bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Bundeli
/
Bundeli
/
James 4
James 4
Bundeli
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 5 →
1
तुम में न्याओ और झगड़ा कां से आ गए? का देयां के भोग विलास से नईं जौन हमाई देयां में बिराजे भए आंय?
2
तुम चाहना करत आव, पर तुम हां मिलत नईंयां; ई लाने कि तुम मार डालत आव और आपुस में जलन बैर रखत आव; और तुम हां कछु मिलत नईंयां; सो तुम न्याओ करत आव और तुम हां कछु मिलत नईंयां, कायसे बिन्तवाई नईं करत।
3
तुम मांगत आव और पात नईंयां, ई लाने कि बुरई नियत से मांगत आव, कि अपने भोग विलास में उड़ा दो।
4
हे पापीनिओ, का तुम नईं जानत, कि संसार से दोस्ती करबो परमेसुर से बैर धरबो आय? सो जो कोऊ संसार कौ दोस्त होबो चाहत आय, बो अपने आप हां परमेसुर कौ बैरी बनात आय।
5
का तुम जौ समजत आव, कि पवित्र बचन ऊंसई कहत आय? कि जौन आत्मा हां ऊ ने हमाए भीतरै बसाओ आय, कि बो ऐसी चाहना करत आय, कि ऊसे जलन डाह होबै।
6
बो तो औरऊ दया करत आय; ऐई काजें ऐसो लिखो आय, कि परमेसुर घमंडियों से बिरोद करत आय, पर दीनों पे दया करत आय।
7
ई लाने परमेसुर के बस में रओ; और शैतान छलिया कौ सामना करो, तो बो तुमाए ऐंगर से भाग जै है।
8
परमेसुर के ऐंगरे आओ, तो बो सोई तुमाए ऐंगरे आ है: हे पापियो, अपने काम सुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगो अपने हियन हां पवित्तर करो।
9
दुख मनाओ और रोओ, तुमाई हंसी, दुख में और तुमाओ मजा मौज उदासी में बदल जाए।
10
पिरभु के सामूं दीन बनो, तो बो तुम हां परधान बना है।
11
हे भईया हरौ, एक दूजे पे दोस न मढ़ो, जौन अपने भाईया की बदनामी करत आय, ऊ भाई पे दोष मढ़त आय, बो कानून धरम पे दोस लगात आय; और जदि तें कानून धरम पे दोस लगात आय, तो तें कानून धरम पे चलबेवारो नईंयां, पर ऊ पे हाकम ठैरो।
12
कानून बनाबेवारो और हाकम तो एकई आंय, जौन बरका सकत और नास करबे में सक्तिमान आंय; पर तें को आय, जौन अपने पड़ोसी पे दोस मढ़त आय?
13
तुम जौन जा कैत आव, आज या कल हम कोई और नगर में जाके उते एक साल रै हैं, और व्यापार कर के लाभ कमा हैं।
14
और जौ नईं जानत किकल का हुईये; तनक सुन लईयो, तुमाओ जीवन हैई का? तुम तो पानू की भाप जैसे आव, जौन तनक देर हां दिखात आय, फिन गायब हो जात आय।
15
पर तुम हां कओ चाईये, जदि पिरभु चाए तो हम जीयत रै हैं, और जौ काम सोई कर है।
16
पर तुम डींग मारबे पे घमण्ड करत आव; ऐसो घमण्ड सई नईं होत।
17
ई लाने जौन कोई भलाई करबो जानत आय और नईं करत, ऊके लाने जा बात पाप आय।
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 5 →
All chapters:
1
2
3
4
5