bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Kumaoni
/
kumaoni
/
3 John 1
3 John 1
kumaoni
Jump to:
Chapter 1
1
मैं यहूना विश्वासीन को अगुवा यो चिठ्ठी प्रिय मित्र गयुस तैंस लिखूनमरयूँ, मैं तैंस सच्चो प्रेम राखछूँ।
2
प्रिय मित्र, मेरि यो प्रार्थना छै; कि जसो तेरो आत्मिक जीवन बढून मर्योछ, उसीकैं तैं सब बातुन में बढ़नै रौ, और तैं भलो चंगो रौ।
3
क्याखिनकि जब कुछ विश्वासी भाईन ले आभेरन, त्यारा बारिमें हमून बताछ कि तैं परमेश्वरा का बाटान में सच्चाई चलछै, तो मैं भौत खुशी भ्यू।
4
जब ले मैं यो सुण छूँ कि उन लोग जो म्यारा नान्तिनान की नियाती छन, उन उसीकैं जीन मर्यान, जो सच्ची में परमेश्वरे ले हमून दिखाछ कि उन सच्चाईक अनुसार जीन मर्यान, त यो मैंस और ले खुश कर दीछो।
5
हे प्रेमा दगड़ियो, तैंले पुरी ईमानदारी का दगाड़ हमार विश्वासी भाईन का दगाड़ भलाईक काम कर्यान, याँ तक कि तैं उन लोगून की ले मद्दत करछ्य जो सुसमाचार प्रचार खिन यात्रा करनान जिनून तैं नै जाणछ्य।
6
उनूनमें भटे थ्वाड़ लोगून ले याँ का विश्वासीन बताछ कि तैं अपून दगाड़ का विश्वासी भाईन कतुक प्रेम करछै। अब मैं तैथैं कुंन चाँछूँ कि जब उन त्यारा पास भटे जाला, त तैंस इन लोगून की मद्दत करनै रून चैछो, क्याखिनकि येले परमेश्वर खुश हुछो।
7
क्याखिनकि इन चार लोग येक कारण सफर करून मर्यान ताकि मसीह का बारिमें लोगून बता सकूंन, और अविश्वासीन भटे केले मद्दत नै लीना।
8
येक कारण इसान को अपून घर में स्वागत करा और जो उनेरि जरूरत छै उ दी, जेले हम ले सच्ची सेवा में हिस्सेदार बना।
9
मैले पैलिक ले येका बारिमें तुमार विश्वासीन की मण्डली एक चिठ्ठी लिखीना की छी, लेकिन दियुत्रिफेस म्यारा हुकमून मानून है मना करछो, क्याखिनकि उ हमेशा भटे खुदै की मण्डली को अगुवा बनून चाँछो।
10
येक कारण मैं वाँ उलो, त मैं विश्वासीन की मण्डली थैं खुलभेरन बात करलो उन कि-कि करून मर्यान। इतुकैं नै, उन खुद सुसमाचार प्रचार करूनवाला विश्वासी भाईन ग्रहण नै करनो, और जो लोग ग्रहण करून चांनान त उ उनूनले मना करछो और याँ तक कि उ उनून विश्वासीन कि मण्डली में भटे भ्यार निकाल दीछो।
11
हे प्रेमो दगड़ियो, बुर काम करूनवाला लोगून का दगाड़ नै, जो भलाई का काम करछो उ परमेश्वर की सन्तान छै, लेकिन जो बुराई काम करछो, उनूनले परमेश्वरस नै देख्यो।
12
विश्वासीन की मण्डली में हरेक कुंनान की देमेत्रियुस एक निको आदिमी छै और हम ले सच्ची कुंनू की उ एक निको आदिमी छै किलैकी उ सच्चाईक अनुसार जीत छै, और तुम यो जाणछा की हमरि गवाही सच्ची छै।
13
और ले भौत बात छन जो मैं तैंस बतून चाँछूँ, लेकिन मैं उनून यो तरीका ले एक चिठ्ठी मैं नै लिखून चाँनू।
14
लेकिन मैंस आश छै कि मैं त्यारा पास उलो, और त्यारा आमुनि-सामुनि बातचीत करूँ।
15
मैं प्रार्थना करछूँ तैंस शान्ति मिलनै रो। याँ का विश्वासी दगड़िया तैंस नमस्कार करनान वाँ का हरेक विश्वासी दगड़ियान नमस्कार कै दीया।
Jump to:
Chapter 1
All chapters:
1