bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Garhwali
/
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
/
2 John 1
2 John 1
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
Jump to:
Chapter 1
1
मि यूहन्ना, मंडलि का पुरणा अगुवा यु चिठ्ठी वीं जनन अर वीं का नौंना कु लिखणु छो, जै तैं पिता परमेश्वर ल चुणि। मि सच मा तुम बट्टी प्रेम रखदु छो, अर भस मि ही न; बल्कि उ सब भि तुम बट्टी प्रेम रखद, जु पिता परमेश्वर की सचै पर विश्वास रखदा छिनी।
2
हम तुम बट्टी वीं सचै का कारण प्रेम करदां जु हमारा भितर रौन्दु अर सदनी हम दगड़ी रालो।
3
जु हम सचै तैं मणदा अर दूसरों बट्टी प्रेम करदां, त हम तैं पिता परमेश्वर अर वेका नौंना यीशु मसीह की कृपा, दया, अर शान्ति मिलदी राली।
4
जब मिल सूंणि त मि भौत खुशी हवे कि तेरु कुछ नौंना वीं सचै तैं मांणी के जींणा छिनी, जै तैं हमारा पिता परमेश्वर ल हम तैं कनु कु बुल्युं च।
5
अब “हे नारी” मि त्वे बट्टी बिनती करदु, कि हम तैं एक दुसरा बट्टी प्रेम कन चयणु च। यु कुई नई आज्ञा नि च बल्कि वीं आज्ञा च, जै तैं हम वे बगत बट्टी जंणदा छा जब हम ल मसीह की आज्ञा कु पालन कन शुरू कैरी।
6
पिता परमेश्वर को सचो प्रेम यु च कि हम वेकी आज्ञाओं का अनुसार जीवन तैं जियां; वे बगत बट्टी तुम ल मसीह कु आज्ञा को पालन कन शुरू कैरी जब बट्टी तुम ल सूंणि की पिता परमेश्वर ल आज्ञा दीं च कि तुम तैं सदनी एक दुसरा बट्टी प्रेम कन चयणु च।
7
मि यु इलै बुल्णु छो, किलैकि भौत सैरा लोग जु झूठी शिक्षा दींदिनि उ ईं दुनिया मा ऐ गैनी। जु कुई यु नि मणद की यीशु मसीह एक मनिख का रूप मा ईं दुनिया मा ऐ गै, त उ आदिम मसीह को बैरी च जु लुखुं तैं सदनी धोखा दींद।
8
इलै तुम तैं चौकस रौंण चयणु च कि कखी यु लोग तुम तैं धोखा नि द्यां कि पिता परमेश्वर कि सेवा कु तुम्हरा द्वारा किये गै मेहनत बेकार नि हवे जौ अर पिता परमेश्वर तुम तैं तुम्हरी सेवा को पूरो प्रतिफल दयालो।
9
उ लोग जु सच्ची शिक्षा बट्टी भटकी जांद, अर मसीह की शिक्षा तैं नि मणदींनि, उ पिता परमेश्वर का दगड़ी संगति मा नि च। जु कुई मसीह की शिक्षा तैं मणदो उ पिता परमेश्वर का दगड़ी अर वेका नौंना यीशु मसीह का दगड़ी संगति मा च।
10
जु कुई तुम मा औ, अर मसीह शिक्षा नि द्ये वे तैं न त घौर औंण द्या अर न वे तैं प्रणाम कैरी के बढ़ावा द्या।
11
किलैकि जु कुई इन आदिम तैं प्रणाम करदो उ आदिम भि वेका द्वारा करयां बुरा कामों मा साझीदार हूंद।
12
और भि भौत सी बात छिनी, जु मि तुम कु लिखण चांणु छो, पर मि ऊं तैं यु जन एक चिठ्ठी मा नि लिखण चांदु। मि तैं आस च कि मि तुम मा ओ अर हमारा अमणी-संमणी बातचित कैर ज्यां बट्टी हमारो आनन्द पूरो हवे जौ।
13
तेरी बैंण का नौंना जूं तैं पिता परमेश्वर ल चुणयूं च, उ यख च, अर त्वे तैं प्रणाम बुल्णा छिनी।
Jump to:
Chapter 1
All chapters:
1
Recommended Reading
Commentary
2 John Commentaries
→
Devotional
2 John Devotional Guide
→
Get This Bible
GHMNT Study Bible
→