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Zephaniah 2
Zephaniah 2
Chhattisgarhi
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1
हे बेसरम जाति के मनखेमन, एक संग जूरव, तुमन एक संग जूरव,
2
एकर पहिली कि हुकूम ह लागू होवय अऊ दिन ह भूंसा कस निकल जावय, एकर पहिली कि यहोवा के भयंकर कोरोध ह तुम्हर ऊपर भड़कय, एकर पहिली कि यहोवा के कोप के दिन ह तुम्हर ऊपर आ जावय।
3
तुमन जम्मो, जेमन देस के नम्र मनखे अव, तुमन जेमन यहोवा के हुकूम ला मानथव, यहोवा के खोज म रहव। धरमीपन के खोज म रहव, नम्र बनव; सायद यहोवा के कोप के दिन म तुमन ला आसरय मिल जावय।
4
गाजा सहर ला तियाग देय जाही, अऊ अस्कलोन सहर ह बरबाद हो जाही असदोद सहर ला मंझनियां खाली कर देय जाही, अऊ एकरोन सहर ला उखान देय जाही।
5
तुमन ऊपर हाय, जेमन समुंदर तीर म रहिथव, हे करेती मनखेमन, तुमन ऊपर हाय; हे कनान, पलिस्तीमन के देस, यहोवा के बचन ह तोर बिरूध हवय। ओह कहिथे, “मेंह तुमन ला नास कर दूहूं, कोनो नइं बांचय।”
6
समुंदर तीर के भुइयां ह चरागन हो जाही, जिहां चरवाहामन बर कुआं अऊ पसु के झुंड बर बाड़ा होही।
7
ओ देस ह यहूदा के घराना के बांचे मनखेमन के देस होही; उहां ओमन ला चरागन मिलही। सांझ के बेरा, ओमन अस्कलोन के घरमन म लेटके अराम करहीं। यहोवा ओमन के परमेसर ह उहां ओमन के देखरेख करही; ओह ओमन के धन-दौलत ला घलो लहुंटाही।
8
“मेंह मोआबीमन के बेजत्ती के बात अऊ अमोनीमन के ताना ला सुने हंव, ओमन मोर मनखेमन के बेजत्ती करिन अऊ ओमन के देस ला छीन लेय के धमकी दीन।
9
एकरसेति, मोर जिनगी के सपथ,” सर्वसक्तिमान यहोवा, इसरायल के परमेसर ह घोसना करत हे, “सही म मोआब ह सदोम कस, अऊ अमोनीमन अमोरा कस हो जाहीं— येमन कांदी-कचरा के ठऊर अऊ नून के खंचवामन हो जाहीं, येमन हमेसा बर उजड़ जाहीं। मोर बांचे मनखेमन ओमन ला लूट लीहीं; मोर जाति के बांचे मनखेमन ओमन के देस ऊपर अधिकार कर लीहीं।”
10
ओमन के घमंड करे अऊ सर्वसक्तिमान यहोवा के मनखेमन के अपमान करे अऊ हंसी उड़ाय के ओमन ला ये परतिफल मिलही।
11
यहोवा के भय ओमन म पईदा होही जब यहोवा ह धरती के जम्मो देवतामन ला नास कर दीही। दूरिहा-दूरिहा के जाति-जाति के जम्मो मनखेमन अपन-अपन देस म यहोवा ला झुकके दंडवत करहीं।
12
“हे कूसी मनखेमन, तुमन घलो मोर तलवार ले मारे जाहू।”
13
यहोवा ह उत्तर दिग के बिरूध अपन हांथ बढ़ाही अऊ अस्सूर देस ला नास कर दीही, अऊ नीनवे सहर ला पूरा उजारके मरू-भुइयां सहीं सूखा छोंड़ दीही।
14
गरूवा-बईला अऊ भेड़-बकरीमन अऊ जम्मो किसम के जीव-जन्तुमन उहां अराम करहीं। ओकर खंभामन म मरू-भुइयां के उल्लू अऊ चिचियानेवाला उल्लूमन बसेरा करहीं। खिड़कीमन ले ओ उल्लूमन के अवाज सुनई दीही, पथरा के कुटामन ले कपाट के रसतामन भर जाहीं, देवदार लकरी के बल्लामन उघर जाहीं।
15
येह ओ चहल-पहल वाले सहर के स्थिति अय जऊन ह एक समय सुरकछित रिहिस। ओह अपनआप ला कहय, “मेंह अकेला अंव! मोला छोंड़ अऊ कोनो दूसरा नइं ए।” अब ओह कइसन उजर गे हवय, जंगली पसुमन के एक मांद बन गे हवय! ओ जम्मो, जेमन उहां ले होके जाथें, ओमन एकर हंसी उड़ाथें अऊ अपन हांथ ला झटकारथें।
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