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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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2 Thessalonians 2
2 Thessalonians 2
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
भाइयो और बहिनो! हमारे प्रभु येशु मसीह के आगमन और उनके सामने हम लोगों के एकत्र होने के विषय में हमारा एक निवेदन यह है:
2
किसी आत्मिक प्रकाशन, वक्तव्य अथवा पत्र के कारण, जो हमारी ओर से जान पड़े, आप लोग आसानी से यह समझ कर न उत्तेजित हों और न घबरायें कि प्रभु का दिन आ चुका है।
3
कोई आप लोगों को किसी भी तरह न बहकाये। वह दिन तब तक नहीं आ सकता जब तक पहले धर्म-विद्रोह न हो जाये और वह “अधर्म-पुरुष” प्रकट न हो, जिसका विनाश अनिवार्य है।
4
वह अपने घमण्ड में उन सब का विरोध करता और उन से अपने को बड़ा मानता है, जो देवता कहलाते या पूज्य समझे जाते हैं, यहाँ तक कि वह परमेश्वर के मन्दिर में विराजमान हो कर स्वयं ईश्वर होने का दावा करता है।
5
क्या आप लोगों को याद नहीं है कि आप के बीच रहते समय मैं आप को ये सब बातें समझाया करता था?
6
आप जानते हैं कि कौन-सी शक्ति अभी अवरोध करती है, जिससे वह अपने समय से पहले प्रकट न हो।
7
क्योंकि अधर्म का रहस्य अभी भी क्रियाशील है, किन्तु वह तब तक गुप्त रहेगा, जब तक अवरोध करने वाला न हट जाये।
8
तब वह “अधर्मी” प्रकट होगा, जिसे प्रभु येशु अपने मुख के निश्वास से नष्ट करेंगे और अपने आगमन के प्रताप से भस्म कर देंगे।
9
परन्तु “अधर्मी” का आगमन शौतान के प्रभाव से है, जो हर प्रकार के शक्तिशाली चिह्न और कपटपूर्ण चमत्कार दिखाकर
10
नाश होने वाले व्यक्तियों को हर प्रकार के अधर्ममय भ्रम में डालता है; क्योंकि उन्होंने उस सत्य से प्रेम करना स्वीकार नहीं किया, जो उन्हें बचाने में समर्थ था।
11
यही कारण है कि परमेश्वर उन पर महाभ्रम प्रेषित करता है, जिससे वे झूठ पर विश्वास करें और
12
वे सब दण्डित किये जायें, जिन्होंने सत्य पर विश्वास नहीं किया और अधर्म का पक्ष लिया है।
13
भाइयो और बहिनो! प्रभु आपको प्यार करता है। हमें प्रभु परमेश्वर को आप लोगों के विषय में निरन्तर धन्यवाद देना चाहिए। परमेश्वर ने प्रथम फल के रूप में आपको चुना, जिससे आप पवित्र करनेवाले आत्मा द्वारा और सत्य में अपने विश्वास द्वारा मुक्ति प्राप्त करें।
14
उसी उद्देश्य के लिए उसने हमारे शुभ समाचार के प्रचार द्वारा आप को बुलाया, जिससे आप हमारे प्रभु येशु मसीह की महिमा को प्राप्त करें।
15
इसलिए भाइयो और बहिनो! आप विश्वास में दृढ़ बनें और उन परम्पराओं का पालन करें जिनकी शिक्षा आपको मौखिक रूप से या पत्र के द्वारा हम से मिली है।
16
स्वयं हमारे प्रभु येशु मसीह तथा हमारा पिता परमेश्वर, जिसने हमसे इतना प्रेम किया और हमें चिरस्थायी सान्त्वना तथा उज्ज्वल आशा का वरदान दिया है,
17
आप के हृदय को सान्त्वना देते रहें तथा हर प्रकार के भले काम और वचन में सुदृढ़ बनाये रखें।
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