bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
/
Matthew 7
Matthew 7
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
← Chapter 6
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 8 →
1
“ऐबजोई न करो, ताके तुम्हारी भी ऐबजोई न हो।
2
क्यूंके जिस तरह तुम ऐबजोई करोगे उसी तरह तुम्हारी भी ऐबजोई की जायेगी और जिस पैमाने से तुम नापते हो उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जायेगा।
3
“तुम अपने भाई की आंख का तिनका क्यूं देखते हो जब के तुम्हारी अपनी आंख में शहतीर है जिस का तुम ख़्याल तक नहीं करते?
4
और जब तुम्हारी अपनी ही आंख में हर वक़्त शहतीर पड़ा हुआ है तो किस मुंह से अपने भाई या बहन से कह सकते हो, ‘लाओ, मैं तुम्हारी आंख में से तिनका निकाल दूं?’
5
ऐ रियाकार! पहले अपनी आंख में से तो शहतीर निकाल, फिर अपने भाई या बहन की आंख में से तिनके को अच्छी तरह देखकर निकाल सकेगा।
6
“पाक चीज़ कुत्तों को न दो, और अपने मोती सूअरों के आगे न डालो, कहीं ऐसा न हो के वह उन्हें पांव से रौंद कर पलटें और तुम्हें फाड़ डालें।
7
“पस मैं तुम से कहता हूं, मांगो तो तुम्हें दिया जायेगा, ढूंडोगे तो पाओगे, दरवाज़ा खटखटाओगे, तो तुम्हारे लिये खोला जायेगा।
8
क्यूंके जो मांगता है उसे मिलता है, जो ढूंडता है वह पाता है और जो खटखटाता है उस के लिये दरवाज़ा खोला जायेगा।
9
“तुम में ऐसा कौन सा आदमी है के अगर उस का बेटा उस से रोटी मांगे तो वह उसे पत्थर दे?
10
या मछली मांगे तो उसे सांप दे?
11
पस जब तुम बुरे होने के बावुजूद भी, अपने बच्चों को अच्छी चीज़ें देना जानते हो, तो क्या तुम्हारा आसमानी बाप उन्हें जो उस से मांगते हैं, अच्छी चीज़ें इफ़रात से अता न फ़रमायेगा।
12
पस जैसा तुम चाहते हो के दूसरे लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो; क्यूंके तौरेत और नबियों की तालीमात यही है।
13
“तंग दरवाज़े से दाख़िल हो, क्यूंके वह दरवाज़ा चौड़ा है और वह रास्ता कुशादा है जो हलाकत की तरफ़ ले जाता है और उस से दाख़िल होने वाले बहुत हैं।
14
क्यूंके वह दरवाज़ा तंग और वह रास्ता सुकड़ा है जो ज़िन्दगी की तरफ़ ले जाता है और उस के पाने वाले थोड़े हैं।
15
“झूटे नबियों से ख़बरदार रहो, वह तुम्हारे पास भेड़ों के लिबास में आते हैं लेकिन बातिन में फाड़ने वाले भेड़िये हैं।
16
तुम उन के फलों से उन्हें पहचान लोगे। क्या लोग झाड़ियों से अंगूर या कांटों वाले दरख़्तों से अन्जीर तोड़ते हैं?
17
लिहाज़ा, हर अच्छा दरख़्त अच्छा फल लेकिन हर बुरा दरख़्त बुरा फल देता है।
18
ये मुम्किन ही नहीं के एक अच्छा दरख़्त बुरा फल लाये और बुरा दरख़्त अच्छा फल लाये।
19
हर एक दरख़्त जो अच्छा फल नहीं लाता है, उसे काट कर आग में डाला जाता है।
20
पस तुम झूटे नबियों को उन के फलों से पहचान लोगे।
21
“जो मुझ से, ‘ऐ ख़ुदावन्द, ऐ ख़ुदावन्द,’ कहते हैं उन में से हर एक शख़्स आसमान की बादशाही में दाख़िल न होगा, मगर वोही जो मेरे आसमानी बाप की मर्ज़ी पर चलता है।
22
उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, ‘ऐ ख़ुदावन्द! ऐ ख़ुदावन्द! क्या हम ने आप के नाम से नुबुव्वत नहीं की? और आप के नाम से बदरूहों को नहीं निकाला और आप के नाम से बहुत से मोजिज़े नहीं दिखाये?’
23
उस वक़्त मैं उन से साफ़-साफ़ कह दूंगा, ‘मैं तुम से कभी वाक़िफ़ न था। ऐ बदकारों! मेरे सामने से दूर हो जाओ।’
24
“चुनांचे जो कोई मेरी ये बातें सुनता और उन पर अमल करता है वह उस अक़्लमन्द आदमी की मानिन्द ठहरेगा जिस ने अपना घर चट्टान पर तामीर किया हो।
25
और ज़ोर की बारिश आई और सेलाब आया और आन्धियां चलीं और उस घर से टकराईं मगर वह न गिरा क्यूंके उस की बुनियाद चट्टान पर डाली गई थी।
26
लेकिन जो मेरी ये बातें सुनता है मगर उन पर अमल नहीं करता है, वह उस बेवक़ूफ़ इन्सान की मानिन्द है जिस ने अपना घर रेत पर बनाया।
27
और ज़ोर की बारिश आई और सेलाब आया और आन्धियां चलीं और उस घर से टकराईं, और वह गिर पड़ा और बिलकुल बर्बाद हो गया।”
28
जब हुज़ूर ईसा ने ये इल्म की बातें ख़त्म कीं तो हुजूम उन की तालीम से दंग रह गया,
29
क्यूंके हुज़ूर उन्हें उन के शरीअत के आलिमों की तरह नहीं लेकिन एक साहिबे इख़्तियार की तरह तालीम दे रहे थे।
← Chapter 6
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 8 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28