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Joel 1
Joel 1
Chhattisgarhi
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1
यहोवा के ओ बचन जऊन ह पतूएल के बेटा योएल मेर आईस।
2
हे अगुवामन, ये बात ला सुनव; हे यहूदा देस म रहइया जम्मो मनखेमन, सुनव। का तुम्हर समय म या तुम्हर पुरखामन के समय म अइसन कोनो बात कभू होईस?
3
अपन लइकामन ला ये बात बतावव, अऊ तुम्हर लइकामन ये बात ला अपन लइकामन ला बतावंय, अऊ ओ लइकामन ओमन के आघू के पीढ़ी ला बतावंय।
4
टिड्डीमन के दल ह जऊन ला छोंड़ दे रिहिन ओला बड़े टिड्डीमन खा ले हवंय; जऊन ला बड़े टिड्डीमन छोंड़ दे रिहिन ओला छोटे टिड्डीमन खा ले हवंय; जऊन ला छोटे टिड्डीमन छोंड़ दे रिहिन ओला आने टिड्डीमन खा ले हवंय।
5
हे मतवारमन जागव, अऊ रोवव! हे जम्मो मंद पीनेवालामन, बिलाप करव; नवां मंद के कारन बिलाप करव, काबरकि येला तुम्हर मुहूं ले छीन ले गे हवय।
6
मोर देस ऊपर एक जाति ह चढ़ई कर दे हवय, ओह एक सक्तिसाली सेना ए अऊ ओमन के संखिया अनगिनत हे, ओकर दांत सिंह के दांत सहीं, ओकर जबड़ा सिंहनी के जबड़ा सहीं हवय।
7
ओह मोर अंगूर के नारमन ला उजाड़ दे हवय अऊ मोर अंजीर के रूखमन ला नास कर दे हवय। ओह ओमन के छाली ला निकाल दे हवय अऊ ओमन के साखामन ला सफेद छोंड़के ओमन के छाली ला फटिक दे हवय।
8
अइसन बिलाप करव, जइसन एक कुंवारी ह बोरा के कपड़ा पहिरे अपन जवानी म मंगेतर बर सोक करथे।
9
यहोवा के घर म न तो अन्न-बलिदान अऊ न ही पेय-बलिदान चघाय जाथे। यहोवा के सेवा करइया पुरोहितमन बिलाप करत हवंय।
10
खेतमन नास हो गे हवंय, भुइयां ह सूखा गे हवय; अनाज ह नास हो गे हवय, नवां अंगूर के मंद ह सूखा गे हवय, जैतून के तेल खतम होवथे।
11
हे किसानमन, निरास होवव, हे अंगूर के नार लगानेवालामन, बिलाप करव; गहूं अऊ जौ के अनाज बर दुखी होवव, काबरकि खेत के फसल ह नास हो गे हवय।
12
अंगूर के नार ह सूखा गे हवय अऊ अंजीर के रूख ह मुरझा गे हवय; अनार, खजूर अऊ सेव के रूख— मैदान के जम्मो रूख—सूखा गे हवंय। सही म मनखे के आनंद ह खतम हो गे हवय।
13
हे पुरोहितमन, बोरा के कपड़ा पहिरके बिलाप करव; तुमन जऊन मन बेदी करा सेवा करथव, बिलाप करव। तुमन जऊन मन मोर परमेसर के आघू म सेवा करथव आवव, अऊ बोरा के कपड़ा पहिरके रथिया बितावव; काबरकि तुम्हर परमेसर के घर म अन्न-बलिदान अऊ पेय-बलिदान चघाय बर बंद कर दिये गे हवय।
14
एक पबितर उपास के घोसना करव; एक पबितर सभा के आयोजन करव। अगुवामन ला अऊ ओ जम्मो जऊन मन देस म रहिथें ओमन ला यहोवा तुम्हर परमेसर के घर म बलावव, अऊ यहोवा के आघू म गिड़गिड़ाके बिनती करव।
15
ओ दिन बर हाय! काबरकि यहोवा के दिन ह लकठा म हवय; येह सर्वसक्तिमान कोति ले बिनास के दिन बनके आही।
16
का हमर देखत म दाना-पानी बंद नइं हो गीस— अऊ एही किसम ले हमर परमेसर के घर ले आनंद अऊ खुसी खतम नइं हो गीस?
17
माटी के ढेलामन के खाल्हे बीजामन झुलस गे हवंय। गोदाममन खंडहर होवत हें, अन्न-भंडारमन ला गिरा दिये गे हवय, काबरकि फसल नइं होईस।
18
पसुमन कइसे कराहत हवंय! पसुमन के झुंडमन बियाकुल होके भटकत हवंय काबरकि ओमन बर चरागन नइं ए; इहां तक कि भेड़मन के झुंड घलो तकलीफ म हवंय।
19
हे यहोवा, मेंह तोला पुकारत हंव, काबरकि सुनसान जगह के चरागनमन ला आगी ह नास कर दे हवय अऊ आगी के लपटा ले मैदान के जम्मो रूखमन जर गे हवंय।
20
अऊ त अऊ जंगली पसुमन तोर कामना करथें; पानी के सोतमन सूखा गे हवंय अऊ सुन्ना जगह के चरागनमन ला आगी ह नास कर दे हवय।
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