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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Revelation 3
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
“सरदीसक मण्डलीक दूत केँ ई लिखह, जिनका लग परमेश्वरक सात आत्मा छनि आ जे सातो तारा हाथ मे धयने छथि से ई कहैत छथि—हम अहाँक काज सभ सँ परिचित छी। अहाँ नाम मात्र केँ जीवित छी, मुदा छी वास्तव मे मरल।
2
जागू, आ जे किछु अहाँ लग बाँचल अछि, तकरा मजगूत बनाउ, कारण ओहो मरऽ पर अछि। हम अपन परमेश्वरक दृष्टि मे अहाँक काज सभ केँ अपूर्ण पौलहुँ।
3
स्मरण करू जे अहाँ कोन उपदेश सुनने छलहुँ आ स्वीकार कयने छलहुँ। ओकर पालन करू आ अपना पापक लेल पश्चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू। जँ अहाँ नहि जागब, तँ हम चोर जकाँ आबि जायब—अहाँ केँ बुझहो मे नहि आओत जे हम कखन अहाँ लग पहुँचि रहल छी।
4
तैयो सरदीस मे अहाँ सभक बीच किछु एहन व्यक्ति सेहो अछि, जे सभ अपन वस्त्र गन्दा नहि कयने अछि। ओ सभ उज्जर वस्त्र पहिरने हमरा संग टहलत, किएक तँ ओ सभ ताहि बातक योग्य अछि।
5
जे सभ विजय प्राप्त करत, तकरा सभ केँ एहिना उज्जर वस्त्र पहिराओल जयतैक। ओकरा सभक नाम हम जीवनक पुस्तक मे सँ किन्नहुँ नहि मेटयबैक, आ अपन पिता और हुनकर स्वर्गदूत सभक सम्मुख ओकरा सभक नाम लऽ कऽ स्वीकार करब जे ई हमर लोक अछि।
6
जकरा सभ केँ कान होइक से सभ सुनि लओ जे प्रभुक आत्मा मण्डली सभ केँ की कहैत छथि।
7
“फिलादेलफियाक मण्डलीक दूत केँ ई लिखह, जे पवित्र आ सत्य छथि, जिनका लग दाऊदक कुंजी छनि—ओ खोलैत छथि तँ केओ बन्द नहि कऽ सकैत अछि, ओ बन्द करैत छथि तँ केओ खोलि नहि सकैत अछि—से ई कहैत छथि—
8
हम अहाँक काज सभ सँ परिचित छी। देखू, हम अहाँक सामने एक द्वारि खोलि कऽ रखने छी जकरा केओ बन्द नहि कऽ सकैत अछि। हम जनैत छी जे अहाँ केँ बेसी बल नहि अछि, तैयो अहाँ हमर शिक्षाक पालन कयने छी आ एहि बात केँ अस्वीकार नहि कयने छी जे अहाँ हमर लोक छी।
9
सुनू, हम शैतानक समूहक ओहि सदस्य सभ केँ, जे सभ यहूदी भऽ कऽ अपना केँ परमेश्वरक लोक कहैत अछि मुदा अछि नहि, जे सभ झूठ बजैत अछि, तकरा सभ केँ एहि बातक लेल बाध्य करबैक जे ओ सभ आबि कऽ अहाँक चरण मे खसय आ ई जानि लय जे हम अहाँ सँ प्रेम करैत छी।
10
हम जे अहाँ केँ सहनशीलताक संग स्थिर रहबाक आदेश देलहुँ, तकर अहाँ पालन कयलहुँ, तेँ हमहूँ अहाँ केँ ओहि विपत्तिक घड़ी मे सुरक्षित राखब जे पृथ्वीक निवासी सभक परीक्षा लेबाक लेल सम्पूर्ण संसार पर आबऽ वला अछि।
11
हम जल्दिए आबऽ वला छी। जे बात अहाँ लग अछि, ताहि पर दृढ़ बनल रहू, जाहि सँ अहाँक मुकुट सँ केओ अहाँ केँ वंचित नहि कऽ दय।
12
जे सभ विजय प्राप्त करत तकरा सभ केँ हम अपन परमेश्वरक मन्दिर मे एक खाम्ह बनयबैक, और ओ सभ ओतऽ सँ फेर कहियो बाहर नहि जायत। हम अपन परमेश्वरक नाम और अपन परमेश्वरक नगरक नाम ओकरा सभ पर लिखबैक, अर्थात् ओहि नव यरूशलेमक नाम जे हमर परमेश्वरक ओतऽ सँ स्वर्ग सँ उतरऽ वला अछि। और हम अपन नव नाम सेहो ओकरा सभ पर लिखबैक।
13
जकरा सभ केँ कान होइक से सभ सुनि लओ जे प्रभुक आत्मा मण्डली सभ केँ की कहैत छथि।
14
“लौदीकियाक मण्डलीक दूत केँ ई लिखह, ओ जे सत्य छथि, जे विश्वासयोग्य आ सत्य गवाह छथि आ परमेश्वरक सृष्टिक मूलस्रोत छथि से ई कहैत छथि—
15
हम अहाँक काज सभ सँ परिचित छी। हम जनैत छी जे अहाँ ने तँ ठण्ढा छी आ ने गरम। नीक रहैत जे अहाँ चाहे ठण्ढा रहितहुँ वा गरम!
16
तेँ हम अपना मुँह सँ अहाँ केँ उगिलि देब, किएक तँ अहाँ ने ठण्ढा छी ने गरम, बल्कि सुसुम छी।
17
अहाँ कहैत छी जे, “हम धनवान छी, हम सुखी-सम्पन्न भऽ गेलहुँ, हमरा कोनो बातक अभाव नहि अछि।” मुदा अहाँ नहि जनैत छी जे अहाँक दशा कतेक खराब अछि। अहाँ अभागल, गरीब, आन्हर आ नाङट छी।
18
हम अहाँ केँ जे सल्लाह दैत छी, से सुनू। हमरा सँ आगि मे शुद्ध कयल सोना किनि कऽ धनिक भऽ जाउ, हमरा सँ उज्जर वस्त्र मोल लऽ कऽ पहिरि लिअ आ अपन नाङटपनक लज्जा केँ झाँपि लिअ, हमरा सँ मलहम किनि कऽ अपना आँखि पर लगाउ जाहि सँ अहाँ देखि सकब।
19
हम जकरा सभ सँ प्रेम करैत छी, तकरा सभ केँ डँटैत छिऐक आ सजाय दऽ कऽ सुधारैत छिऐक। एहि लेल तन-मन-धन सँ हमर बात मानू आ अपना पापक लेल पश्चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू।
20
देखू, हम द्वारि पर ठाढ़ भऽ कऽ केबाड़ ढकढकबैत आवाज दऽ रहल छी। जँ केओ हमर आवाज सुनि केबाड़ खोलत, तँ हम ओकरा लग भीतर आबि कऽ ओकरा संग भोजन करबैक आ ओ हमरा संग।
21
जहिना हम विजयी भऽ कऽ अपन पिताक संग हुनका सिंहासन पर बैसि रहलहुँ, तहिना जे सभ विजय प्राप्त करत, तकरा सभ केँ हम अपना संग सिंहासन पर बैसबाक अधिकार देबैक।
22
जकरा सभ केँ कान होइक, से सभ सुनि लओ जे प्रभुक आत्मा मण्डली सभ केँ की कहैत छथि।”
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