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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Ephesians 5
Ephesians 5
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
तुम परमेश्वर का बच्चा छा जौं बट्टी उ प्रेम करदु, इलै वे जन बनणै की कोशिश कैरा।
2
मसीह का उदाहरण का अनुसरण करद ही, दुसरा का प्रति प्रेम बट्टी भुर्युं जीवन बितावा, जैल तुम बट्टी प्रेम कैरी अर तुमारा पापों तैं उठाणै कु अफ तैं बलिदान कैरी, अर परमेश्वर खुश इलै छों, किलैकि उ बलिदान वेकु खुशबुदार इत्र का जन छों।
3
जन पवित्र लुखुं का लैख च, उन ही तुम मा व्यभिचार, अर कै भि किस्मै का गंदा काम, या लोभ कि चर्चा तक नि हो।
4
अर न बेशर्म हवे के बात कन, न मूर्खता कि बातचित कन, अर न ऊं बातों पर हैंसण जौं पर बेजती महसूस हूंदी, किलैकि यु बात शोभा नि दींदिनि, पर तुम तैं परमेश्वर तैं धन्यवाद ही दींण चयणु च।
5
किलैकि तुम अच्छा से जंणदा छा, कि कै व्यभिचारी, य अशुद्ध मनिख (जै मा दुष्टात्मा हो) य लोभि मनिख, एक मूर्तिपूजा कन वला का बराबर हूंद, जु ईं दुनिया का चीजों कि आराधना करदां, अर कभि भि मसीह अर पिता परमेश्वर का राज्य हिस्सा नि बंणला।
6
उ लुखुं द्वारा मूर्ख नि बंणि जु यूं पापों कु बाना बंणौणै कि कोशिश करदा किलैकि यूं ही कामों का कारण पिता परमेश्वर कु गुस्सा आज्ञा नि मनणवलो पर भड़कद।
7
इलै तुम इन पापमय कामों तैं कन मा ऊंका दगड़िया नि बणा।
8
किलैकि तुम खुद अंधेरा मा रौंदयां, पर जब बट्टी तुम प्रभु का लोग बंणया, तुम उज्यला छा। इलै तुम तैं ऊं लुखुं का जन जींण चयणु च जु उज्यला मा बट्टी जुड़यां छिनी।
9
किलैकि जु कुई मनिख उज्यला मा च, त वेको बरतौ अच्छो अर धार्मिक हूंद अर वे पर भरोसो किये जै सकदु च,
10
जनणै कि कोशिश कैरा कि क्य पिता परमेश्वर तैं खुश करद।
11
इलै तुम यूं पापमय कामों तैं कन मा ऊंका दगड़िया नि बंणि, बल्कि लुखुं तैं दिखा कि यु काम बुरा छिनी।
12
किलैकि अविश्वासी का गुप्त कामों कि चर्चा कन भि शर्म कि बात च।
13
जब कै चीज पर उज्यलो चमकदु, त हर कुई देखि सकद कि उ चीज कन च किलैकि जब उज्यलो कै चीज तैं प्रकट करद त उ चीज खुद उज्यलो बंणि जांदु।
14
यु कारण लोग बुल्दींनि, “हे सींण वला बिजि जा अर मुर्दों मा बट्टी ज्यूँदो हवे जा; त मसीह अपड़ो उज्यलो तुम पर चमकालो।”
15
इलै ध्यान द्यावा, कि अपड़ा स्वभाव का बारा मा खास रूप बट्टी चौकस रावा; निर्बुद्धि का जन न पर बुद्धिमान जन चला।
16
अर हरेक मौका कु इस्तेमाल जु तुम करदां, भलै कनु कु कैरा।
17
पर यु जनणै कि कोशिश कैरी कै बुद्धिमान बणा कि प्रभु तुम बट्टी कि कन चांणु च अर वे तैं कैरा।
18
अर दाखमधु तैं पी कै धूत नि बंणयां रावा, किलैकि यु लुखुं कु रुखा, बेकाबू ढंग बट्टी बरतौ कनु कु कारण बणद, बल्कि पवित्र आत्मा तैं तुम तैं काबू मा कन द्यां।
19
अर आपस मा भजन अर स्तुतिगान अर आत्मिक गीतों तैं गाया कैरा, अर अपड़ा-अपड़ा मन मा प्रभु का संमणी गांदा अर स्तुति करदा रावा।
20
अर जु कुछ हमारा प्रभु यीशु मसीह ल करयूं च, वेका कारण सदनी हमारा पिता परमेश्वर कि सभि बातों कु धन्यवाद कैरा।
21
अर हम मसीह का प्रति श्रद्धा-भक्ति रखण का कारण एक दुसरा का अधीन रावा।
22
हे जननों, अपड़ा स्वामि का इन अधीन रावा जन तुम प्रभु का अधीन रौंदा।
23
किलैकि स्वामि त जनन कु मुंड च, जन मसीह मण्डलि कु मुंड च; अर मसीह मण्डलि कु उद्धारकर्ता च, जु कि वेकी खुद की देह च।
24
जन मण्डलि मसीह का अधीन च, उन ही जनन भि हरेक बातों मा अपड़ा-अपड़ा स्वामियों का अधीन रावा।
25
हे स्वामि, अपड़ी-अपड़ी जननियों बट्टी प्रेम रखा, जन मसीह ल भि मण्डलि बट्टी प्रेम कैरी कै अपड़ा आप तैं बलिदान कैरी दींनि,
26
कि वेको शुभ संदेश मण्डलि ल लुखुं पर प्रगट हवे के ऊंका पाप तैं शुद्ध कैरो, जन कुई आदिम कीं चीज तैं धवे के शुद्ध करद,
27
मसीह ल इन इलै कैरी कि उ हम सभि विश्वासी लुखुं की मण्डलि तैं एक इन महिमामय झुण्ड बंणै साका जु वे बट्टी जुड़यां छिनी, इन लोग जु मा कुई कमी नि हो, बल्कि उ पूरी रीति पवित्र हों जब उ हम तैं अपड़ा संमणी कठ्ठा करदु।
28
ईं रीति ल ठिक च, कि स्वामि अपड़ी-अपड़ी जनन बट्टी अपड़ा देह का जन प्रेम रखा, जु अपड़ी जनन बट्टी प्रेम रखदु, उ खुद अपड़ा आप बट्टी प्रेम रखदो।
29
किलैकि कै ल भि अपड़ा देह बट्टी बैर नि रखि बल्कि वांको पालन पोषण करदु, जन मसीह मण्डलि कि देखभाल करदो, उन ही एक मनिख भि खुद कि भि देखभाल करदु।
30
इलै कि हम सभि मसीह का देह का अंगों का जन छा।
31
जन कि परमेश्वर का वचन मा लिख्युं च, “आदिम अपड़ा ब्वे-बुबों तैं छोड़ी के अपड़ी जनन दगड़ी मिल्युं रालो, अर उ द्वी एक देह होला।”
32
या एक कीमती अर गम्भीर शिक्षा च जै बट्टी हम इन समझ सकद्यां, अर मि यांकि तुलना मसीह अर वे पर विश्वास कन वलो की मण्डलि का दगड़ी करदु।
33
पर यु तुम पर भि लागू हूंद, कि तुम बट्टी हरेक अपड़ी जनन बट्टी अपड़ा जन प्रेम रखा, अर जनन भि अपड़ा स्वामि कु आदर कैरो।
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