bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
/
2 Chronicles 8
2 Chronicles 8
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
← Chapter 7
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 9 →
1
रब के घर और शाही महल को तामीर करने में 20 साल लग गए थे।
2
इसके बाद सुलेमान ने वह आबादियाँ नए सिरे से तामीर कीं जो हीराम ने उसे दे दी थीं। इनमें उसने इसराईलियों को बसा दिया।
3
एक फ़ौजी मुहिम के दौरान उसने हमात-ज़ोबाह पर हमला करके उस पर क़ब्ज़ा कर लिया।
4
इसके अलावा उसने हमात के इलाक़े में गोदाम के शहर बनाए। रेगिस्तान के शहर तदमूर में उसने बहुत-सा तामीरी काम कराया
5
और इसी तरह बालाई और नशेबी बैत-हौरून और बालात में भी। इन शहरों के लिए उसने फ़सील और कुंडेवाले दरवाज़े बनवाए। सुलेमान ने अपने गोदामों के लिए और अपने रथों और घोड़ों को रखने के लिए भी शहर बनवाए। जो कुछ भी वह यरूशलम, लुबनान या अपनी सलतनत की किसी और जगह बनवाना चाहता था वह उसने बनवाया।
7
जिन आदमियों की सुलेमान ने बेगार पर भरती की वह इसराईली नहीं थे बल्कि हित्ती, अमोरी, फ़रिज़्ज़ी, हिव्वी और यबूसी यानी कनान के पहले बाशिंदों की वह औलाद थे जो बाक़ी रह गए थे। मुल्क पर क़ब्ज़ा करते वक़्त इसराईली इन क़ौमों को पूरे तौर पर मिटा न सके, और आज तक इनकी औलाद को इसराईल के लिए बेगार में काम करना पड़ता है।
9
लेकिन सुलेमान ने इसराईलियों को ऐसे काम करने पर मजबूर न किया बल्कि वह उसके फ़ौजी और रथों के फ़ौजियों के अफ़सर बन गए, और उन्हें रथों और घोड़ों पर मुक़र्रर किया गया।
10
सुलेमान के तामीरी काम पर भी 250 इसराईली मुक़र्रर थे जो ज़िलों पर मुक़र्रर अफ़सरों के ताबे थे। यह लोग तामीरी काम करनेवालों की निगरानी करते थे।
11
फ़िरौन की बेटी यरूशलम के पुराने हिस्से बनाम ‘दाऊद का शहर’ से उस महल में मुंतक़िल हुई जो सुलेमान ने उसके लिए तामीर किया था, क्योंकि सुलेमान ने कहा, “लाज़िम है कि मेरी अहलिया इसराईल के बादशाह दाऊद के महल में न रहे। चूँकि रब का संदूक़ यहाँ से गुज़रा है, इसलिए यह जगह मुक़द्दस है।”
12
उस वक़्त से सुलेमान रब को रब के घर के बड़े हाल के सामने की क़ुरबानगाह पर भस्म होनेवाली क़ुरबानियाँ पेश करता था।
13
जो कुछ भी मूसा ने रोज़ाना की क़ुरबानियों के मुताल्लिक़ फ़रमाया था उसके मुताबिक़ बादशाह क़ुरबानियाँ चढ़ाता था। इनमें वह क़ुरबानियाँ भी शामिल थीं जो सबत के दिन, नए चाँद की ईद पर और साल की तीन बड़ी ईदों पर यानी फ़सह की ईद, हफ़तों की ईद और झोंपड़ियों की ईद पर पेश की जाती थीं।
14
सुलेमान ने इमामों के मुख़्तलिफ़ गुरोहों को वह ज़िम्मादारियाँ सौंपीं जो उसके बाप दाऊद ने मुक़र्रर की थीं। लावियों की ज़िम्मादारियाँ भी मुक़र्रर की गईं। उनकी एक ज़िम्मादारी रब की हम्दो-सना करने में परस्तारों की राहनुमाई करनी थी। नीज़, उन्हें रोज़ाना की ज़रूरियात के मुताबिक़ इमामों की मदद करनी थी। रब के घर के दरवाज़ों की पहरादारी भी लावियों की एक ख़िदमत थी। हर दरवाज़े पर एक अलग गुरोह की ड्यूटी लगाई गई। यह भी मर्दे-ख़ुदा दाऊद की हिदायात के मुताबिक़ हुआ।
15
जो भी हुक्म दाऊद ने इमामों, लावियों और ख़ज़ानों के मुताल्लिक़ दिया था वह उन्होंने पूरा किया।
16
यों सुलेमान के तमाम मनसूबे रब के घर की बुनियाद रखने से लेकर उस की तकमील तक पूरे हुए।
17
बाद में सुलेमान अस्यून-जाबर और ऐलात गया। यह शहर अदोम के साहिल पर वाक़े थे।
18
वहाँ हीराम बादशाह ने अपने जहाज़ और तजरबाकार मल्लाह भेजे ताकि वह सुलेमान के आदमियों के साथ मिलकर जहाज़ों को चलाएँ। उन्होंने ओफ़ीर तक सफ़र किया और वहाँ से सुलेमान के लिए तक़रीबन 15,000 किलोग्राम सोना लेकर आए।
← Chapter 7
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 9 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36