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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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Isaiah 53
Isaiah 53
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
जो हमने सुना, उस पर कौन विश्वास करेगा? किस पर प्रभु का भुजबल प्रकट हुआ?
2
प्रभु का सेवक एक नन्हा पौधा-जैसा उसके सम्मुख उगा; वह जड़ के सदृश शुष्क भूमि से फूटा। उसमें न रूप था, और न आकर्षण कि हम उसे देखते; उसमें सुन्दरता भी न थी, कि हम उसकी कामना करते।
3
लोगों ने उससे घृणा की; उन्होंने उसको त्याग दिया। वह दु:खी मनुष्य था, केवल पीड़ा से उसकी पहचान थी। उसको देखते ही लोग अपना मुख फेर लेते थे। हम ने उससे घृणा की और उसका मूल्य नहीं जाना।
4
निस्सन्देह उसने हमारी पीड़ा को सहा, और हमारे दु:खों को भोगा। फिर भी हमने समझा कि परमेश्वर ने उसे घायल किया है, उसे दु:खी और पीड़ित किया है।
5
किन्तु वह हमारे पापों के कारण घायल हुआ; वह हमारे दुष्कर्मों के कारण आहत हुआ। उसने अपने शरीर पर ताड़ना-स्वरूप मार सही, और उसकी मार से हमारा कल्याण हुआ। उसने कोड़े खाए, जिससे हम स्वस्थ हुए।
6
हम-सब भटकी हुई भेड़ों के सदृश थे; प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने मार्ग पर चल रहा था। परन्तु प्रभु ने हमारे सब दुष्कर्मों का बोझ उस पर लाद दिया।
7
वह सताया गया, उसे पीड़ित किया गया, तोभी उसके मुंह से ‘आह’ न निकली। जैसे मेमना वध के लिए ले जाते समय चुप रहता है, जैसे भेड़ ऊन कतरने वाले के सामने शान्त रहती है, वैसे ही वह मौन था।
8
अत्याचार और दण्ड-आज्ञा के पश्चात् वे उसे वध के लिए ले गए। उसकी पीढ़ी के किस व्यक्ति ने इस बात पर ध्यान दिया कि वह जीव-लोक से उठा लिया गया और अपने लोगों के अपराधों के लिए मारा गया?
9
उन्होंने दुर्जनों के मध्य उसकी कबर बनाई; एक धनवान की कबर में वह गाड़ा गया, यद्यपि उसने कोई हिंसा नहीं की थी, और न अपने मुंह से किसी को धोखा दिया था।
10
यह प्रभु की इच्छा थी कि वह मार सहे, प्रभु ने उसे दु:ख से पीड़ित किया। जब वह पाप-बलि के लिए अपना प्राण अर्पित करता है, तब वह अपने वंश को देखेगा; वह दीर्घायु प्राप्त करेगा। उसके हाथ से प्रभु की इच्छा सफल होगी।
11
जो पीड़ा उसने अपने प्राण में सही है, उसका फल देखकर वह सन्तुष्ट होगा। प्रभु कहता है: ‘मेरा धार्मिक सेवक अपने ज्ञान के द्वारा अनेक लोगों को धार्मिक बनाएगा; वह उनके दुष्कर्मों का फल स्वयं भोगेगा।
12
अत: मैं महान व्यक्तियों के साथ उसका भाग बांटूंगा, और वह बलवानों के साथ “लूट” बांटेगा। उसने मृत्यु की वेदी पर अपना प्राण अर्पित कर दिया; और वह अपराधियों के साथ गिना गया। फिर भी उसने अनेक लोगों के पाप का बोझ उठाया, और अपराधियों के लिए प्रार्थना की।’
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