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Galatians 2
Galatians 2
Urdu 2017 BCS
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1
आख़िर चौदह बरस के बा'द मैं बरनबास के साथ फिर यरुशलीम को गया और तितुस को भी साथ ले गया |
2
और मेरा जाना मुकाशफ़ा के मुताबिक़ हुआ; और जिस ख़ुशख़बरी की ग़ैर-क़ौमों में मनादी करता हूँ वो उन से बयान की, मगर तन्हाई मे उन्हीं के लोगों से जो कुछ समझे जाते थे, कहीं ऐसा ना हो कि मेरी इस वक़्त की या अगली दौड़ धूप बेफ़ायदा जाए |
3
लेकिन तीतुस भी जो मेरे साथ था और यूनानी है ख़तना करने पर मजबूर न किया गया |
4
और ये उन झूठे भाइयों की वजह से हुआ जो छिप कर दाख़िल हो गए थे,ताकि उस आज़ादी को जो तुम्हें मसीह ईसा' में हासिल है,जासूसों के तौर पर मालूम करके हमे ग़ुलामी में लाएँ|
5
उनके ताबे रहना हम ने पल भर के लिए भी मंज़ूर ना किया, ताकि ख़ुशख़बरी की सच्चाई तुम में क़ायम रहे |
6
और जो लोग कुछ समझे जाते थे [चाहे वो कैसे ही थे मुझे इससे कुछ भी वास्ता नही;ख़ुदा किसी आदमी का तरफ़दार नहीं] उनसे जो कुछ समझे जाते थे मुझे कुछ हासिल ना हुआ |
7
लेकिन बर'अक्स इसके जब उन्होने ये देखा कि जिस तरह मख़्तूनों को ख़ुशख़बरी देने का काम पतरस के सुपुर्द हुआ
8
क्यूंकि जिसने मख़्तूनों की रिसालत के लिए पतरस में असर पैदा किया, उसी ने ग़ैर-क़ौमों के लिए मुझ में भी असर पैदा किया];
9
और जब उन्होंने उस तौफ़ीक़ को मा'लूम किया जो मुझे मिली थी,तो या'क़ूब और कैफ़ा और याहुन ने जो कलिसिया के सुतून समझे जाते थे, मुझे और बरनबास को दहना हाथ देकर शरीक कर लिया, ताकि हम ग़ैर क़ौमों के पास जाएँ और वो मख़्तूनों के पास;
10
और सिर्फ़ ये कहा कि ग़रीबों को याद रखना, मगर मैं ख़ुद ही इसी काम की कोशिश में हूँ |
11
लेकिन जब कैफ़ा अंताकिया में आया तो मैने रु-ब-रु होकर उसकी मुख़ालिफ़त की,क्यूंकि वो मलामत के लायक़ था |
12
इस लिए कि या'क़ूब की तरफ़ से चन्द लोगों के आने से पहले तो वो ग़ैर-क़ौम वालों के साथ खाया करता था,मगर जब वो आ गए तो मख़्तूनों से डर कर बाज़ रहा और किनारा किया|
13
और बाक़ी यहूदियों ने भी उसके साथ होकर रियाकारी की यहाँ तक कि बरनबास भी उसके साथ रियाकारी में पड़ गया|
14
जब मैंने देखा कि वो ख़ुशख़बरी की सच्चाई के मुताबिक़ सीधी चाल नहीं चलते,तो मैने सब के सामने कैफ़ा से क़हा, “जब तू बावजूद यहूदी होने के ग़ैर क़ौमों की तरह ज़िंदगी गुज़ारता है न कि यहूदियों की तरह तो ग़ैर क़ौमों को यहूदियों की तरह चलने पर क्यूँ मजबूर करता है?”
15
जबकि हम पैदाइश से यहूदी हैं, और गुनहगार ग़ैर क़ौमों में से नही|
16
तोभी ये जान कर कि आदमी शरीअत के आमाल से नहीं बल्कि सिर्फ़ ईसा' मसीह पर ईमान लाने से रास्तबाज़ ठहरता है ख़ुद भी मसीह ईसा' पर ईमान लाने से रास्तबाज़ ठहरें न कि शरीअत के आमाल से क्यूंकि शरीअत के अमाल से कोई भी बशर रास्त बाज़ न ठहरेगा |
17
और हम जो मसीह मे रास्तबाज़ ठहरना चाहते हैं, अगर ख़ुद ही गुनाहगार निकलें तो क्या मसीह गुनाह का ज़रि'ए है? हरगिज़ नहीं!
18
क्यूंकि जो कुछ मैंने ढा दिया अगर उसे फिर बनाऊँ,तो अपने आप को कुसुरवार ठहराता हूँ|
19
चुनाचे मैं शरी'अत ही के वसीले से शरी'अत के ए'तिबार से मारा गया, ताकि ख़ुदा के ए'तिबार से ज़िंदा हो जाऊँ|
20
मैं मसीह के साथ मसलूब हुआ हूं; और अब मैं ज़िंदा न रहा बल्कि मसीह मुझ में ज़िंदा है;और मैं जो अब जिस्म में ज़िन्दगी गुज़ारता हूँ तो ख़ुदा के बेटे पर ईमान लाने से गुज़ारता हूं,जिसने मुझ से मुहब्बत रखी और अपने आप को मेरे लिए मौत के हवाले कर दिया|
21
मैं ख़ुदा के फ़ज़ल को बेकार नहीं करता,क्यूंकि रास्तबाज़ी अगर शरी'अत के वसीले से मिलती,तो मसीह का मरना बेकार होता|
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