bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Chhattisgarhi
/
Chhattisgarhi
/
Malachi 1
Malachi 1
Chhattisgarhi
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 2 →
1
एक अगमबानी: मलाकी के जरिये इसरायलीमन ला यहोवा के दिये गे बचन।
2
यहोवा ह कहत हे, “मेंह तोर ले मया करे हवंव,” पर तुमन पुछथव, “तेंह कइसे हमन ले मया करे हस?” यहोवा ह ये कहिथे, “का एसाव ह याकूब के भाई नइं रिहिस? तभो ले मेंह याकूब ले मया करेंव,
3
पर मेंह एसाव ले घिन करेंव अऊ ओकर पहाड़ी भागमन ला उजारके निरजन बना देंव अऊ ओकर बपौती भुइयां ला बंजर भुइयां के सियारमन के जगह बना देंव।”
4
एदोम ह कह सकत हे, “हालाकि हमन उजर तो गे हवन, तभो ले हमन टूटे-फूटे ला फेर बनाबो।” पर सर्वसक्तिमान यहोवा ह ये कहत हे: “ओमन फेर बनाहीं, पर मेंह गिरा दूहूं, अऊ ओमन दुस्ट के गढ़, अऊ अइसने मनखे कहाहीं, जेमन के ऊपर यहोवा के रिस ह हमेसा भड़के रहिथे।
5
तुम्हर आंखी ह येला देखही अऊ तुमन कहिहू, ‘यहोवा ह महान ए—अऊ त अऊ ओह इसरायल के सिवाना के बाहिर घलो महान ए!’ ”
6
सर्वसक्तिमान यहोवा ह कहिथे, “बेटा ह अपन ददा के, अऊ गुलाम ह अपन मालिक के आदर करथे। यदि मेंह ददा अंव, त मोर आदर कहां हवय? अऊ यदि मेंह मालिक अंव, त मोर इज्जत कहां हवय, जेकर हकदार मेंह अंव? “ये तुम पुरोहितमन अव, जेमन मोर नांव के आदर नइं करव। “पर तुमन पुछथव, ‘हमन कइसे तोर नांव के आदर नइं करेंन?’
7
“मोर बेदी म असुध जेवन चघाय के दुवारा। “पर तुमन पुछथव, ‘हमन कइसे तोला असुध करे हवन?’ “ये कहे के दुवारा कि यहोवा के मेज ह तुछ ए।
8
जब तुमन अंधरा पसु के बलि चघाथव, त का येह गलत नो हय? अऊ जब तुमन खोरवा अऊ बिमरहा पसु के बलि चघाथव, त का येह गलत नो हय? अइसने भेंट अपन राजपाल ला देय के कोसिस करव! का ओह तुमन ले खुस होही? का ओह तुमन ला गरहन करही?” सर्वसक्तिमान यहोवा ह कहिथे।
9
“पर अब तुमन परमेसर ले बिनती करव कि ओह हमर ऊपर किरपा करय। तुम्हर हांथ के चघाय अइसने भेंट ले, का ओह तुमन ला गरहन करही?” सर्वसक्तिमान यहोवा ह कहिथे।
10
“बने होतिस कि तुमन म ले कोनो मंदिर के कपाट ला बंद कर देतिस, ताकि तुमन मोर बेदी म बेकार के आगी झन बारतेव! मेंह तुमन ले खुस नइं अंव,” सर्वसक्तिमान यहोवा ह कहिथे, “अऊ मेंह तुम्हर हांथ ले कोनो चढ़ावा गरहन नइं करंव।
11
धरती के ये छोर ले लेके ओ छोर तक, जिहां सूरज ह उगथे अऊ जिहां सूरज बुड़थे, उहां जाति-जाति के मनखेमन के बीच मोर नांव ह महान होही। जम्मो जगह म मोर करा धूप अऊ सुध चढ़ावा लाने जाही, काबरकि जाति-जाति के मनखेमन के बीच मोर नांव ह महान होही,” सर्वसक्तिमान यहोवा ह कहिथे।
12
“पर तुमन ये कहिके येला अपबितर करथव, ‘परभू के मेज ह असुध ए,’ अऊ, ‘येकर जेवन ह तुछ अय।’
13
अऊ तुमन ये घलो कहिथव, ‘ये कइसे बोझा अय!’ अऊ ओला तुछ समझके, तुमन ओकर ऊपर नाक सिकोड़थव,” सर्वसक्तिमान यहोवा ह कहिथे। “जब तुमन घायल, खोरवा या बिमरहा पसुमन ला लानथव अऊ ओमन ला बलिदान के रूप म चघाथव, त का मोला अइसने बलिदान ला तुम्हर हांथ ले गरहन करना चाही?” यहोवा ह कहिथे।
14
“ओ ठग ह सरापित ए, जेकर झुंड म बने नर पसु हवय अऊ ओह येला देय बर बदना बदे हवय, पर ओह दोसयुक्त पसु के बलि परभू ला चघाथे। मोर नांव के भय जाति-जाति के मनखेमन म होवय, काबरकि मेंह एक महान राजा अंव,” सर्वसक्तिमान यहोवा ह कहिथे।
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 2 →
All chapters:
1
2
3
4