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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1 Peter 4
1 Peter 4
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
मसीह ने अपने शरीर में दु:ख भोगा; इसलिए आप भी शस्त्र की तरह यही मनोभाव धारण करें कि जिसने अपने शरीर में दु:ख भोगा है, उसने पाप से सम्बन्ध तोड़ लिया है
2
और उसे मानवीय वासनाओं के अनुसार नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छानुसार अपना शेष जीवन बिताना चाहिए।
3
आप लोगों ने पहले सांसारिक लोगों की जीवनचर्या के अनुसार व्यभिचार, भोग-विलास, मदिरापान, रंगरलियों, मादकता और घृणित मूर्तिपूजा में जो समय बिताया, वही बहुत हुआ।
4
अब आप उन लोगों के साथ विलासिता के दलदल में गोता नहीं लगाते, इसलिए उन्हें आश्चर्य होता और वे आपकी निन्दा करते हैं।
5
उन्हें जीवितों और मृतकों का न्याय करनेवाले परमेश्वर को अपने आचरण का लेखा देना पड़ेगा।
6
यही कारण है कि मृतकों को भी शुभ समाचार सुनाया गया, जिससे यद्यपि वे शरीर में मनुष्यों की तरह दण्डित हुए थे, फिर भी आत्मा में वे परमेश्वर के अनुरूप जीवित रहें।
7
सब का अन्त निकट आ गया है। आप लोग सन्तुलन तथा संयम रखें, जिससे आप प्रार्थना कर सकें।
8
मुख्य बात यह है कि आप आपस में गहरा प्रेम बनाये रखें, क्योंकि प्रेम बहुत-से पाप ढाँक देता है।
9
आप बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे का आतिथ्य-सत्कार करें।
10
जिसे जो वरदान मिला है, वह-परमेश्वर के बहुविध अनुग्रह के सुयोग्य भण्डारी की तरह-दूसरों की सेवा में उसका उपयोग करे।
11
जो प्रवचन देता है, उसे स्मरण रहे कि वह परमेश्वर के शब्द बोल रहा है। जो धर्मसेवा करता है, वह जान ले कि परमेश्वर ही उसे बल प्रदान करता है। इस प्रकार सब बातों में येशु मसीह द्वारा परमेश्वर की महिमा प्रकट हो जायेगी। महिमा तथा सामर्थ्य युगानुयुग परमेश्वर का ही है। आमेन!
12
प्रिय भाइयो एवं बहिनो! आप लोगों की परीक्षा अग्नि से ली जा रही है। आप इस पर आश्चर्य नहीं करें, मानो यह कोई असाधारण घटना हो।
13
यदि आप लोगों पर अत्याचार किया जाये, तो मसीह के दु:खभोग के सहभागी बन जाने के नाते आप प्रसन्न हो जायें। जिस दिन मसीह की महिमा प्रकट होगी, आप लोग अत्यधिक आनन्दित हो उठेंगे।
14
यदि मसीह के नाम के कारण आप लोगों का अपमान किया जाये, तो अपने को धन्य समझें, क्योंकि यह इसका प्रमाण है कि परमेश्वर का महिमामय आत्मा आप पर छाया रहता है।
15
सावधान रहें कि हत्यारा, चोर या कुकर्मी होने अथवा दूसरों के कामों में हस्तक्षेप करने के नाते आप लोगों में से कोई व्यक्ति दु:ख न भोगे।
16
परन्तु यदि किसी को मसीही होने के नाते दु:ख भोगना पड़े, तो उसे लज्जित नहीं होना चाहिए, बल्कि वह परमेश्वर की महिमा के लिए इस नाम को स्वीकार करे;
17
क्योंकि न्याय का समय प्रारम्भ हो गया है और यह स्वयं परमेश्वर के परिवार से प्रारम्भ हो रहा है। यदि वह इस प्रकार हम से प्रारम्भ हो रहा है, तो अन्त में उन लोगों का क्या होगा, जो परमेश्वर के शुभ समाचार में विश्वास करना नहीं चाहते?
18
यदि धर्मी को कठिनाई से मुक्ति मिलती है, तो विधर्मी और पापी का क्या होगा?
19
इसलिए जो लोग परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दु:ख भोगते हैं, वे भलाई करते रहें और विश्वसनीय सृष्टिकर्ता परमेश्वर को अपनी आत्मा सौंप दें।
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