bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Bundeli
/
Bundeli
/
Romans 11
Romans 11
Bundeli
← Chapter 10
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 12 →
1
ई लाने मैं कैत आंव, का परमेसुर ने अपनी प्रजा हां छोड़ दओ? कभऊं नईं; मैं सोई इस्राएली आंव: इब्राहीम के वंस और बिन्यामीन के कुल में से आंव।
2
परमेसुर ने अपनी ऊ प्रजा हां नईं छोड़ो, जिन हां ऊ ने पेंला से नबेरो हतो: का तुम नईं जानत, कि पवित्तर पोथी में एलियाह अगमवकता के लाने का कओ गओ आय; कि बो इस्राएल के विरोद में परमेसुर से बिन्तवाई करत आय।
3
कि हे पिरभु, उन ने तोरे अगमवकतन हां मार डालो आय, और पवित्तर वेदियन हां मिटा दओ आय; और मैं ही अकेलो बरको आंव, और बे मोरे प्रान हां सोई नास करो चाहत आंय।
4
पर परमेसुर से उए का उत्तर मिलो कि मैंने अपने लाने सात हजार मान्सन हां बचा धरो आय जिन ने बाअल की पूजा नईं करी।
5
ठीक ऐई भांत ई टेम सोई, दया से नबेरे गए कछु मान्स बरक गए आंय।
6
जदि जौ दया से भओ आय, तो कर्मों से नईं; नईं तो दया फिन दया न रई।
7
ईको नतीजा का भओ? जौ कि इस्राएली जी की खोज में हते, बो उन हां नईं मिलो; पर नबेरे भयन हां मिलो, और बचे भए कठोर बना दए गए।
8
जैसो लिखो आय, परमेसुर ने उन हां आज के दिन लौ गैरी नींद में डाल दओ आय, और ऐसी आंखें दईं जौन न हेरें और ऐसे कान जौन न सुनें।
9
और दाऊद राजा कैत आय; उन कौ खैबो उन के लाने जाल, और फन्दा, और उपटा और दांड़ कौ काज होबे।
10
उन की आंखन पे अंधयारो छा जाबे जीसे न हेरें, और तें हमेसा उन की कमर हां झुकाए रै।
11
सो मैं कैत आंव का उन ने ई लाने ठोकर खाई, कि गिर पड़ें? क भऊं नईं: पर उनके गिरबे के काजें दूसरी जातवारन हां उद्धार मिलो, कि उन हां जलन होबे।
12
ई लाने जदि उनको गिरबो संसार के लाने धन और उन की घटी कमी दूसरी जातवारन के लाने मालपानू कौ काज बनी, तो उन की भरपूरी से का क छु न हुईये।
13
मैं तुम दूसरी जातवारन से कैत आंव: जब मैं दूसरी जातवारन के लाने प्रेरित आंव, तो मैं अपनी सेवा की बड़वाई करत आंव।
14
जीसे कोऊ भांत से अपने नातेदारन में जलन पैदा करवा के उन में से कैऊ अन कौ उद्धार करवाओं।
15
कायसे जब उन कौ त्याग दओ जाबो संसार के मिलाप कौ काज भओ, तो का उन को अपनाओ जाबो मरे भयन में से जी उठबे के बिरोबर न हुईये?
16
जब भेंट की पैली बस्त पवित्तर आय, तो पूरो और सब कछु पवित्तर हुईये: और जब जड़ें पवित्तर ठैरीं, तो डालियां सोई पवित्तर हुईयें।
17
पर जदि कछु डालें कतर दईं गईं, और तें जौन जंगली जैतून आय ऊ में सांटो गओ, और असली जैतून की जड़ की चिकनाई को हींसावारो बनो आय।
18
तो डालियन पे घमण्ड न करिये: और जदि तें घमण्ड करे, तो याद राखियो, कि तें जड़ हां नईं, परन्त जड़ तोहां संभालत आय।
19
फिन तें कै है कि डालियां ई लाने कतरी गईं, कि मैं सांटो जाओं।
20
सई आय, बे तो बिसवास न करबे के काजें कतरी गईं, पर तें बिसवास में बनो रैत आय, सो घमण्ड न कर पर डर के रै।
21
कायसे जब परमेसुर ने पेड़ की सई डालियन हां नईं छोड़ो, तो तोहां सोई न छोड़ है।
22
ई लाने परमेसुर की किरपा और कड़ाई हां तक! जौन गिर गए, उन पे कड़ाई, पर तो पे किरपा, जदि तें ऊ में बनो रै है तो भलो, नईं तो, तें सोई काट डालो जै है।
23
बे सोई जदि अबिसवास में न रैबें, तो सांटे जै हैं कायसे परमेसुर उन हां फिन के सांट सकत आय।
24
कायसे जदि तें ऊ जलपाई से, जौन अपने आप जंगली आय काटो गओ और स्वाभाव के बिरुद्ध साजे जलपाई में सांटो गओ, तो बे जौन साजे जैतून की डालियां आंय, अपने ई जैतून में काय न सांटे जै हैं।
25
हे भईया हरौ, कऊं ऐसो न होबै, कि तुम अपने आप हां समजदार मान लेओ; ई लाने मैं नईं चाहत कि तुम ई भेद से अनजान रओ, कि जब लौ दूसरी जातवारन कौ अंधबिसवास न मिट जाबै, तब लौ इस्राएल कौ एक भाग ऐंसई कठोर रै है।
26
और ई भांत से सबरो इस्राएल उद्धार पा है; जैसो लेख आय, छुड़ाबेवारो सिय्यौन से आ है, और अधर्म हां याकूब से दूर कर है।
27
और उन के संग्गै मोरो जौई कौल हुईये, मैं उन के पापन हां दूर कर दें हों।
28
भले सन्देसे के लेखे से तो तुमाए बैरी आंय, परन्त चुन लए जाबे से बे बापदादों के काजें प्यारे आंय।
29
कायसे परमेसुर के बरदान और बुलाहट अटल आंय।
30
कायसे जैसे तुम ने पेंला परमेसुर कौ हुकम न मानो पर अबै ऊ को हुकम न मानबे से तुम पे दया भई आय।
31
ऊंसई उन ने सोई अबै हुकम न मानो कि तुम पे जौन दया होत आय ऊसे उन पे सोई दया होबे।
32
कायसे परमेसुर ने सब हां हुकम तोड़बे कौ दोशी बना के राखो जी से सब पे दया होबे।
33
आहा! परमेसुर कौ धन और समज बड़ी गैरी आय! ऊकौ सोचबो कि उनकी थाह न मिले, और ऊ की गैल कौ बयान नईं हो सकत।
34
पिरभु की समज हां कीने जानो? या ऊकौ सलाय देबेवारो को भओ?
35
या कीने पेंला ऊ ए कछु दओ आय जी कौ बदला ऊहां चुकाओ जाए।
36
कायसे ओई कुदाऊं से, और ओई से, और ओई के लाने सब कछु आय: ऊकी मईमा जुगानजुग होत रैबे। आमीन।
← Chapter 10
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 12 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16