bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu 2017 BCS
/
Philippians 3
Philippians 3
Urdu 2017 BCS
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 4 →
1
ग़रज़ मेरे भाइयों! ख़ुदावन्द में ख़ुश रहो| तुम्हें एक ही बात बार-बार लिखने में मुझे तो कोई दिक़्क़त नहीं,और तुम्हारी इसमें हिफ़ाज़त है|
2
कुत्तों से ख़बरदार रहो, बदकारों से ख़बरदार रहो कटवाने वालों से ख़बरदार रहो|
3
क्यूँकि मख़्तून तो हम हैं जो ख़ुदा की रूह की हिदायत से ख़ुदा की इबादत करते हैं, और मसीह पर फ़ख़्र करते हैं, और जिस्म का भरोसा नहीं करते|
4
अगर्चे मैं तो जिस्म का भी भरोसा कर सकता हूँ|अगर किसी और को जिस्म पर भरोसा करने का ख़याल हो, तो मैं उससे भी ज़्यादा कर सकता हूँ|
5
आठवें दिन मेरा ख़तना हुआ,इस्राईल की क़ौम और बिनयमीन के क़बीले का हूँ, इबरानियो, का इब्रानी और शरी'अत के ऐ'तिबार से फ़रीसी हूँ
6
जोश के एतबार से कलिसिया का, सतानेवाला, शरी'अत की रास्तबाजी के ऐतबार से बे 'ऐब था,
7
लेकिन जितनी चीज़ें मेरे नफ़े ' की थी उन्ही को मैंने मसीह की ख़ातिर नुक़्सान समझ लिया है|
8
बल्कि मैंने अपने ख़ुदावन्द मसीह 'ईसा' की पहचान की बड़ी ख़ूबी की वजह से सब चीज़ों का नुक़्सान उठाया और उनको कूड़ा समझता हूँ ताकि मसीह को हासिल करूँ
9
और उस में पाया जाऊँ, न अपनी उस रास्तबाज़ी के साथ जो शरी'अत की तरफ़ से है, बल्कि उस रास्तबाज़ी के साथ जो मसीह पर ईमान लाने की वजह से है और ख़ुदा की तरफ़ से ईमान पर मिलती है;
10
और मैं उसको और उसके जी उठने की क़ुदरत को, और उसके साथ दुखों में शरीक होने को मा'लूम करूँ, और उसकी मौत से मुशाबहत पैदा करूँ
11
ताकि किसी तरह मुर्दों में से जी उठने के दर्जे तक पहुचूं |
12
अगर्चे ये नही कि मैं पा चुका या कामिल हो चुका हूँ, बल्कि उस चीज़ को पकड़ने को दौड़ा हुआ जाता हूँ जिसके लिए मसीह ईसा 'ने मुझे पकड़ा था|
13
ऐ भाइयों!मेरा ये गुमान नही कि पकड़ चुका हूँ;बल्कि सिर्फ़ ये करता हूँ कि जो चीजें पीछे रह गई उनको भूल कर, आगे की चीज़ों की तरफ़ बढ़ा हुआ|
14
निशाने की तरफ़ दौड़ा हुआ जाता हूँ,ताकि उस इनाम को हासिल करूँ जिसके लिए ख़ुदा ने मुझे मसीह ईसा' में ऊपर बुलाया है|
15
पस हम में से जितने कामिल हैं यही ख़याल रखें, और अगर किसी बात में तुम्हारा और तरह का ख़याल हो तो ख़ुदा उस बात को तुम पर भी ज़ाहिर कर देगा|
16
बहरहाल जहाँ तक हम पहूँचे हैं उसी के मुताबिक़ चलें|
17
ऐ भाइयों! तुम सब मिलकर मेरी तरह बनो, और उन लोगों की पहचान रखो जो इस तरह चलते हैं जिसका नमूना तुम हम में पाते हो;
18
क्यूँकि बहुत सारे ऐसे हैं जिसका ज़िक्र मैंने तुम से बराबर किया है, और अब भी रो रो कर कहता हूँ कि वो अपने चाल-चलन से मसीह की सलीब के दुश्मन हैं|
19
उनका अन्जाम हलाकत है, उनका ख़ुदा पेट है, वो अपनी शर्म की बातों पर फ़ख़्र करते हैं और दुनिया की चीज़ों के ख़याल में रहते हैं|
20
मगर हमारा वतन असमान पर है हम एक मुन्जी यानी ख़ुदावन्द 'ईसा' मसीह के वहां से आने के इन्तिज़ार में हैं|
21
वो अपनी उस ताक़त की तासीर के मुवाफ़िक़, जिससे सब चीज़ें अपने ताबे'कर सकता है, हमारी पस्त हाली के बदन की शक्ल बदल कर अपने जलाल के बदन की सूरत बनाएगा|
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 4 →
All chapters:
1
2
3
4