bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Garhwali
/
Garhwali GBM (Garhwali)
/
1 Corinthians 12
1 Corinthians 12
Garhwali GBM (Garhwali)
← Chapter 11
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 13 →
1
अब हे मेरा भै-बैंणो, मि चान्दु छौं कि तुम परमेस्वर की पवित्र आत्मा का द्वारा मिलण वळा दान-बरदानों का बारा मा जणदा ही छा।
2
अर जब तुम ज्यून्दा पिता परमेस्वर तैं नि जणदा छा, तब तुमरो जीवन कन छौ वांका बारा मा भि तुम जणदा ही छाँ। अर वे बगत त तुम बेजान मूरतों की पूजा करदा छा, अर ऊंका पिछनै चलदा छा, अर जन तुमतै बतये जान्दु छौ तुम उन्नि करदा छा।
3
इलै मि तुमतै समझै देन्दु कि अगर कुई इन बुल्दु कि, “यीशु ही प्रभु च” त वु केवल परमेस्वर की आत्मा का बतै जाण का मुताबिक ही इन बुल्दु, अर इन्द्रयो मनखि कभि भि इन नि बोलि सकदु कि, “यीशु पर हाय च।”
4
अर दान-बरदान कई किसम का छिन, पर परमेस्वर की पवित्र आत्मा एक ही च।
5
अर सेवा भि कई किसम की छिन, पर प्रभु एक ही च।
6
अर ठिक उन्नि काम भि कई किसम का छिन, मगर पिता परमेस्वर ही च जु कि हरेक काम तैं पूरु करण मा हमरि मदद करदु।
7
अर बिस्वासी लोगु की भलै खुणि पिता परमेस्वर न हम सभ्यों तैं पवित्र आत्मा को बरदान दिनी।
8
जन कि कुछ लोगु तैं पवित्र आत्मा का द्वारा ज्ञान कि बात करण को बरदान मिल्यूं च, त कुछ लोगु तैं पवित्र आत्मा बटि समझौणु खुणि अकल मिली च।
9
अर वे ही पवित्र आत्मा का द्वारा कुछ लोगु तैं बिस्वास मा और जादा मजबूत होण को बरदान मिलदु, त कैतैं पवित्र आत्मा का द्वारा बिमारों तैं खूब करण को बरदान मिल्यूं च।
10
अर कुछ लोग तैं चमत्कार का काम करण की ताकत मिली च, त कुछ लोगु तैं भविष्यबाणी करण की ताकत, अर कुछ लोगु तैं आत्माओं तैं परखण कि सामर्थ मिली च, अर कुछ लोगु तैं अलग-अलग भाषा मा बुलण को बरदान मिल्यूं च। अर जु लोग अलग-अलग भाषा मा बुल्दिन, कुछ लोगु तैं वीं भाषा तैं आम बोल-चाल मा समझौण को बरदान मिल्यूं च।
11
अर यू सब काम एक ही पवित्र आत्मा का द्वारा होनदिन। अर पिता परमेस्वर कै मनखि तैं क्या बरदान देण चाणु यू सब वु अपणी मनसा का मुताबिक ही करदु।
12
हे मेरा भै-बैंणो, जन कि हमरा सरील मा कई अंग छिन, फिर भि हमरु एक ही सरील च, ठिक उन्नि हम सभ्या का सभि लोग जौन यीशु मसीह पर बिस्वास कैरी वेका अंग छां।
13
अर हम बिस्वासी लोगु मा कुछ यहूदी जाति का छिन, अर कुछ लोग दुसरि जाति का छिन, अर कुछ लोगु गुलाम, त कुछ लोग आजाद छिन। पर हम सभ्या का सभि एक सरील ह्वे जां, इलै हम सभ्यों को एक ही पवित्र आत्मा का द्वारा बपतिस्मा ह्वे। अर पवित्र आत्मा वे पाणि का जन च जैतैं हम सभ्यों न एक कटोरा मा बटि पै।
14
हमरा सरील मा एक ही अंग नि च, बल्किन मा ये मा त कई अंग छिन।
15
अर अगर खुटा इन बुलला कि, “मि हाथ नि छौं, इलै मि सरील को हिस्सा नि छौं,” त इन बोन्न से क्या वु सरील को हिस्सा नि च?
16
अर अगर कन्दूड़ इन बोलो कि, “मि आंख नि छौं, इलै मि शरीर को हिस्सा नि छौं,” त इन बोन्न से क्या वु सरील को हिस्सा नि च?
17
अर अगर जु पूरु सरील आंख ही होन्दु, त सुणदा कनकै? अर अगर पूरु सरील कन्दूड़ ही होन्दु त सुन्घदा कनकै?
18
अर अगर सरील का सब अंग एक होन्दा, त फिर वेकू सरील नि बुले जान्दु। इलै पिता परमेस्वर ही च जैन सच्चि मा अपणी मनसा का मुताबिक हमरा पूरा सरील का सब अंगो तैं एकजुट कैरिके रख्युं च।
20
अर अलग-अलग अंग होण का बाद भि सरील एक ही च।
21
अर आंखा हाथ कू नि बोलि सकदिन, “मितैं तेरी कुई जरुरत नि च,” या मुण्ड़ खुटों कू नि बोलि सकदु कि, “मितैं तुमरि कुई जरुरत नि च।”
22
मगर हमरा सरील का जु अंग दुसरा अंगो से कमजोर छिन, असल मा वु ही भौत जरुरी छिन।
23
अर सरील का जौं अंगो तैं हम कम इज्जत का लैख समझद्यां, ऊंतैं हम ढाकी के रखद्यां अर ऊंतैं और भि जादा इज्जत देन्द्यां। अर इन कैरिके सरील का जु अंग इज्जत का लैख नि समझै जनदिन, ऊंतैं और भि जादा इज्जत मिलदी।
24
पर जौं अंगो तैं हम दुसरो तैं दिखौण मा दिक्कत नि समझद्यां, ऊं अंगो तैं हम कपड़ों से नि ढकौन्द्यां। पर पिता परमेस्वर न हमरा सरील तैं कुछ इन बणै कि जौं अंगो तैं हम कम इज्जत देन्द्यां ऊंतैं ही हम अच्छे से रखद्यां।
25
अर पिता परमेस्वर न इन इलै कैरी, ताकि हमरा सरील का सब अंग एकजुट ह्वेके रा। अर एक-दुसरे की पूरि फिकर कैरिके अच्छे से काम कैरी सैका।
26
अर जब सरील को एक अंग तैं दुख मिलदु, त हमरा पूरा सरील तैं तकलीफ होन्दी। ठिक उन्नि अगर एक तैं इज्जत मिलदी, त सरील का दुसरा अंग वेका दगड़ा-दगड़ि खुश होनदिन।
27
अर मि तुमतै बतै देन्दु, कि ठिक इन्नि तुम बिस्वासी लोग भि यीशु मसीह का सरील का अंग छाँ।
28
हे मेरा भै-बैंणो, तुम जु मसीह का अंग छाँ, तुम बिस्वासी समुदाय का लोगु तैं पिता परमेस्वर न चुणी, पैलि त खास चेला का रुप मा, दुसरा रैबर्या का रुप मा, तिसरा शिक्षा देण वळा। अर वेका बाद वेन ऊं लोगु तैं भि चुणी जौं का द्वारा वु चमत्कार का काम करदु, बिमारों तैं खूब करदु, अर वेन ऊंतैं भि चुणी जौं का द्वारा उ दुसरो की मदद करदु, अर ऊंतैं भि जु कि हर चीज को इंतजाम करौन्दिन, अर अलग-अलग भाषा बुलण वळा सब लोगु तैं वेन ही चुणी।
29
इलै सब लोग खास चेला नि होनदिन, अर ना ही सब रैबर्या। अर उन्नि सब लोग वचन सिखौण वळा नि होनदिन, अर ना ही सब चमत्कार करण वळा छिन।
30
अर नऽ ही सब लोग बिमारों तैं खूब कैरी सकदिन, अर ना ही सब लोग अलग-अलग भाषा बोलि सकदिन। अर ना ही सब लोगु तैं इन बरदान मिल्यूं च कि वु अलग-अलग भाषा को अनुवाद कैरिके आम बोल-चाल मा वेको मतलब बतै सैका।
31
इलै पवित्र आत्मा का द्वारा बड़ु से बड़ु बरदान पौण की इच्छा रखा। अर अब मि तुमतै जीवन जीण को सबसे अच्छु बाटु बतौन्दु।
← Chapter 11
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 13 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16