bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Chhattisgarhi
/
Chhattisgarhi
/
Hebrews 3
Hebrews 3
Chhattisgarhi
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 4 →
1
एकरसेति, हे पबितर भाईमन, जऊन मन स्वरगीय बुलावा म सहभागी हवव, अपन धियान यीसू ऊपर लगावव, जऊन ला हमन प्रेरित अऊ महा पुरोहित मानथन।
2
परमेसर ह ओला चुने रिहिस, अऊ ओह परमेसर के बिसवासयोग्य रिहिस, जइसने कि मूसा ह परमेसर के जम्मो घराना म बिसवासयोग्य रिहिस।
3
घर के बनइया ह घर ले जादा आदर पाथे, वइसनेच यीसू ह मूसा ले बढ़के आदर पाय के लईक समझे गीस।
4
काबरकि हर एक घर के कोनो न कोनो बनइया होथे। पर जऊन ह जम्मो चीज ला बनाईस, ओह परमेसर ए।
5
“एक सेवक के रूप म मूसा ह परमेसर के जम्मो घराना म बिसवासयोग्य रिहिस,” अऊ ओह ओ बात के गवाही दीस, जऊन ला परमेसर ह अवइया समय म बतानेवाला रिहिस।
6
पर मसीह ह एक बेटा के रूप म, परमेसर के घराना ऊपर बिसवासयोग्य अय। अऊ हमन ओकर घराना अन, यदि हमन अपन बिसवास अऊ आसा म मजबूती से बने रहिथन, जेकर कि हमन ला घमंड हवय।
7
एकरसेति, जइसने कि पबितर आतमा ह कहिथे: “यदि आज, तुमन ओकर अवाज ला सुनथव,
8
त अपन हिरदय ला कठोर झन करव, जइसने कि तुम्हर पुरखामन निरजन प्रदेस म, बिदरोही होके परखे जाय के बेरा परमेसर के बिरोध म करे रिहिन।
9
ओमन उहां मोला परखिन अऊ जांचिन, हालाकि ओमन चालीस साल तक मोर काममन ला देखिन।
10
एकरे कारन, मेंह ओ पीढ़ी के मनखेमन ले नराज रहेंव, अऊ मेंह कहेंव, ‘ओमन के मन ह हमेसा भटकत रहिथे, अऊ ओमन मोर रसता ला नइं जानंय।’
11
एकरसेति, मेंह कोरोध म कसम खाके कहेंव, ‘ओमन ओ ठऊर म कभू नइं जा सकहीं, जिहां मेंह ओमन ला अराम देवइया रहेंव।’ ”
12
हे भाईमन हो, एकर धियान रखव कि तुमन ले काकरो पापमय अऊ अबिसवासी हिरदय झन होवय, जऊन ह कि जीयत परमेसर ले दूरिहा हो जाथे।
13
पर हर एक दिन, एक-दूसर ला ढाढ़स बंधावव, जब तक कि येला आज कहे जाथे, ताकि तुमन कोनो घलो पाप के छल म पड़के कठोर झन होवव।
14
जऊन बिसवास, हमर करा सुरू म रिहिस, यदि हमन ओमा आखिरी तक मजबूत बने रहन, तभे मसीह के काम म हमर बांटा हवय।
15
जइसने कि परमेसर के बचन म ये कहे गे हवय: “यदि आज तुमन ओकर अवाज ला सुनथव, त अपन हिरदय ला कठोर झन करव, जइसने कि तुम्हर पुरखामन परमेसर के बिरोध म बिदरोही होके करिन।”
16
ओमन कोन रिहिन, जऊन मन परमेसर के अवाज ला सुनिन, अऊ ओकर बिरोध म बिदरोह करिन? का ओमन ओ जम्मो मनखे नइं रिहिन, जऊन मन ला मूसा ह मिसर देस ले निकालके लानिस?
17
अऊ काकर ले परमेसर ह चालीस साल तक नराज रिहिस? का ओमन ले नो हय, जऊन मन पाप करिन अऊ निरजन प्रदेस म गिरके मर गीन?
18
अऊ परमेसर ह कसम खाके कोन ला कहिस कि ओमन ओकर बिसराम म कभू नइं जा सकहीं? सिरिप ओमन ला, जऊन मन ओकर हुकूम नइं मानिन।
19
ये किसम ले, हमन देखथन कि ओमन अपन अबिसवास के कारन ओ देस म नइं जा सकिन।
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 4 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13