bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Maithili
/
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
/
Titus 1
Titus 1
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 2 →
1
हम, पौलुस, जे परमेश्वरक दास आ यीशु मसीहक एक मसीह-दूत छी, ई पत्र लिखि रहल छी। हमरा एहि लेल पठाओल गेल जे परमेश्वरक चुनल लोक सभ केँ सही बात पर विश्वास करऽ मे मजगूत करी आ सत्यक ओ ज्ञान सिखाबी जे भक्तिक अनुसार आचरण-व्यवहार उत्पन्न करैत अछि।
2
ओ विश्वास आ ज्ञान अनन्त जीवन पयबाक आशाक आधार अछि। परमेश्वर, जे कहियो झूठ नहि बजैत छथि, से संसारक सृष्टि सँ पहिनहि ई अनन्त जीवन देबाक वचन देने छथि,
3
और आब निर्धारित समय पर ओ अपन वचन सुसमाचारक प्रचार द्वारा प्रगट कऽ देलनि। ई प्रचारक काज अपना सभक उद्धारकर्ता-परमेश्वरक आज्ञा द्वारा हमरा सौंपि देल गेल अछि।
4
हम ई पत्र हमरा संग एके विश्वास मे सहभागिताक दृष्टि सँ अपन असली पुत्र तीतुस केँ लिखि रहल छी। पिता परमेश्वर आ अपना सभक उद्धारकर्ता मसीह यीशु अहाँ पर कृपा करथि आ अहाँ केँ शान्ति देथि।
5
हम अहाँ केँ क्रेत द्वीप मे एहि लेल छोड़ि अयलहुँ जे ओतुक्का बाँकी बात सभ केँ सुधारू आ जहिना हम अहाँ केँ सिखौने छलहुँ तहिना प्रत्येक नगर मे मण्डलीक देख-रेख कयनिहार सभ केँ नियुक्त करू।
6
ई आवश्यक अछि जे मण्डलीक देख-रेख कयनिहार निष्कलंक होथि, हुनका एकेटा स्त्री होनि, हुनकर बाल-बच्चा प्रभु पर विश्वास करैत होअय आ ओकरा सभ पर बदमास वा बेकहल होयबाक आरोप नहि लगाओल जा सकय।
7
किएक तँ जखन परमेश्वरक काज हुनका हाथ मे सौंपल गेल अछि तँ मण्डलीक जिम्मेवार केँ निष्कलंक होयब आवश्यक अछि। ओ जिद्दी, क्रोधी, शराबी, मारा-मारी कयनिहार आ अनुचित लाभ कमयबाक इच्छुक नहि होथि।
8
बल्कि ओ अतिथि-सत्कार कयनिहार, नीक बात सँ प्रेम कयनिहार, विचारवान, न्यायी, पवित्र चरित्रक आ संयमी होथि।
9
ओ विश्वसनीय वचनक ताहि रूप पर दृढ़ रहथि जाहि रूप मे ओ वचन हुनका सिखाओल गेलनि, जाहि सँ ओ सही सिद्धान्तक अनुसार लोक केँ शिक्षा दऽ सकथि आ तकर विरोधी सभ केँ निरुत्तर कऽ सकथि।
10
कारण, बहुत एहन लोक अछि जे बेकहल, बक-बक कयनिहार आ धोखेबाज अछि, विशेष रूप सँ खतना प्रथाक कट्टर समर्थक यहूदी सभ मे।
11
एकरा सभक मुँह बन्द कयनाइ आवश्यक अछि, किएक तँ एहन लोक नीच लक्ष्य सँ अपने लाभक लेल अनुचित बात सभ सिखा कऽ घरक-घर बिगाड़ि रहल अछि।
12
क्रेत वासी सभक अपनो एक भविष्यवक्ता कहने छथि जे, “क्रेत वासी सभ हरदम झूठ बजैत अछि, मरखाह जानबर आ आलसी पेटाह अछि।”
13
ओकरा सभक विषय मे कहल ई गवाही सत्य अछि। एहि लेल अहाँ ओकरा सभ केँ कड़ा चेतावनी दिऔक जाहि सँ ओकरा सभक विश्वास सही शिक्षा पर आधारित भऽ जाइक,
14
आ ओ सभ यहूदी सभक मनगढ़न्त कथा-पिहानी पर और सत्य केँ अस्वीकार करऽ वला लोक सभक विभिन्न नियम सभ पर ध्यान नहि दिअय।
15
शुद्ध मोनक लोकक लेल सभ वस्तु शुद्ध अछि मुदा जे सभ भ्रष्ट भेल अछि आ प्रभु पर विश्वास नहि करैत अछि, तकरा सभक लेल कोनो वस्तु शुद्ध नहि, कारण ओकरा सभक मोन आ विवेक दूनू दुषित भऽ गेल छैक।
16
ओ सभ अपना केँ परमेश्वर केँ जननिहार तँ कहैत अछि, मुदा अपना व्यवहार द्वारा हुनका अस्वीकार करैत अछि। ओ सभ घृणित अछि, आज्ञा उल्लंघन कयनिहार अछि और कोनो प्रकारक नीक काज करबाक जोगरक नहि अछि।
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 2 →
All chapters:
1
2
3