bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
/
3 John 1
3 John 1
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
Jump to:
Chapter 1
1
मैं धर्मवृद्ध, यह पत्र प्रिय गायुस के नाम लिख रहा हूँ, जिनसे मैं सच्चा प्रेम करता हूँ।
2
प्रियवर! मेरी हार्दिक कामना है कि सब तरह से आपका कल्याण हो और आपकी आत्म की तरह, आपका शरीर भी पूर्ण स्वस्थ रहे;
3
क्योंकि जब कुछ भाई-बहिन यहाँ आये और उन्होंने आपकी सच्चाई के विषय में साक्षी दी और बताया कि किस प्रकार आप सत्य के मार्ग पर चलते हैं, तो मैं बड़ा आनन्दित हुआ।
4
मुझे और किसी बात से इतना आनन्द नहीं होता, जितना यह सुन कर कि मेरे बच्चे सत्य के मार्ग पर चलते हैं।
5
प्रियवर! आप भाई-बहिनों के लिए − और ऐसे भाई-बहिनों के लिए जिन से आप अपरिचित हैं − जो कुछ कर रहे हैं, वह एक सच्चे विश्वासी के योग्य है।
6
उन्होंने यहाँ की कलीसिया के सामने आपके प्रेम की साक्षी दी है। यदि आप उनकी अगली यात्रा का ऐसा प्रबन्ध करेंगे, जो परमेश्वर के योग्य हो, तो अच्छा काम करेंगे;
7
क्योंकि वे मसीह का कार्य करने निकले हैं और अन्यधर्मी लोगों से कुछ नहीं लेते।
8
इसलिए ऐसे लोगों का सेवा-सत्कार करना हमारा कर्त्तव्य है, जिससे हम सत्य की सेवा में उनके सहकर्मी बनें।
9
मैंने कलीसिया के नाम एक पत्र लिखा, किन्तु दियोत्रिफेस, जो वहाँ का नेता बनना चाहता है, हमारा अधिकार स्वीकार नहीं करता।
10
इसलिए मैं जब आऊंगा तो उसके आचरण की निन्दा करूँगा। वह न केवल हमारी बदनामी करता है, बल्कि वह स्वयं भाई-बहिनों का आतिथ्य-सत्कार करना नहीं चाहता और जो लोग ऐसा करना चाहते हैं, वह उन्हें रोकता और कलीसिया से उनका बहिष्कार करता है।
11
प्रियवर! आप बुराई का नहीं, बल्कि भलाई का अनुकरण करें। जो भलाई करता है, वह परमेश्वर से है; किन्तु जो बुराई करता है, वह परमेश्वर के विषय में कुछ नहीं जानता।
12
देमेत्रियुस के विषय में सभी लोग अच्छी साक्षी देते हैं, यहाँ तक कि सत्य स्वयं ही ऐसा करता है। हम भी उनके विषय में यही साक्षी देते हैं और आप जानते हैं कि हमारी साक्षी सच्ची है।
13
मुझे आप को और बहुत कुछ लिखना था, किन्तु मैं यह कागज और स्याही से नहीं करना चाहता।
14
मुझे आशा है कि मैं शीघ्र ही आप के पास आऊंगा और हम आमने-सामने बातचीत करेंगे।
15
आप को शान्ति मिले! मित्रगण आप को नमस्कार कहते हैं। आप वहां हर एक मित्र को नमस्कार कहें।
Jump to:
Chapter 1
All chapters:
1