bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
/
Isaiah 10
Isaiah 10
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
← Chapter 9
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 49
Chapter 50
Chapter 51
Chapter 52
Chapter 53
Chapter 54
Chapter 55
Chapter 56
Chapter 57
Chapter 58
Chapter 59
Chapter 60
Chapter 61
Chapter 62
Chapter 63
Chapter 64
Chapter 65
Chapter 66
Chapter 11 →
1
तुम पर अफ़सोस जो ग़लत क़वानीन सादिर करते और ज़ालिम फ़तवे देते हो
2
ताकि ग़रीबों का हक़ मारो और मज़लूमों के हुक़ूक़ पामाल करो। बेवाएँ तुम्हारा शिकार होती हैं, और तुम यतीमों को लूट लेते हो।
3
लेकिन अदालत के दिन तुम क्या करोगे, जब दूर दूर से ज़बरदस्त तूफ़ान तुम पर आन पड़ेगा तो तुम मदद के लिए किसके पास भागोगे और अपना मालो-दौलत कहाँ महफ़ूज़ रख छोड़ोगे?
4
जो झुककर क़ैदी न बने वह गिरकर हलाक हो जाएगा। ताहम रब का ग़ज़ब ठंडा नहीं होगा बल्कि उसका हाथ मारने के लिए उठा ही रहेगा।
5
असूर पर अफ़सोस जो मेरे ग़ज़ब का आला है, जिसके हाथ में मेरे क़हर की लाठी है।
6
मैं उसे एक बेदीन क़ौम के ख़िलाफ़ भेज रहा हूँ, एक क़ौम के ख़िलाफ़ जो मुझे ग़ुस्सा दिलाती है। मैंने असूर को हुक्म दिया है कि उसे लूटकर गली की कीचड़ की तरह पामाल कर।
7
लेकिन उसका अपना इरादा फ़रक़ है। वह ऐसी सोच नहीं रखता बल्कि सब कुछ तबाह करने पर तुला हुआ है, बहुत क़ौमों को नेस्तो-नाबूद करने पर आमादा है।
8
वह फ़ख़र करता है, “मेरे तमाम अफ़सर तो बादशाह हैं।
9
फिर हमारी फ़ुतूहात पर ग़ौर करो। करकिमीस, कलनो, अरफ़ाद, हमात, दमिश्क़ और सामरिया जैसे तमाम शहर यके बाद दीगरे मेरे क़ब्ज़े में आ गए हैं।
10
मैंने कई सलतनतों पर क़ाबू पा लिया है जिनके बुत यरूशलम और सामरिया के बुतों से कहीं बेहतर थे।
11
सामरिया और उसके बुतों को मैं बरबाद कर चुका हूँ, और अब मैं यरूशलम और उसके बुतों के साथ भी ऐसा ही करूँगा!”
12
लेकिन कोहे-सिय्यून पर और यरूशलम में अपने तमाम मक़ासिद पूरे करने के बाद रब फ़रमाएगा, “मैं शाहे-असूर को भी सज़ा दूँगा, क्योंकि उसके मग़रूर दिल से कितना बुरा काम उभर आया है, और उस की आँखें कितने ग़ुरूर से देखती हैं।
13
वह शेख़ी मारकर कहता है, ‘मैंने अपने ही ज़ोरे-बाज़ू और हिकमत से यह सब कुछ कर लिया है, क्योंकि मैं समझदार हूँ। मैंने क़ौमों की हुदूद ख़त्म करके उनके ख़ज़ानों को लूट लिया और ज़बरदस्त साँड की तरह उनके बादशाहों को मार मारकर ख़ाक में मिला दिया है।
14
जिस तरह कोई अपना हाथ घोंसले में डालकर अंडे निकाल लेता है उसी तरह मैंने क़ौमों की दौलत छीन ली है। आम आदमी परिंदों को भगाकर उनके छोड़े हुए अंडे इकट्ठे कर लेता है जबकि मैंने यही सुलूक दुनिया के तमाम ममालिक के साथ किया। जब मैं उन्हें अपने क़ब्ज़े में लाया तो एक ने भी अपने परों को फड़फड़ाने या चोंच खोलकर चीं चीं करने की जुर्रत न की’।”
15
लेकिन क्या कुल्हाड़ी उसके सामने शेख़ी बघारती जो उसे चलाता है? क्या आरी उसके सामने अपने आप पर फ़ख़र करती जो उसे इस्तेमाल करता है? यह उतना ही नामुमकिन है जितना यह कि लाठी पकड़नेवाले को घुमाए या डंडा आदमी को उठाए।
16
चुनाँचे क़ादिरे-मुतलक़ रब्बुल-अफ़वाज असूर के मोटे-ताज़े फ़ौजियों में एक मरज़ फैला देगा जो उनके जिस्मों को रफ़्ता रफ़्ता ज़ाया करेगा। असूर की शानो-शौकत के नीचे एक भड़कती हुई आग लगाई जाएगी।
17
उस वक़्त इसराईल का नूर आग और इसराईल का क़ुद्दूस शोला बनकर असूर की काँटेदार झाड़ियों और ऊँटकटारों को एक ही दिन में भस्म कर देगा।
18
वह उसके शानदार जंगलों और बाग़ों को मुकम्मल तौर पर तबाह कर देगा, और वह मरीज़ की तरह घुल घुलकर ज़ायल हो जाएंगे।
19
जंगलों के इतने कम दरख़्त बचेंगे कि बच्चा भी उन्हें गिनकर किताब में दर्ज कर सकेगा।
20
उस दिन से इसराईल का बक़िया यानी याक़ूब के घराने का बचा-खुचा हिस्सा उस पर मज़ीद इनहिसार नहीं करेगा जो उसे मारता रहा था, बल्कि वह पूरी वफ़ादारी से इसराईल के क़ुद्दूस, रब पर भरोसा रखेगा।
21
बक़िया वापस आएगा, याक़ूब का बचा-खुचा हिस्सा क़वी ख़ुदा के हुज़ूर लौट आएगा।
22
ऐ इसराईल, गो तू साहिल पर की रेत जैसा बेशुमार क्यों न हो तो भी सिर्फ़ एक बचा हुआ हिस्सा वापस आएगा। तेरे बरबाद होने का फ़ैसला हो चुका है, और इनसाफ़ का सैलाब मुल्क पर आनेवाला है।
23
क्योंकि इसका अटल फ़ैसला हो चुका है कि क़ादिरे-मुतलक़ रब्बुल-अफ़वाज पूरे मुल्क पर हलाकत लाने को है।
24
इसलिए क़ादिरे-मुतलक़ रब्बुल-अफ़वाज फ़रमाता है, “ऐ सिय्यून में बसनेवाली मेरी क़ौम, असूर से मत डरना जो लाठी से तुझे मारता है और तेरे ख़िलाफ़ लाठी यों उठाता है जिस तरह पहले मिसर किया करता था।
25
मेरा तुझ पर ग़ुस्सा जल्द ही ठंडा हो जाएगा और मेरा ग़ज़ब असूरियों पर नाज़िल होकर उन्हें ख़त्म करेगा।”
26
जिस तरह रब्बुल-अफ़वाज ने मिदियानियों को मारा जब जिदौन ने ओरेब की चटान पर उन्हें शिकस्त दी उसी तरह वह असूरियों को भी कोड़े से मारेगा। और जिस तरह रब ने अपनी लाठी मूसा के ज़रीए समुंदर के ऊपर उठाई और नतीजे में मिसर की फ़ौज उसमें डूब गई बिलकुल उसी तरह वह असूरियों के साथ भी करेगा।
27
उस दिन असूर का बोझ तेरे कंधों पर से उतर जाएगा, और उसका जुआ तेरी गरदन पर से दूर होकर टूट जाएगा। फ़ातेह ने यशीमोन की तरफ़ से चढ़कर
28
ऐयात पर हमला किया है। उसने मिजरोन में से गुज़रकर मिकमास में अपना लशकरी सामान छोड़ रखा है।
29
दर्रे को पार करके वह कहते हैं, “आज हम रात को जिबा में गुज़ारेंगे।” रामा थरथरा रहा और साऊल का शहर जिबिया भाग गया है।
30
ऐ जल्लीम बेटी, ज़ोर से चीख़ें मार! ऐ लैसा, ध्यान दे! ऐ अनतोत, उसे जवाब दे!
31
मदमीना फ़रार हो गया और जेबीम के बाशिंदों ने दूसरी जगहों में पनाह ली है।
32
आज ही फ़ातेह नोब के पास रुककर सिय्यून बेटी के पहाड़ यानी कोहे-यरूशलम के ऊपर हाथ हिलाएगा।
33
देखो, क़ादिरे-मुतलक़ रब्बुल-अफ़वाज बड़े ज़ोर से शाख़ों को तोड़नेवाला है। तब ऊँचे ऊँचे दरख़्त कटकर गिर जाएंगे, और जो सरफ़राज़ हैं उन्हें ख़ाक में मिलाया जाएगा।
34
वह कुल्हाड़ी लेकर घने जंगल को काट डालेगा बल्कि लुबनान भी ज़ोरावर के हाथों गिर जाएगा।
← Chapter 9
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 49
Chapter 50
Chapter 51
Chapter 52
Chapter 53
Chapter 54
Chapter 55
Chapter 56
Chapter 57
Chapter 58
Chapter 59
Chapter 60
Chapter 61
Chapter 62
Chapter 63
Chapter 64
Chapter 65
Chapter 66
Chapter 11 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41
42
43
44
45
46
47
48
49
50
51
52
53
54
55
56
57
58
59
60
61
62
63
64
65
66