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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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2 Thessalonians 3
2 Thessalonians 3
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
आखिर मा, हे विश्वासी भयों, हम कु प्रार्थना कना रावा, कि हम जल्द ही हर जगह मा प्रभु यीशु मसीह का बारा मा संदेश तैं फैला सैका अर लोग यु पर उन ही विश्वास कैरा जन तुम ल कैरी छो।
2
यु भि प्रार्थना कैरा कि पिता परमेश्वर हम तैं दुष्ट अर बुरा लुखुं बट्टी नुकसान पौछांण से बचौ, किलैकि भौत स लोग जु शुभ संदेश सुणदींनि उ यु पर विश्वास नि करदींनि।
3
पर तुम पिता परमेश्वर पर पूरा ढंग से भरोसो कैरी सकदियां, उ तुम तैं आत्मिक रूप से मजबूत करलो अर तुम तैं दुष्ट शैतान बट्टी बचालो।
4
अर हम तैं प्रभु मा तुम पर भरोसो च, कि जु-जु हम ल तुम तैं कनु कु बोलि, ऊं तैं तुम मंणदां छ्यां अर अगनैं भि मंणदि रैल्या।
5
हम प्रार्थना करदा कि प्रभु यीशु मसीह तुम तैं यु समझण का लैक बणौ कि पिता परमेश्वर तुम तैं कथग प्रेम करद अर जब लोग तुम तैं सतौंदींनि त कन कै ठिक रावा उन ही जन प्रभु भि टिकयूं रै।
6
हे विश्वासी भयों, हम तुम तैं वे अधिकार ल जु प्रभु यीशु मसीह ल हम तैं द्ये; कि तुम हरेक इन्दारया भैय से अलग रावा जु ठिक से जीवन बसर नि करदो हो, जु ऊं आदेशों कु पालन नि करद जु हम ल तुम तैं सिखै छो।
7
किलैकि तुम अफी जंणदा छ्यां कि कनके हमारी सी तरौं जीवन बसर कन चयणु च जन हम बसर करदा छा; जब हम तुम्हरा बीच मा रौंदा छा, त हम अलकसी नि छा, पर काम करदा छा।
8
अर कैकी रुटि मुफ्त मा नि खै; पर कष्ट उठै के मेहनत ल रात-दिन कामकाज करदां छा, कि हम तैं अपड़ी जरूरतों कु तुम मा बट्टी कै पर भि निर्भर हूंण नि पोड़ो।
9
इन नि च कि तुम बट्टी मदद लींण हमारो अधिकार नि च, कि तुम हम जन जीवन बसर कैरी सक्यां।
10
किलैकि जब हम तुमारा इख छा तभि यु आज्ञा तुम तैं दींदां छा कि जु कुई काम नि कन चौ त खांणु भि नि खौ।
11
हम सुणदा छा, कि कथग लोग तुम्हरा बीच मा अलकस ल ज्यूदींनि; अर कुछ काम नि करदींनि, उ हमेशा दुसरा लुखुं का काम मा दखलंदाज करदींनि।
12
इन्दारया लुखुं तैं हम अधिकार ल जु हम तैं प्रभु यीशु मसीह बट्टी मिली आज्ञा दींणा अर समझौंणा छा, कि उ चुपचाप रै के अपड़ा कामकाज कैरी कै अर अपड़ी कमै कि रुटि खयां कैरा।
13
हे विश्वासी भयों, तुम भलै का काम कन मा कभी भि निराश नि व।
14
जु कुई हमारी ईं चिट्ठी का संदेश तैं नि मांणो, त वे तैं पहचनणै की कोशिश कैरा; सचेत रावा अर वेको दगड़ो नि कैरा, ज्यां ल उ शर्मिंदा हो।
15
तौ भि वे दगड़ी इन बरतौ नि कैरा जन कि उ तुम्हरो दुश्मन हो, पर भैय समझी के समझावा बुझावा।
16
मि प्रार्थना करदु कि प्रभु, जु शान्ति कु स्रोत च उ अफी तुम तैं सदनी हरेक ढंग से शान्ति द्यो; प्रभु तुम सभियूं का दगड़ा मा हमेशा रौ।
17
मि पौलुस अपड़ा हथ से प्रणाम लिखणु छौं। मि अपड़ी सभि चिठ्ठियूं का आखिर मा इन ही लिखदु, कि सभियूं तैं पता चलि जै कि य चिठ्ठी मेरी ही लिखीं च।
18
मि प्रार्थना करदु कि हमारा प्रभु यीशु मसीह की कृपा तुम सभियूं पर हमेशा बंणि रौ।
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