bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Mewari
/
mewari
/
1 Timothy 3
1 Timothy 3
mewari
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 4 →
1
या विस्वास जोगी बात हे के, यद्याँ कुई मण्डली का परदान बणणा छावे हे, तो वीं घणी भली मरजी राके हे।
2
एक मण्डली को परदान बना दोसवाळो वेणो छावे, वींके एकीस लुगई वे, खुद ने बंस में राकबावाळो, धीरज करबावाळो अन मरयादा में रेबावाळो, वो आपणाँ घर में अणजाण की भी आवभगत करे, वो हिकावाबाळा वेवे।
3
वो दारू पियावाळो ने वेवे, लड़ई-जगड़ो करबावाळो ने वेवे, पण दयाऊँ भरियो तको अन सान्तीऊँ रेबावाळो वेणो छावे, वींको मन रिप्या-कोड़ी में ने वेवे।
4
वो आपणाँ परवार की हार-हमाळ करबावाळो वेवे, अन वींका बाळक वींकी पूरो मान करे अन वींका क्या में रेवे।
5
यद्याँ कुई मनक योई ने जाणे के, खुद का परवार की हार-हमाळ कस्यान वेवे, तो वो परमेसर की मण्डली की हार-हमाळ कस्यान कर सकी?
6
वो विस्वास में पाको वेणो छावे, काँके कटे अस्यान ने वेवे के, वो सेतान के जस्यान मेपणो करन दण्ड पावे।
7
वो अस्यान को मनक वेणो छावे जिंको मण्डली का अलावा दूजाँ मनक भी मान करे, ताँके वो बदनाम ने वेवे अन सेतान का जाळ में ने फसे।
8
अणीस तरियाँ मण्डली का दास भी हाँचा अन हव वेवार का वेवे, वीं रिप्या-कोड़ी का भूका अन दारू पियावाळा ने वेवे।
9
वीं विस्वास का हाँच ने सई मनऊँ बताबावाळा वेणा छावे।
10
अणाने भी पेली मण्डली का परदान का जस्यान परक्या जाणा छावे जावे, यद्याँ अणामें कई दोस ने वे, तद्याँई अणाने मण्डली में दास का जस्यान काम करबा देणो छावे।
11
अणीस लुगायाँ भी हव वेवार की वेवे अन थाँरी मारी करबावाळी ने वेवे, ईं हूँस्यार अन हारी बाताँ में विस्वास जोगी वेणी छावे।
12
मण्डली का दास के, एकीस लुगई वेवे अन वो आपणाँ बाळकाँ अन आपणाँ परवार ने सई तरियाऊँ चलाबावाळो वेवे।
13
वीं दास ज्यो आपणो काम सई करे हे वीं खुद का वाते हव पद पाई अन वीं आपणाँ विस्वास का बारा में ज्यो ईसू मसी पे हे, वींने खुलन हिम्मत का हाते बोल सकी।
14
मूँ जट थाँरा नके आन मलबा की आस राकूँ हूँ, पण अबाणू तो मूँ ओ कागद लिकरियो हूँ,
15
पण यद्याँ मारा आबा में टेम लागी तो, ईं कागदऊँ जाण जाज्यो के, आपणाँ परमेसर को घराणो, जीं जीवता परमेसर की मण्डली हे या हाँच की नीम अन थम्बो हे, वींके हाते आपाँने कस्यान को वेवार करणो छावे।
16
कुई ने नट सके के, आपणाँ धरम को भेद कस्यो मोटा हे, वो ज्यो मनक का रूप में परगट व्यो, पुवितर आत्मा जिंने धरमी बतायो, अन हरग-दुत जिंने देक्यो, देसा देसा में वींको परच्यार करियो ग्यो, दनियाँ में वींपे विस्वास करियो ग्यो, अन मेमावान हरग में उठा लिदो ग्यो।
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 4 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6