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Micah 6
Micah 6
Chhattisgarhi
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1
सुनव कि यहोवा ह का कहत हे: “उठव, अऊ पहाड़मन के आघू म मोर मामला ला रखव; पहाड़ीमन सुनंय कि तुम्हर का कहना हे।
2
“हे पहाड़मन, यहोवा के दुवारा लगाय आरोप ला सुनव; हे धरती के अटल नीव, तुमन घलो सुनव। काबरकि यहोवा के अपन मनखेमन के बिरूध एक मामला हवय; ओह इसरायल के बिरूध एक मामला दायर करत हवय।
3
“हे मोर मनखेमन, मेंह तुम्हर संग का अनियाय करे हवंव? मोला बतावव कि मेंह तुम्हर ऊपर का बोझ डारे हवंव?
4
मेंह तुमन ला मिसर देस ले बाहिर निकालेंव अऊ तुमन ला गुलामी के देस ले छोंड़ांय। मेंह तुम्हर अगुवई करे बर मूसा ला पठोंय, हारून अऊ मिरियम ला घलो पठोंय।
5
हे मोर मनखेमन, सुरता करव मोआब के राजा बालाक ह का सडयंत्र करे रिहिस अऊ बेओर के बेटा बिलाम ह का जबाब दीस। सित्तीम ले गिलगाल तक अपन यातरा ला सुरता करव, ताकि तुमन यहोवा के धरमी काममन ला जान सकव।”
6
में यहोवा के आघू म का लेके आवंव अऊ महिमामय परमेसर के आघू म दंडवत करंव? का में होम-बलिदान बर एक-एक साल के बछरू लेके ओकर आघू म आवंव?
7
का यहोवा ह हजारों मेढ़ा, अऊ जैतून तेल के दस हजार नदीमन ले खुस होही? का में अपन अपराध के पछतावा करे बर अपन पहिलांत बेटा ला बलिदान करंव या अपन आतमा के पाप बर अपन जनमाय कोनो ला बलिदान करंव?
8
हे मरनहार मनखे, ओह तोला देखाय हवय कि का ह बने अय। अऊ यहोवा ह तोर ले का चाहथे? नियाय के काम करव अऊ दया करे बर झन छोंड़व अऊ अपन परमेसर संग नमरता से चलव।
9
सुनव! यहोवा ह सहर ला बलावत हे— अऊ तोर नांव के भय मनई ही बुद्धिमानी ए— “लउठी अऊ येला ठहिरानेवाला के बात ला धियान देके सुनव।
10
हे दुस्ट घर, का में अब घलो तोर दुस्टता ले कमाय धन, अऊ ओ छोटे नाप ला बिसरा दंव, जऊन ह सरापित अय?
11
का में कोनो ला बेईमानी के नाप, अऊ गलत वजन के थैली के संग छोंड़ दंव?
12
तोर धनी मनखेमन हिंसा करथें; तोर निवासीमन लबरा अंय अऊ ओमन धोखा देवइया बात करथें।
13
एकरसेति, मेंह तुम्हर पाप के कारन तुमन ला नास करई, तुम्हर पतन करई सुरू कर चुके हंव।
14
तुमन जेवन तो करहू पर मन ह नइं भरही; खाय के बाद घलो तुम्हर पेट ह खाली रहिही। तुमन जमा तो करहू पर कुछू घलो नइं बांचही, काबरकि तुम्हर जमा-पूंजी ला मेंह तलवार ले लुटवा दूहूं।
15
तुमन अनाज के बोवई तो करहू, पर फसल नइं काटहू; तुमन जैतून के तेल तो निकालहू, पर ओ तेल के उपयोग नइं कर सकहू, तुमन अंगूर ला तो कुचरहू, पर ओकर मंद ला पी नइं सकहू।
16
तुमन ओमरी राजा के बिधि-बिधान अऊ अहाब राजा के घर के जम्मो रीति-रिवाजमन ला पालन करे हव; तुमन ओमन के परंपरा के घलो पालन करे हव। एकरसेति मेंह तुम्हर बिनास कर दूहूं अऊ तुम्हर मनखेमन के ठट्ठा करे जाही; तुमन जाति-जाति के मनखेमन के अपमान सहिहू।”
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