bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
/
Acts 18
Acts 18
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
← Chapter 17
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 19 →
1
इसके बाद पौलुस अथेने को छोड़कर कुरिंथुस शहर आया।
2
वहाँ उस की मुलाक़ात एक यहूदी से हुई जिसका नाम अकविला था। वह पुंतुस का रहनेवाला था और थोड़ी देर पहले अपनी बीवी प्रिसकिल्ला समेत इटली से आया था। वजह यह थी कि शहनशाह क्लौदियुस ने हुक्म सादिर किया था कि तमाम यहूदी रोम को छोड़कर चले जाएँ। उन लोगों के पास पौलुस गया
3
और चूँकि उनका पेशा भी ख़ैमे सिलाई करना था इसलिए वह उनके घर ठहरकर रोज़ी कमाने लगा।
4
साथ साथ उसने हर सबत को यहूदी इबादतख़ाने में तालीम देकर यहूदियों और यूनानियों को क़ायल करने की कोशिश की।
5
जब सीलास और तीमुथियुस मकिदुनिया से आए तो पौलुस अपना पूरा वक़्त कलाम सुनाने में सर्फ़ करने लगा। उसने यहूदियों को गवाही दी कि ईसा कलामे-मुक़द्दस में बयान किया गया मसीह है।
6
लेकिन जब वह उस की मुख़ालफ़त करके उस की तज़लील करने लगे तो उसने एहतजाज में अपने कपड़ों से गर्द झाड़कर कहा, “आप ख़ुद अपनी हलाकत के ज़िम्मादार हैं, मैं बेक़ुसूर हूँ। अब से मैं ग़ैरयहूदियों के पास जाया करूँगा।”
7
फिर वह वहाँ से निकलकर इबादतख़ाने के साथवाले घर में गया। वहाँ तितुस यूसतुस रहता था जो यहूदी नहीं था, लेकिन ख़ुदा का ख़ौफ़ मानता था।
8
और क्रिसपुस जो इबादतख़ाने का राहनुमा था अपने घराने समेत ख़ुदावंद पर ईमान लाया। कुरिंथुस के बहुत सारे और लोगों ने भी जब पौलुस की बातें सुनीं तो ईमान लाए और बपतिस्मा लिया।
9
एक रात ख़ुदावंद रोया में पौलुस से हमकलाम हुआ, “मत डर! कलाम करता जा और ख़ामोश न हो,
10
क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ। कोई हमला करके तुझे नुक़सान नहीं पहुँचाएगा, क्योंकि इस शहर में मेरे बहुत-से लोग हैं।”
11
फिर पौलुस मज़ीद डेढ़ साल वहाँ ठहरकर लोगों को अल्लाह का कलाम सिखाता रहा।
12
उन दिनों में जब गल्लियो सूबा अख़या का गवर्नर था तो यहूदी मुत्तहिद होकर पौलुस के ख़िलाफ़ जमा हुए और उसे अदालत में गल्लियो के सामने लाए।
13
उन्होंने कहा, “यह आदमी लोगों को ऐसे तरीक़े से अल्लाह की इबादत करने पर उकसा रहा है जो हमारी शरीअत के ख़िलाफ़ है।”
14
पौलुस जवाब में कुछ कहने को था कि गल्लियो ख़ुद यहूदियों से मुख़ातिब हुआ, “सुनें, यहूदी मर्दो! अगर आपका इलज़ाम कोई नाइनसाफ़ी या संगीन जुर्म होता तो आपकी बात क़ाबिले-बरदाश्त होती।
15
लेकिन आपका झगड़ा मज़हबी तालीम, नामों और आपकी यहूदी शरीअत से ताल्लुक़ रखता है, इसलिए उसे ख़ुद हल करें। मैं इस मामले में फ़ैसला करने के लिए तैयार नहीं हूँ।”
16
यह कहकर उसने उन्हें अदालत से भगा दिया।
17
इस पर हुजूम ने यहूदी इबादतख़ाने के राहनुमा सोसथिनेस को पकड़कर अदालत के सामने उस की पिटाई की। लेकिन गल्लियो ने परवा न की।
18
इसके बाद भी पौलुस बहुत दिन कुरिंथुस में रहा। फिर भाइयों को ख़ैरबाद कहकर वह क़रीब के शहर किंख़रिया गया जहाँ उसने किसी मन्नत के पूरे होने पर अपने सर के बाल मुँडवा दिए। इसके बाद वह प्रिसकिल्ला और अकविला के साथ जहाज़ पर सवार होकर मुल्के-शाम के लिए रवाना हुआ।
19
पहले वह इफ़िसुस पहुँचे जहाँ पौलुस ने प्रिसकिल्ला और अकविला को छोड़ दिया। वहाँ भी उसने यहूदी इबादतख़ाने में जाकर यहूदियों से बहस की।
20
उन्होंने उससे दरख़ास्त की कि मज़ीद वक़्त उनके साथ गुज़ारे, लेकिन उसने इनकार किया
21
और उन्हें ख़ैरबाद कहकर कहा, “अगर अल्लाह की मरज़ी हो तो मैं आपके पास वापस आऊँगा।” फिर वह जहाज़ पर सवार होकर इफ़िसुस से रवाना हुआ।
22
सफ़र करते करते वह क़ैसरिया पहुँच गया, जहाँ से वह यरूशलम जाकर मक़ामी जमात से मिला। इसके बाद वह अंताकिया वापस चला गया
23
जहाँ वह कुछ देर ठहरा। फिर आगे निकलकर वह गलतिया और फ़रूगिया के इलाक़े में से गुज़रते हुए वहाँ के तमाम ईमानदारों को मज़बूत करता गया।
24
इतने में एक फ़सीह यहूदी जिसे कलामे-मुक़द्दस का ज़बरदस्त इल्म था इफ़िसुस पहुँच गया था। उसका नाम अपुल्लोस था। वह मिसर के शहर इस्कंदरिया का रहनेवाला था।
25
उसे ख़ुदावंद की राह के बारे में तालीम दी गई थी और वह बड़ी सरगरमी से लोगों को ईसा के बारे में सिखाता रहा। उस की यह तालीम सहीह थी अगरचे वह अभी तक सिर्फ़ यहया का बपतिस्मा जानता था।
26
इफ़िसुस के यहूदी इबादतख़ाने में वह बड़ी दिलेरी से कलाम करने लगा। यह सुनकर प्रिसकिल्ला और अकविला ने उसे एक तरफ़ ले जाकर उसके सामने अल्लाह की राह को मज़ीद तफ़सील से बयान किया।
27
अपुल्लोस सूबा अख़या जाने का ख़याल रखता था तो इफ़िसुस के भाइयों ने उस की हौसलाअफ़्ज़ाई की। उन्होंने वहाँ के शागिर्दों को ख़त लिखा कि वह उसका इस्तक़बाल करें। जब वह वहाँ पहुँचा तो उनके लिए बड़ी मदद का बाइस बना जो अल्लाह के फ़ज़ल से ईमान लाए थे,
28
क्योंकि वह अलानिया मुबाहसों में ज़बरदस्त दलायल से यहूदियों पर ग़ालिब आया और कलामे-मुक़द्दस से साबित किया कि ईसा मसीह है।
← Chapter 17
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 19 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28