bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Chhattisgarhi
/
Chhattisgarhi
/
Ecclesiastes 4
Ecclesiastes 4
Chhattisgarhi
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 5 →
1
मेंह फेर ये देखेंव कि धरती म जम्मो किसम के अतियाचार होवत हे: मेंह अतियाचार सहनेवालामन के आंसू ला देखेंव— अऊ ओमन ला सांति देवइया कोनो नइं एं; ओमन के अतियाचार करइयामन करा सक्ति रिहिस— अऊ अतियाचार सहनेवालामन करा सांति देवइया कोनो नइं एं।
2
अऊ मेंह घोसना करेंव कि ओ मरे मनखे, जऊन मन मर गे हवंय, ओमन अभी के जीयत मनखेमन ले जादा खुस हवंय।
3
पर ये दूनों ले बेहतर ओह अय, जेकर कभू जनम ही नइं होय हवय, अऊ जऊन ह ये धरती म होवत दुस्टता ला नइं देखे हवय।
4
अऊ मेंह देखेंव कि जम्मो मेहनत अऊ जम्मो सफलता ह एक मनखे के संग दूसर मनखे के बईरता ले निकलके आथे। येह घलो बेकार ए, हवा के पाछू भगई ए।
5
मुरूख ह अपन हांथ म हांथ धरे बईठे रहिथे, अऊ अपनआप ला नास करथे।
6
मेहनत के संग दू मुठा भर रहई अऊ हवा के पाछू भगई ले अपन करा सांति के संग एक मुठा भर रहई ह जादा बने अय।
7
मेंह फेर धरती म कुछू बेकार के चीज देखेंव:
8
एक मनखे ह अकेला रिहिस; ओकर न बेटा, न भाई रिहिन। ओकर मेहनत के कोनो अन्त नइं रिहिस, तभो ले ओकर आंखीमन ला ओकर धन ले संतोस नइं मिलत रिहिस। ओह पुछिस, “मेंह काकर बर मेहनत करत हंव, अऊ काबर मेंह अपनआप ला आनंद उठाय ले दूर रखत हंव?” येह घलो बेकार ए— येह बहुंत दुख भरे काम अय।
9
एक ले दू झन बेहतर होथें, काबरकि ओमन ला ओमन के मेहनत के बेहतर परतिफल मिलथे।
10
कहूं ओमन ले एक झन ह गिर जावय, त दूसर ह ओला उठे म मदद करथे। पर ओकर ऊपर तरस आथे, जऊन ह गिरथे अऊ ओला उठे म मदद करे बर कोनो नइं रहंय।
11
कहूं दू झन संग म सुतथें, त ओमन एक-दूसर ला गरम रखथें। पर एक झन अकेला अपनआप ला कइसे गरम रख सकथे?
12
अकेला मनखे ला हराय जा सकथे, पर दू झन अपन बचाव कर सकथें। तीन ठन डोरी ले बने रस्सी ह आसानी से नइं टूटय।
13
एक गरीब बुद्धिमान जवान ह ओ डोकरा मुरूख राजा ले बेहतर अय, जऊन ला चेतउनी के ऊपर धियान देय के समझ नइं रहय।
14
जवान ह जेल ले निकलके राजा के पद ला पाय हो, या ओह अपन राज म ही गरीबी म जनमे हो सकथे।
15
मेंह देखेंव कि ओ जम्मो झन, जऊन मन धरती म रहत रिहिन अऊ चलत-फिरत रिहिन, ओमन ओ जवान के पाछू चलिन, जऊन ह राजा के उत्तराधिकारी रिहिस।
16
उहां ओकर आघू म अनगिनत मनखे रिहिन। पर ओकर बाद के पीढ़ी के मनखेमन ओ उत्तराधिकारी ले खुस नइं होईन। येह घलो बेकार ए, हवा के पाछू भगई ए।
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 5 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12