bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Bundeli
/
Bundeli
/
2 Peter 2
2 Peter 2
Bundeli
← Chapter 1
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 3 →
1
जौन भांत उन मान्सन में लबरे आगमवकता हते ओई भांत तुम में सोई लबरे परचारक हुईयें, जौन नास करबेवारे पाखंड कौ उद्घाटन लुके लुके कर हैं, बे अपने ऊ मालक को जीने उन हां मोल लओ आय मैट दें हैं, और अपने आप हां भारी नास की गैराई में डार दें हैं।
2
बिलात जनें उन के घांई लुच्चपन कर हैं, जिन के काजें सत्त की गैल हां निंदरो जै है।
3
बे लालच में आके लबरी बातें बना हैं और तुम हां अपने फायदा कौ कारन बना हैं, दण्ड़ कौ हुकम जो उन पे पेंला से हो चुको आय, और ऊके आबे में देर नईंयां, उन कौ नास झट्टई होबेवारो आय।
4
जब परमेसुर ने उन सरगदूतन हां जिन ने पाप करो हतो नईं छोड़ो, पर उन हां नरक में पठै के अन्धयारे कुन्डों में डाल दओ, जीसे बे न्याय के दिना लौ बन्दी रैबें।
5
परमेसुर ने पेंला जुग के संसार हां सोई न छोड़ो, परन्त पाप भरे संसार पे महा जलप्रलय पठै के सांचई के परचारक नूह के संग्गै सात और जनन हां बरका लओ।
6
परमेसुर ने सदोम और अमोरा नगरों हां नास कौ ऐसो दण्ड़ दओ, कि उन हां भस्म कर के राख में मिला दओ, जीसे बे आगे के अधरमी जनों को सीख के लाने एक कानौत बनें।
7
और धरमी लूत हां जौन अधरमी जनों के बुरए चालचलन से बिलात दुखी हतो, छुटकारो दओ।
8
(कायसे बो सांचो मान्स उन के मजारें रैत भए, और उन के अधरम के कामन हां तक तक के, और सुन सुन के, रोजीना अपने सांचे हिये में दुखी होत हतो)।
9
सो पिरभु भक्तन हां परीक्षा में से काड़ लैबो और अधरमी जन हां न्याय के दिना लौ दण्ड़ की दसा में धरबो सोई जानत आय।
10
सब से बढ़ के उन हां जौन बुरई बासनाओं के बस में होकें देयां के अनसार निंगत, और पिरभु के राज हां ओछो जानत आंय; बे ढीठ, और हठी आंय, और ऊंचे पद वारन हां बुरो भलो कैबे से नईं डरात।
11
जब कि सरगदूत जौन सकती और बल में उन से बड़े आंय, पिरभु के सामूं उन हां बुरो भलो कह के लांछन नईं लगात।
12
परन्त जे मान्स बिना समजवारे जनावर घांई आंय, जौन पकड़े जाबे और नास होबे के लाने पैदा भए आंय; जिन बातन हां बे जानतई नईंयां, उन के लाने दूसरन हां बुरो भलो कैत आंय, बे अपनी सड़ाहट में खुद सड़ जें हैं।
13
अपने अधरम कौ फल उनईं हां मिल है, उन हां दिन दुपारी सुख विलास करबो साजो लगत आय; बे कलंक और दागी आंय, जब बे तुमाए संग्गै खात पियत आंय, तब अपनी कुदाऊं से प्रेम भोज करके भोग विलास करत आंय।
14
उन की आंखें व्यभिचार से भरी आंय, बे अधरम करे बिना रै नईं सकत, बे चंचल मन वारन हां फुसला लेत आंय; उनके हिये लालच करबे की लत में पड़े आंय, बे सन्ताप के लरका बच्चा आंय।
15
बे सूदी गैल हां छोड़ के भटक गए आंय, और बओर के पूत बिलाम की गैल पे चलत आंय; जीने अधरम की मजूरी हां प्यारो जानो हतो।
16
परन्त ऊ ए अपने अधरम के काजें फटकार सुनने पड़ी, इते लौ कि मान्सन की भाषा न बोलबेवारी गदईया ने मान्सन के बोल से ऊ आगमवकता हां सिर्रीपन से हटको।
17
जे जनें सूके कुंआ, और आंधी के उड़ाए भए बादल आंय, इन के लाने भारी बड़ो अंधयारो ठैराओ गओ आय।
18
बे बेकार की घमण्ड की बातें कर कर के ओछे कामन से, उन मान्सन हां देयां की अभलाखा में फंसा लेत आंय, जौन हिराए भए में से अबै कड़ई रए आंय।
19
बे उन हां छूटो भओ होबे कौ कौल तो देत आंय, परन्त बे खुद सड़ी आदतन के चाकर आंय, कायसे जौन मान्स जीसे हार जात आय, बो ऊकौ चाकर बन जात आय।
20
जब बे पिरभु और तारन करबेवारे यीशु मसीह की पैचान द्वारा संसार की कुल भांत की सड़ाहट से बच कड़े, और फिन उन में फंस के हार गए, तो उन की पाछें की हालत पेंला से बुरई होत आय।
21
धरम की साजी गैल के न जानबे पे उन हां दई गई पवित्तर हुकम से फिर जाबे से भलो तो जौ होतो, कि बे ऊ ए न जानते, उन पे जा कहावत सई बैठत आय।
22
कूकर अपनी छांट कुदाऊं लौटत और सपराई भई सुंगरिया कीचड़ में लोटबे के लाने लौट जात आय।
← Chapter 1
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 3 →
All chapters:
1
2
3