bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Chhattisgarhi
/
Chhattisgarhi
/
Mark 12
Mark 12
Chhattisgarhi
← Chapter 11
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 13 →
1
तब यीसू ह ओमन ले पटंतर म गोठियाय लगिस अऊ कहिस, “एक मनखे ह अंगूर के बारी लगाईस अऊ बारी के चारों खूंट बाड़ा बांधिस अऊ रसकुंड बर एक ठन खंचवा कोड़िस, अऊ एक ठन मचान घलो बनाईस। तब ओह ओ अंगूर के बारी ला कुछू किसानमन ला रेगहा म देके आने देस चल दीस।
2
जब फर के समय आईस, त ओह अपन एक सेवक ला किसानमन करा पठोईस कि ओह अंगूर के बारी ले ओकर बांटा के फर लानय।
3
पर किसानमन ओला धरके मारिन-पीटिन अऊ ओला जुच्छा हांथ लहुंटा दीन।
4
तब बारी के मालिक ह एक आने सेवक ला ओमन करा पठोईस, पर ओमन ओकर मुड़ ला फोर दीन अऊ ओकर बेजत्ती करिन।
5
बारी के मालिक ह अऊ एक झन ला पठोईस, पर ओमन ओला मार डारिन। ओह अऊ बहुंत झन ला पठोईस, पर ओमन कतको झन ला पीटिन अऊ कतको झन ला मार डारिन।
6
“अब ओकर करा सिरिप एक झन बांचिस, ओकर एके मयारू बेटा! आखिर म ओह ये सोचके ओला पठोईस कि ओमन मोर बेटा के आदर करहीं।
7
“पर जब ओ किसानमन ओला आवत देखिन, त एक-दूसर ला कहिन, ‘येह वारिस ए। आवव, हमन येला मार डालन, तब एकर संपत्ति ह हमर हो जाही।’
8
अऊ ओमन ओला पकड़िन अऊ मार डारिन अऊ अंगूर के बारी के बाहिर फटिक दीन।
9
“तब अंगूर के बारी के मालिक ह का करही? ओह आही अऊ ओ किसानमन ला मार डारही अऊ अंगूर के बारी ला आने मन ला दे दीही।
10
का तुमन परमेसर के ये बचन ला नइं पढ़े हवव: “ ‘जऊन पथरा ला घर के बनइयामन बेकार समझे रिहिन, ओहीच ह कोना के मुख पथरा हो गीस।
11
येह परभू के दुवारा होईस अऊ येह हमर नजर म अद्भूत ए’?”
12
तब मुखिया पुरोहित, कानून के गुरू अऊ अगुवामन यीसू ला पकड़े के उपाय सोचे लगिन काबरकि ओमन समझ गे रहंय कि ओह ये पटंतर ओमन के बिरोध म कहे हवय। पर ओमन मनखेमन के भीड़ ले डरावत रिहिन; एकरसेति ओमन ओला छोंड़के चल दीन।
13
बाद म, ओमन यीसू ला गोठ म फंसाय बर कुछू फरीसी अऊ हेरोदीमन ला ओकर करा पठोईन।
14
ओमन आके ओकर ले कहिन, “हे गुरू! हमन जानत हवन कि तेंह सच्चा अस। अऊ काकरो परवाह नइं करस, काबरकि तेंह मनखे के मुहूं देखके नइं गोठियावस, पर सच्चई के संग परमेसर के रसता के सिकछा देथस। हमन ये जाने बर चाहथन कि का महाराजा ला लगान देवई कानून के मुताबिक ठीक अय कि नइं?
15
हमन ला लगान देना चाही या नइं देना चाही?” यीसू ह ओमन के कपट ला जानके ओमन ला कहिस, “तुमन काबर मोला फंसाय के कोसिस करत हव? मोर करा एक ठन चिल्हर पईसा लानव कि में ओला देखंव।”
16
ओमन पईसा ला लानिन अऊ ओह ओमन ले पुछिस, “येमा काकर मूरती अऊ नांव लिखाय हवय?” ओमन कहिन, “महाराजा के।”
17
तब यीसू ह ओमन ला कहिस, “जऊन ह महाराजा के अय, ओला महाराजा ला देवव अऊ जऊन ह परमेसर के अय, ओला परमेसर ला देवव।” येला सुनके ओमन चकित हो गीन।
18
तब सदूकीमन आईन, जऊन मन ये कहिथंय कि मरे मनखेमन फेर नइं जी उठंय। ओमन यीसू ले आके पुछिन,
19
“हे गुरू! मूसा ह हमर बर लिखे हवय कि यदि कोनो मनखे के भाई ह अपन घरवाली के रहत बिगर संतान के मर जावय, त येह जरूरी ए कि ओ मनखे ह अपन भाई के ओ बिधवा ले बिहाव कर ले, अऊ अपन भाई बर संतान पईदा करे।
20
सात झन भाई रिहिन। पहिला भाई ह बिहाव करिस अऊ बिगर संतान के मर गीस।
21
तब दूसर भाई ह ओकर बिधवा ले बिहाव करिस अऊ ओह घलो बिगर संतान के मर गीस, अऊ वइसनेच तीसरा भाई घलो।
22
अइसने होईस कि सातों म के काकरो संतान नइं होईस अऊ ओमन मर गीन। आखिर म ओ माईलोगन घलो मर गीस।
23
तब मरे मनखेमन के जी उठे के बाद, ओह काकर घरवाली होही? काबरकि ओह सातों भाईमन ले बिहाव करे रिहिस।”
24
यीसू ह ओमन ला जबाब दीस, “का तुमन गलत नइं समझत हव काबरकि तुमन परमेसर के बचन या परमेसर के सामर्थ ला नइं जानत हव?
25
जब मरे मन जी उठहीं, त ओमन न तो बिहाव करहीं अऊ न ही ओमन ला बिहाव म दिये जाही; ओमन स्वरग म स्वरगदूतमन सहीं होहीं।
26
मरे मन के जी उठे के बारे म, का तुमन मूसा के किताब म बरत झाड़ी के बारे म नइं पढ़ेव? जिहां परमेसर ह मूसा ले कहिस, ‘मेंह अब्राहम के परमेसर अऊ इसहाक के परमेसर अऊ याकूब के परमेसर अंव।’
27
परमेसर ह मुरदामन के नइं, पर जीयतमन के परमेसर अय। तुमन भारी गलती म परे हवव।”
28
कानून के गुरूमन ले एक झन आके ओमन ला बहस करत सुनिस अऊ ये जानके कि यीसू ह ओमन ला सही जबाब दे हवय, ओह यीसू ले पुछिस, “सबले बड़े हुकूम कते ह अय?”
29
यीसू ह कहिस, “सबले बड़े हुकूम ये अय: हे इसरायलीमन सुनव! परभू हमर परमेसर ह एके झन परभू अय।
30
परभू अपन परमेसर ले अपन पूरा हिरदय अऊ अपन पूरा परान अऊ अपन पूरा मन अऊ अपन पूरा सक्ति ले मया करव।
31
अऊ दूसरा हुकूम ये अय कि तेंह अपन परोसी ले अपन सहीं मया कर। एकर ले बड़े अऊ कोनो हुकूम नइं ए।”
32
ओ मनखे ह कहिस, “तेंह बने कहे, गुरू! तोर ये कहई सही अय कि परमेसर एके झन अय अऊ ओला छोंड़ कोनो दूसर परमेसर नइं ए।
33
ओला अपन पूरा मन अऊ अपन पूरा बुद्धि अऊ अपन पूरा सक्ति सहित मया करई अऊ अपन परोसी ला अपन सहीं मया करई, जम्मो होम-बलिदान अऊ चढ़ावा ले बढ़के अय।”
34
जब यीसू ह देखिस कि ओ मनखे ह समझके जबाब दे हवय, तब ओह ओला कहिस, “तेंह परमेसर के राज के लकठा म हवस।” अऊ ओकर बाद कोनो ओला कुछू पुछे के हिम्मत नइं करिन।
35
जब यीसू ह मंदिर म उपदेस करत रिहिस, त पुछिस, “कानून के गुरूमन काबर कहिथें कि मसीह ह दाऊद के बेटा अय?
36
दाऊद ह खुदे पबितर आतमा म होके कहे हवय: “ ‘परभू ह मोर परभू ले कहिस, “मोर जेवनी हांथ कोति बईठ, जब तक कि मेंह तोर बईरीमन ला तोर गोड़ खाल्हे नइं कर देवंव।” ’
37
दाऊद ह खुदे ओला परभू कहत हवय। तब मसीह ह ओकर बेटा कइसने होईस?” भीड़ के मनखेमन ओकर गोठ ला बड़े खुसी से सुनत रिहिन।
38
यीसू ह अपन उपदेस म कहिस, “कानून के गुरूमन ले सचेत रहव। ओमन लम्बा-लम्बा ओनहा पहिरके एती-ओती घुमई पसंद करथें अऊ ओमन ला बजार के जगह म आदर के संग जोहार झोंकई,
39
यहूदीमन के सभा-घर म सबले बने आसन अऊ जेवनार म आदर के ठऊर म बईठई बने लगथे।
40
ओमन बिधवामन के घर ला हड़प लेथें, अऊ देखाय बर लम्बा-लम्बा पराथना करथें। अइसने मनखेमन बहुंत दंड पाहीं।”
41
यीसू ह दान चघाय के जगह के आघू म बईठके मनखेमन ला मंदिर के खजाना म अपन दान चघावत देखत रिहिस। कतको धनवान मनखेमन अब्बड़ अकन पईसा ओमा डारिन।
42
अतकी म एक गरीब बिधवा आईस अऊ तांबा के दू ठन छोटे सिक्का डालिस जेकर मूल्य कुछू पईसा रिहिस।
43
यीसू ह अपन चेलामन ला बलाके कहिस, “मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि ये गरीब बिधवा ह आने जम्मो झन ले मंदिर के खजाना म जादा दान दे हवय।
44
ओ जम्मो झन अपन बढ़त धन म ले दे हवंय, पर येह अपन गरीबी म ले जम्मो ला देय दे हवय, जेमा ओकर गुजारा होय रहितिस।”
← Chapter 11
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 13 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16