bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
/
2 Samuel 2
2 Samuel 2
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
← Chapter 1
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 3 →
1
इसके बाद दाऊद ने रब से दरियाफ़्त किया, “क्या मैं यहूदाह के किसी शहर में वापस चला जाऊँ?” रब ने जवाब दिया, “हाँ, वापस जा।” दाऊद ने सवाल किया, “मैं किस शहर में जाऊँ?” रब ने जवाब दिया, “हबरून में।”
2
चुनाँचे दाऊद अपनी दो बीवियों अख़ीनुअम यज़्रएली और नाबाल की बेवा अबीजेल करमिली के साथ हबरून में जा बसा।
3
दाऊद ने अपने आदमियों को भी उनके ख़ानदानों समेत हबरून और गिर्दो-नवाह की आबादियों में मुंतक़िल कर दिया।
4
एक दिन यहूदाह के आदमी हबरून में आए और दाऊद को मसह करके अपना बादशाह बना लिया। जब दाऊद को ख़बर मिल गई कि यबीस-जिलियाद के मर्दों ने साऊल को दफ़ना दिया है
5
तो उसने उन्हें पैग़ाम भेजा, “रब आपको इसके लिए बरकत दे कि आपने अपने मालिक साऊल को दफ़न करके उस पर मेहरबानी की है।
6
जवाब में रब आप पर अपनी मेहरबानी और वफ़ादारी का इज़हार करे। मैं भी इस नेक अमल का अज्र दूँगा।
7
अब मज़बूत और दिलेर हों। आपका आक़ा साऊल तो फ़ौत हुआ है, लेकिन यहूदाह के क़बीले ने मुझे उस की जगह चुन लिया है।”
8
इतने में साऊल की फ़ौज के कमाँडर अबिनैर बिन नैर ने साऊल के बेटे इशबोसत को महनायम शहर में ले जाकर
9
बादशाह मुक़र्रर कर दिया। जिलियाद, यज़्रएल, आशर, इफ़राईम, बिनयमीन और तमाम इसराईल उसके क़ब्ज़े में रहे।
10
सिर्फ़ यहूदाह का क़बीला दाऊद के साथ रहा। इशबोसत 40 साल की उम्र में बादशाह बना, और उस की हुकूमत दो साल क़ायम रही।
11
दाऊद हबरून में यहूदाह पर साढ़े सात साल हुकूमत करता रहा।
12
एक दिन अबिनैर इशबोसत बिन साऊल के मुलाज़िमों के साथ महनायम से निकलकर जिबऊन आया।
13
यह देखकर दाऊद की फ़ौज योआब बिन ज़रूयाह की राहनुमाई में उनसे लड़ने के लिए निकली। दोनों फ़ौजों की मुलाक़ात जिबऊन के तालाब पर हुई। अबिनैर की फ़ौज तालाब की उरली तरफ़ रुक गई और योआब की फ़ौज परली तरफ़।
14
अबिनैर ने योआब से कहा, “आओ, हमारे चंद जवान हमारे सामने एक दूसरे का मुक़ाबला करें।” योआब बोला, “ठीक है।”
15
चुनाँचे हर फ़ौज ने बारह जवानों को चुनकर मुक़ाबले के लिए पेश किया। इशबोसत और बिनयमीन के क़बीले के बारह जवान दाऊद के बारह जवानों के मुक़ाबले में खड़े हो गए।
16
जब मुक़ाबला शुरू हुआ तो हर एक ने एक हाथ से अपने मुख़ालिफ़ के बालों को पकड़कर दूसरे हाथ से अपनी तलवार उसके पेट में घोंप दी। सबके सब एक साथ मर गए। बाद में जिबऊन की इस जगह का नाम ख़िलक़त-हज़्ज़ूरीम पड़ गया।
17
फिर दोनों फ़ौजों के दरमियान निहायत सख़्त लड़ाई छिड़ गई। लड़ते लड़ते अबिनैर और उसके मर्द हार गए।
18
योआब के दो भाई अबीशै और असाहेल भी लड़ाई में हिस्सा ले रहे थे। असाहेल ग़ज़ाल की तरह तेज़ दौड़ सकता था।
19
जब अबिनैर शिकस्त खाकर भागने लगा तो असाहेल सीधा उसके पीछे पड़ गया और न दाईं, न बाईं तरफ़ हटा।
20
अबिनैर ने पीछे देखकर पूछा, “क्या आप ही हैं, असाहेल?” उसने जवाब दिया, “जी, मैं ही हूँ।”
21
अबिनैर बोला, “दाईं या बाईं तरफ़ हटकर किसी और को पकड़ें! जवानों में से किसी से लड़कर उसके हथियार और ज़िरा-बकतर उतारें।” लेकिन असाहेल उसका ताक़्क़ुब करने से बाज़ न आया।
22
अबिनैर ने उसे आगाह किया, “ख़बरदार। मेरे पीछे से हट जाएँ, वरना आपको मार देने पर मजबूर हो जाऊँगा। फिर आपके भाई योआब को किस तरह मुँह दिखाऊँगा?”
23
तो भी असाहेल ने पीछा न छोड़ा। यह देखकर अबिनैर ने अपने नेज़े का दस्ता इतने ज़ोर से उसके पेट में घोंप दिया कि उसका सिरा दूसरी तरफ़ निकल गया। असाहेल वहीं गिरकर जान-बहक़ हो गया। जिसने भी वहाँ से गुज़रकर यह देखा वह वहीं रुक गया।
24
लेकिन योआब और अबीशै अबिनैर का ताक़्क़ुब करते रहे। जब सूरज ग़ुरूब होने लगा तो वह एक पहाड़ी के पास पहुँच गए जिसका नाम अम्मा था। यह जियाह के मुक़ाबिल उस रास्ते के पास है जो मुसाफ़िर को जिबऊन से रेगिस्तान में पहुँचाता है।
25
बिनयमीन के क़बीले के लोग वहाँ पहाड़ी पर अबिनैर के पीछे जमा होकर दुबारा लड़ने के लिए तैयार हो गए।
26
अबिनैर ने योआब को आवाज़ दी, “क्या यह ज़रूरी है कि हम हमेशा तक एक दूसरे को मौत के घाट उतारते जाएँ? क्या आपको समझ नहीं आई कि ऐसी हरकतें सिर्फ़ तलख़ी पैदा करती हैं? आप कब अपने मर्दों को हुक्म देंगे कि वह अपने इसराईली भाइयों का ताक़्क़ुब करने से बाज़ आएँ?”
27
योआब ने जवाब दिया, “रब की हयात की क़सम, अगर आप लड़ने का हुक्म न देते तो मेरे लोग आज सुबह ही अपने भाइयों का ताक़्क़ुब करने से बाज़ आ जाते।”
28
उसने नरसिंगा बजा दिया, और उसके आदमी रुककर दूसरों का ताक़्क़ुब करने से बाज़ आए। यों लड़ाई ख़त्म हो गई।
29
उस पूरी रात के दौरान अबिनैर और उसके आदमी चलते गए। दरियाए-यरदन की वादी में से गुज़रकर उन्होंने दरिया को पार किया और फिर गहरी घाटी में से होकर महनायम पहुँच गए।
30
योआब भी अबिनैर और उसके लोगों को छोड़कर वापस चला गया। जब उसने अपने आदमियों को जमा करके गिना तो मालूम हुआ कि असाहेल के अलावा दाऊद के 19 आदमी मारे गए हैं।
31
इसके मुक़ाबले में अबिनैर के 360 आदमी हलाक हुए थे। सब बिनयमीन के क़बीले के थे।
32
योआब और उसके साथियों ने असाहेल की लाश उठाकर उसे बैत-लहम में उसके बाप की क़ब्र में दफ़न किया। फिर उसी रात अपना सफ़र जारी रखकर वह पौ फटते वक़्त हबरून पहुँच गए।
← Chapter 1
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 3 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24