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Hosea 2
Hosea 2
Chhattisgarhi
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1
“अपन भाईमन ले कहव, ‘मोर मनखे,’ अऊ अपन बहिनीमन ले कहव, ‘मोर मयारू।’
2
“अपन दाई ला दबकार, ओला दबकार, काबरकि ओह मोर घरवाली नो हय, अऊ मेंह ओकर घरवाला नो हंव। ओह अपन चेहरा ले छिनारीपन अऊ अपन छातीमन के बीच ले बिसवासघात ला हटा लेवय।
3
नइं तो मेंह ओकर ओनहा ला उतारके अइसने नंगरी कर दूहूं जइसने ओह अपन जनम के बेरा म रिहिस; में ओला मरू-भुइयां असन बना दूहूं, ओला सूखा भुइयां म बदल दूहूं अऊ ओला पीयास ले मार डारहूं।
4
ओकर लइकामन बर मेंह अपन मया नइं देखाहूं, काबरकि ओमन बेभिचार ले जनमे लइका अंय।
5
ओमन के दाई ह छिनारी करे हवय अऊ ओह ओमन ला कलंक ले अपन गरभ म धारन करिस। ओह कहिस, ‘मेंह अपन मया करइयामन के पाछू जाहूं, जऊन मन मोला रोटी-पानी, मोर ऊन अऊ सन के कपड़ा, मोर जैतून तेल अऊ मोर मंद देथें।’
6
एकरसेति, मेंह ओकर रद्दा ला कंटिली झाड़ीमन ले घेर दूहूं, मेंह ओकर आघू म बाड़ा ठाढ़ कर दूहूं ताकि ओला रसता झन मिलय।
7
ओह अपन मया करइयामन के पीछा करही पर ओमन ला पकड़ नइं सकही; ओह ओमन ला खोजही पर ओमन नइं मिलहीं। तब ओह कहिही, ‘मेंह पहिले के सहीं अपन घरवाला करा लहुंट जाहूं, काबरकि मोर तब के दसा ह अभी के दसा ले बने रिहिस।’
8
ओह ये बात ला नइं माने हे कि ओह मेंहीच रहेंव जऊन ह ओला अनाज, नवां अंगूर के मंद अऊ तेल दीस, जऊन ह ओकर ऊपर खुले मन ले सोन अऊ चांदी लुटाईस— जेकर उपयोग ओमन बाल देवता बर करिन।
9
“एकरसेति मेंह अपन अनाज ला ले लूहूं जब ओह पाक जाही, अऊ अपन नवां अंगूर के मंद ला ले लूहूं जब ओह तियार हो जाही। मेंह अपन ऊन अऊ सन के कपड़ा ला वापिस ले लूहूं, जऊन ला मेंह ओकर देहें ला ढांपे बर दे रहेंव।
10
एकरसेति अब मेंह ओकर फूहड़पन ला ओकर मया करइयामन के आघू म उघारहूं; अऊ कोनो ओला मोर हांथ ले छोंड़ाय नइं सकहीं।
11
मेंह ओकर जम्मो उत्सव मनई ला बंद कर दूहूं: ओकर हर बछर के तिहार, ओकर नवां चंदा के उत्सव, ओकर बिसराम दिनमन ला—ओकर जम्मो ठहिराय तिहारमन ला बंद कर दूहूं।
12
मेंह ओकर अंगूर के नार अऊ ओकर अंजीर के रूखमन ला बरबाद कर दूहूं जेकर बारे म ओह कहिथे कि येह मोर मया करइयामन के दुवारा दिये गे मजदूरी अय; मेंह ओमन ला झाड़-झंखाड़ बना दूहूं, अऊ जंगली पसुमन ओमन ला चर डारहीं।
13
मेंह ओला ओ बातमन बर सजा दूहूं कि ओह बाल देवतामन बर धूप जलाईस; ओह अपनआप ला नथनी अऊ गहनामन ले सजाईस, अऊ अपन मया करइयामन के पाछू गीस, पर मोला ओह भुला गीस,” यहोवा ह घोसना करत हे।
14
“एकरसेति, अब मेंह ओला ललचाहूं; मेंह ओला सुनसान जगह म ले जाहूं अऊ ओकर ले कोमल मन ले गोठियाहूं।
15
उहां मेंह ओला ओकर अंगूर के बारीमन ला लहुंटा दूहूं, अऊ आकोर के घाटी ला आसा के दुवार बना दूहूं। उहां ओह अइसने जबाब दीही, जइसने ओह अपन जवानी के दिन म देवत रिहिस, याने कि जइसने ओह मिसर देस ले निकलके आय के बेरा देवत रिहिस।”
16
यहोवा ह घोसना करत हे, “ओ दिन, तेंह मोला ‘मोर घरवाला’ कहिबे; तेंह मोला फेर कभू ‘अपन मालिक’ नइं कहिबे।
17
मेंह ओकर मुहूं ले बाल देवतामन के नांव ला मिटा दूहूं; ओमन के नांव फेर कभू नइं लिये जाही।
18
ओ दिन मेंह ओमन बर जंगली जानवर, अकास के चिरई अऊ भुइयां म रेंगइया जन्तुमन के संग एक करार करहूं। धनुस अऊ तलवार अऊ लड़ई ला मेंह देस ले खतम कर दूहूं, ताकि मनखेमन निडर होके अराम करंय।
19
मेंह तोला हमेसा के खातिर बिहाव के बचन दूहूं; मेंह तोला धरमीपन अऊ नियाय, मया अऊ करूना के संग बिहाव के बचन दूहूं।
20
में तोला सच्चई के संग बिहाव के बचन दूहूं, अऊ तेंह यहोवा ला जान लेबे।”
21
यहोवा ह घोसना करत हे— “ओ दिन मेंह जबाब दूहूं, मेंह अकास-मंडल ला जबाब दूहूं, अऊ ओमन धरती ला जबाब दीहीं;
22
अऊ धरती ह अनाज, नवां अंगूर के मंद अऊ जैतून के तेल ला जबाब दीही, अऊ ओमन यिजरेल ला जबाब दीहीं।
23
मेंह ओला अपन बर देस म लगाहूं; मेंह ओकर ऊपर अपन मया देखाहूं, जऊन ला मेंह अपन मयारू नइं कहंव। ओ मनखे जऊन मन मोर नइं कहे जावंय, ओमन ला मेंह कहिहूं, ‘तुमन मोर मनखे अव’; अऊ ओमन कहिहीं, ‘तेंह हमर परमेसर अस।’ ”
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