bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
Awadhi
/
Numbers 13
Numbers 13
Awadhi
← Chapter 12
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 14 →
1
यहोवा मूसा स कहेस,
2
“कछू मनइयन क कनान देस क बारे मँ गहराइ स जानइ बरे पठवा। इ उहइ देस अहइ जेका मइँ इस्राएल क मनइयन क देब। हर एक बारहु परिवार समूहन स एक नेता पठवा।”
3
एह बरे मूसा यहोवा क हुकुम मानेस। उ पारान क रेगिस्तान स नेता लोगन क पठाएस।
4
इ सबइ ओनकइ नाउँ अहइँ: जककूर क पूत सम्मू – रूबेन परिवार समूह स।
5
होरी क पूत सापात – सिमोन क परिवार समूह स।
6
योपुन्ने क पूत कालेब – यहूदा क परिवार समूह स।
7
योसेप क पूत यिगास – इस्साकार क परिवार समूह स।
8
नून क पूत होसे – एप्रैम क परिवार समूह स।
9
रापू क पूत पलती – बिन्यामीन क परिवार समूह स।
10
सोदी क पूत गद्दीएल – जबूलून क परिवार समूह स।
11
सूसी क पूत गद्दी – यूसुफ क (जउन मनस्से स) परिवार समूह स।
12
गमल्ली क पूत अम्मीएल – दान क परिवार समूह स।
13
मीकाएल क पूत सतूर – आसेर क परिवार समूह स।
14
वोप्सी क पूत नहूबी – नप्ताली परिवार समूह स।
15
माकी क पूत गूएल – गाद क परिवार समूह स।
16
उ नाउँ ओन मनइयन क अहइँ जेनका मूसा पहँटा क लखइ अउ जाँच करइ बरे पठाएस। (मूसा नून क पूत होसे क दूसर नाउँ स पुकारेस। मूसा ओका यहोसू कहेस।)
17
मूसा जब ओनका कनान क खोज-बीन बरे पठावत रहा, तब उ कहेस, “नेगेव स होइके जा तब पहाड़ी देस मँ जाब्या
18
इ लखा कि भूइयाँ कइसा अहइ अउर तब तू उ मनइ क बारे जानकारी ल्या जउन हुमाँ रहत हीं। उ पचे सक्तीवाला अहइँ या कमजोर बाटेन। उ पचे तनिक अहइँ या जियादा तदाद मँ बाटेन?
19
उ पहँटा क बारे मँ जानकारी ल्या जेहमाँ उ पचे रहत हीं। का उ नीक प्रदेस अहइ या बुरा? कउने तरह क सहर मँ उ पचे रहत हीं? का उ नगरन क चहरदेवार बाटेन? क एन गाँव क देवारन नाहीं अहइ?
20
प्रदेस क बारे मँ अउर जानकारी ल्या। का भुइयाँ उपज बरे नीक बाटइ या बंजर जमीन अहइ? का धरती प बृच्छ उगा बाटेन? साहसी बना अउ उ धरती स कछू फल लइ आवा।” (इ अंगूर क पहली फसल क टेम होइ।)
21
तब उ पचे पहँटा क छान-बीन किहेन। उ पचे जिन नाउँ क रेगिस्तान स रहोब अउ लेबो हमात तलक गएन।
22
उ पचे नेगव स होइके तब तलक जात्रा करत रहेन जब तलक उ पचे हेब्रोन नगर पहोंच गएन। (हेब्रोन मिस्र मँ सोअन नगर क बसइ क सात बरिस पहिले बना रहा।) अहीमन, सेसै अउ तल्मै हुवाँ रहत रहेन। इ सबइ अनाक क सन्तानन रहेन।
23
तब उ पचे एस्कोल क घाटी मँ गएन। उ सबइ हुवाँ अंगूरे क बेल काटेन। उ साखा मँ अंगूर क गुच्छा रहा। मनइयन मँ स दुइ मनई आपन बीच एक डंडा प धइके ओका लइ आएन। उ पचे कछू अनार अउ अंजीर भी लइ आएन।
24
उ ठउरे क नाउँ एस्कोल क घाटी रहा। काहेकी इ उहइ ठउर अहइ जहाँ इस्राएल क मनइयन अंगूरे क गुच्छा काटेन।
25
उ मनइयन उ पहँटा क छानबीन चालीस दिन तलक किहेन। तब उ पचे सिबिर क लउटेन।
26
उ पचे मूसा, हारून अउ दूसर इस्राएल क लोगन क लगे कादेस मँ लउटि गएन। इ पारान रेगिस्तान मँ रहा। तब उ पचे मूसा, हारून अउ सबहिं मनइयन क, जउन कछू लखेन, सब कछू सुनाएन। अउर उ पचे ओनका उ प्रदेस क फल क देखाएन।
27
उ पचे मूसा स इ कहेन, “हम पचे उ पहँटा मँ गए जहाँ आप हमका पठएन। उ प्रदेस बहोत नीक बाटइहिआँ दूध अउ मधु क नदी बहत हीं। इ सबइ उ कछू फल अहइँ जेका हम पचे हुआँ पावा ह।
28
मुला हुवाँ जउन मनइयन रहत हीं उ पचे बहोतइ सक्तीवाला अउ मजबूत बाटेन। ओनकइ सहर क मजबूती स रच्छा कीन्ह ग अहइ। हम पचे हुवाँ अनाक बंसी मनइयन क लखा।
29
अमालेकी लोग नेगेव मँ रहत हीं। हित्ती, यबूसी अउ एमोरी पहाड़ी प्रदेस मँ रहत हीं। कनानी लोग समुद्दर क किनारे अउ यरदन नदिया क तीरे रहत हीं।”
30
तब कालेब मूसा क नचिके मनइयन क सान्त होइके कहेस। कालेब कहेस, “हम पचन क हुवाँ जाइ चाही अउ उ प्रदेस क आपन बरे लेइ चाही। हम पचे उ प्रदेस क आसानी स लइ सकित ही।”
31
मुला जउन मनई ओकरे संग गवा उ बोला, “हम पचे उ मनइयन क खिलाफ नाहीं लड़ि सकित। उ पचे हम लोगन स जियादा सक्तीसाली अहइँ।”
32
अउर उ मनइयन सबहिं इस्राएली लोगन स कहेन कि उ पहँटा क लोगन क हरावइ बरे उ पचे जियादा ताकतवर नाहीं रहेन। उ पचे कहेन, “जउने पहँटा क हम पचे लखा उ ताकतवर मनइयन स भरा बाटइ। उ पचे ऍतना जियादा सक्तीवाला अहइँ कि जउन कउनो मनई हुवाँ जाइ ओका आसनी स हराइ सकत हीं।
33
हम सबइ हुवाँ देत्य नेपीलियन लोगन क लखा। (अनाक सन्तानन नपीली लोगन मँ स अहइ।) उ पचे हम पचन क लखेन जइसे हम पचे टिड्डा रहेन। हाँ हम पचे झींगुर क नाईं ओनकइ बरे रहे।”
← Chapter 12
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 14 →