत आय, और पिरभू यीशु मसीह को गवाह मानके जीने पुन्तियुस पीलातुस के सामने अच्छो स्वीकार करो, जौ आदेस देत आंव।
14
कि तें हमाए पिरभू यीशु मसीह के परगट होबे तक ई आदेस हां बिना कलंक के और निरदोस राख।
15
जीहां बो ठीक बेरा में दिखा है, जो परम धन्न और राजाओं कौ राजा, और पिरभुओं कौ पिरभू आय।
16
और अमरता केवल ओई की आय, और बो अगम्य ज्योत में रहत आय, और न ऊहां कोई मान्स ने तको, और न कभऊं तक सकत आय: ऊ की प्रतिष्ठा और राज जुग जुग लौ रै है। आमीन।
17
ई संसार के मालदारों को आदेस दे, कि बे घमण्डी न होबें और धन कौ लालच न करें, पर परमेसुर पर जो हमाए सुख के लाने सब कछु बिलात देत आय।
18
और भलाई करें, और अच्छे कामन में धनी बनें; और उदार और मदद के लाने तईयार रैबें।
19
और आंगू के लाने एक अच्छी नी डाल राखें, कि सत्य के जीवन हां बस में कर लेबें।
20
हे तीमुथियुस ई बात की रखनवारी कर और जी समज हां समज कहबो भूल आय, ऊके असुद्ध बतकाव और बिरोध की बातन से दूर रह।
21
कितेक ई समज कौ अपना के, बिसवास से भटक गए आंय। तुम पर आसीस होत रैबे।
← Chapter 5
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
All chapters:
1
2
3
4
5
6