bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
/
Exodus 32
Exodus 32
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
← Chapter 31
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 33 →
1
पहाड़ के दामन में लोग मूसा के इंतज़ार में रहे, लेकिन बहुत देर हो गई। एक दिन वह हारून के गिर्द जमा होकर कहने लगे, “आएँ, हमारे लिए देवता बना दें जो हमारे आगे आगे चलते हुए हमारी राहनुमाई करें। क्योंकि क्या मालूम कि उस बंदे मूसा को क्या हुआ है जो हमें मिसर से निकाल लाया।”
2
जवाब में हारून ने कहा, “आपकी बीवियाँ, बेटे और बेटियाँ अपनी सोने की बालियाँ उतारकर मेरे पास ले आएँ।”
3
सब लोग अपनी बालियाँ उतार उतारकर हारून के पास ले आए
4
तो उसने यह ज़ेवरात लेकर बछड़ा ढाल दिया। बछड़े को देखकर लोग बोल उठे, “ऐ इसराईल, यह तेरे देवता हैं जो तुझे मिसर से निकाल लाए।”
5
जब हारून ने यह देखा तो उसने बछड़े के सामने क़ुरबानगाह बनाकर एलान किया, “कल हम रब की ताज़ीम में ईद मनाएँगे।”
6
अगले दिन लोग सुबह-सवेरे उठे और भस्म होनेवाली क़ुरबानियाँ और सलामती की क़ुरबानियाँ चढ़ाईं। वह खाने-पीने के लिए बैठ गए और फिर उठकर रंगरलियों में अपने दिल बहलाने लगे।
7
उस वक़्त रब ने मूसा से कहा, “पहाड़ से उतर जा। तेरे लोग जिन्हें तू मिसर से निकाल लाया बड़ी शरारतें कर रहे हैं।
8
वह कितनी जल्दी से उस रास्ते से हट गए हैं जिस पर चलने के लिए मैंने उन्हें हुक्म दिया था। उन्होंने अपने लिए ढाला हुआ बछड़ा बनाकर उसे सिजदा किया है। उन्होंने उसे क़ुरबानियाँ पेश करके कहा है, ‘ऐ इसराईल, यह तेरे देवता हैं। यही तुझे मिसर से निकाल लाए हैं’।”
9
अल्लाह ने मूसा से कहा, “मैंने देखा है कि यह क़ौम बड़ी हटधर्म है।
10
अब मुझे रोकने की कोशिश न कर। मैं उन पर अपना ग़ज़ब उंडेलकर उनको रूए-ज़मीन पर से मिटा दूँगा। उनकी जगह मैं तुझसे एक बड़ी क़ौम बना दूँगा।”
11
लेकिन मूसा ने कहा, “ऐ रब, तू अपनी क़ौम पर अपना ग़ुस्सा क्यों उतारना चाहता है? तू ख़ुद अपनी अज़ीम क़ुदरत से उसे मिसर से निकाल लाया है।
12
मिसरी क्यों कहें, ‘रब इसराईलियों को सिर्फ़ इस बुरे मक़सद से हमारे मुल्क से निकाल ले गया है कि उन्हें पहाड़ी इलाक़े में मार डाले और यों उन्हें रूए-ज़मीन पर से मिटाए’? अपना ग़ुस्सा ठंडा होने दे और अपनी क़ौम के साथ बुरा सुलूक करने से बाज़ रह।
13
याद रख कि तूने अपने ख़ादिमों इब्राहीम, इसहाक़ और याक़ूब से अपनी ही क़सम खाकर कहा था, ‘मैं तुम्हारी औलाद की तादाद यों बढ़ाऊँगा कि वह आसमान के सितारों के बराबर हो जाएगी। मैं उन्हें वह मुल्क दूँगा जिसका वादा मैंने किया है, और वह उसे हमेशा के लिए मीरास में पाएँगे’।”
14
मूसा के कहने पर रब ने वह नहीं किया जिसका एलान उसने कर दिया था बल्कि वह अपनी क़ौम से बुरा सुलूक करने से बाज़ रहा।
15
मूसा मुड़कर पहाड़ से उतरा। उसके हाथों में शरीअत की दोनों तख़्तियाँ थीं। उन पर आगे पीछे लिखा गया था।
16
अल्लाह ने ख़ुद तख़्तियों को बनाकर उन पर अपने अहकाम कंदा किए थे।
17
उतरते उतरते यशुअ ने लोगों का शोर सुना और मूसा से कहा, “ख़ैमागाह में जंग का शोर मच रहा है!”
18
मूसा ने जवाब दिया, “न तो यह फ़तहमंदों के नारे हैं, न शिकस्त खाए हुओं की चीख़-पुकार। मुझे गानेवालों की आवाज़ सुनाई दे रही है।”
19
जब वह ख़ैमागाह के नज़दीक पहुँचा तो उसने लोगों को सोने के बछड़े के सामने नाचते हुए देखा। बड़े ग़ुस्से में आकर उसने तख़्तियों को ज़मीन पर पटख़ दिया, और वह टुकड़े टुकड़े होकर पहाड़ के दामन में गिर गईं।
20
मूसा ने इसराईलियों के बनाए हुए बछड़े को जला दिया। जो कुछ बच गया उसे उसने पीस पीसकर पौडर बना डाला और पौडर पानी पर छिड़ककर इसराईलियों को पिला दिया।
21
उसने हारून से पूछा, “इन लोगों ने तुम्हारे साथ क्या किया कि तुमने उन्हें ऐसे बड़े गुनाह में फँसा दिया?”
22
हारून ने कहा, “मेरे आक़ा। ग़ुस्से न हों। आप ख़ुद जानते हैं कि यह लोग बदी पर तुले रहते हैं।
23
उन्होंने मुझसे कहा, ‘हमारे लिए देवता बना दें जो हमारे आगे आगे चलते हुए हमारी राहनुमाई करें। क्योंकि क्या मालूम कि उस बंदे मूसा को क्या हुआ है जो हमें मिसर से निकाल लाया।’
24
इसलिए मैंने उनको बताया, ‘जिसके पास सोने के ज़ेवरात हैं वह उन्हें उतार लाए।’ जो कुछ उन्होंने मुझे दिया उसे मैंने आग में फेंक दिया तो होते होते सोने का यह बछड़ा निकल आया।”
25
मूसा ने देखा कि लोग बेकाबू हो गए हैं। क्योंकि हारून ने उन्हें बेलगाम छोड़ दिया था, और यों वह इसराईल के दुश्मनों के लिए मज़ाक़ का निशाना बन गए थे।
26
मूसा ख़ैमागाह के दरवाज़े पर खड़े होकर बोला, “जो भी रब का बंदा है वह मेरे पास आए।” जवाब में लावी के क़बीले के तमाम लोग उसके पास जमा हो गए।
27
फिर मूसा ने उनसे कहा, “रब इसराईल का ख़ुदा फ़रमाता है, ‘हर एक अपनी तलवार लेकर ख़ैमागाह में से गुज़रे। एक सिरे के दरवाज़े से शुरू करके दूसरे सिरे के दरवाज़े तक चलते चलते हर मिलनेवाले को जान से मार दो, चाहे वह तुम्हारा भाई, दोस्त या रिश्तेदार ही क्यों न हो। फिर मुड़कर मारते मारते पहले दरवाज़े पर वापस आ जाओ’।”
28
लावियों ने मूसा की हिदायत पर अमल किया तो उस दिन तक़रीबन 3,000 मर्द हलाक हुए।
29
यह देखकर मूसा ने लावियों से कहा, “आज अपने आपको मक़दिस में रब की ख़िदमत करने के लिए मख़सूसो-मुक़द्दस करो, क्योंकि तुम अपने बेटों और भाइयों के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए तैयार थे। इसलिए रब तुमको आज बरकत देगा।”
30
अगले दिन मूसा ने इसराईलियों से बात की, “तुमने निहायत संगीन गुनाह किया है। तो भी मैं अब रब के पास पहाड़ पर जा रहा हूँ। शायद मैं तुम्हारे गुनाह का कफ़्फ़ारा दे सकूँ।”
31
चुनाँचे मूसा ने रब के पास वापस जाकर कहा, “हाय, इस क़ौम ने निहायत संगीन गुनाह किया है। उन्होंने अपने लिए सोने का देवता बना लिया।
32
मेहरबानी करके उन्हें मुआफ़ कर। लेकिन अगर तू उन्हें मुआफ़ न करे तो फिर मुझे भी अपनी उस किताब में से मिटा दे जिसमें तूने अपने लोगों के नाम दर्ज किए हैं।”
33
रब ने जवाब दिया, “मैं सिर्फ़ उसको अपनी किताब में से मिटाता हूँ जो मेरा गुनाह करता है।
34
अब जा, लोगों को उस जगह ले चल जिसका ज़िक्र मैंने किया है। मेरा फ़रिश्ता तेरे आगे आगे चलेगा। लेकिन जब सज़ा का मुक़र्ररा दिन आएगा तब मैं उन्हें सज़ा दूँगा।”
35
फिर रब ने इसराईलियों के दरमियान वबा फैलने दी, इसलिए कि उन्होंने उस बछड़े की पूजा की थी जो हारून ने बनाया था।
← Chapter 31
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 33 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40