bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Garhwali
/
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
/
2 Timothy 2
2 Timothy 2
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
← Chapter 1
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 3 →
1
इलै हे मेरा नौंना तीमुथियुस तु वीं कृपा से ज्वा त्वे तैं मसीह यीशु दींद, वां मा मजबूत बंणि जा।
2
अर जु बात तिल भौत सैरा गवाहों का संमणी मि बट्टी सुंणिनि ऊं तैं विश्वास का लैख लुखुं मा सौंपी दे जु दुसरों तैं भि सिखौंण मा काबिल हूंनु।
3
मसीह यीशु का अच्छा सिपै कि तरौं मि दगड़ी दुःख को सामना कैर।
4
जब कुई सिपै लड़ै पर जांदु त फिर उ अफ तैं दुनिया का कामों का जंजाल मा नि फसौंदु इलै कि उ अपड़ा भरति कन वला अधिकारी तैं खुश कैरी साको।
5
इन ही कै अखाड़ा मा लड़ै कन वलो पैलवान जु नियम का अनुसार नि लैड़ो त उ ईनाम नि पांदु।
6
जु जिमदार मेहनत करदो, फसल को हिस्सा वे तैं पैली मिलण चयणु।
7
जु मि बुल्ण छौं वे पर ध्यान दे, अर प्रभु त्वे तैं यूं सभि बातों तैं समझण मा मदद कैरो।
8
हमेशा यीशु मसीह तैं याद रख, जु राजा दाऊद को वंश च, अर पिता परमेश्वर ल वे तैं मुर्दों मा बट्टी ज्यूँदो कैरी; अर यूं उ ही शुभ सन्देश च, जु मि लुखुं का बीच मा प्रचार करदु।
9
किलैकि मि शुभ सन्देश कु प्रचार करदो, इलै मि एक कैदी जन जीवन ज्यूंणु छो; पर पिता परमेश्वर का शुभ संदेश तैं कुई भि फैलांण से रोकि नि सकद।
10
इलै मि ऊं लुखुं का फैदा कु, दुःख सौणु छो, जौं तैं पिता परमेश्वर ल चुणि, कि उ भि यीशु मसीह पर विश्वास कैरा अर उद्धार का द्वारा बचै जै सैका, अर वीं महिमा तैं पां जु हमेशा बंणि रौ।
11
या बात सच च, कि जु हम वे दगड़ी मोरि ग्यां त वे दगड़ी ज्यूंदा भि रौला।
12
जु हम सब्र रखि के दुःख सौंदयां त वे दगड़ी राज्य भि करला; अर जु हम वेको इन्कार करला त उ भि हम बट्टी इन्कार करलो।
13
जु हम मसीह का प्रति विश्वासयोग्य नि छा, तभि उ हमारा प्रति विश्वासयोग्य रालो, किलैकि उ अपड़ा सचै पर चलणा का बरतौ का खिलाफ काम नि कैरी सकदो।
14
यूं बातों तैं, विश्वासियों तैं बार-बार सिखौ, अर प्रभु का संमणी ऊं तैं चितै दे, कि शब्दो पर तर्क-वितर्क नि कना रौनु, जौं बट्टी कुछ फैदा नि हूंद, बल्कि यु ऊं लुखुं का विश्वास तैं नुकसान पहूंचो दींनि जु यु तैं सुणदींनि।
15
तु जथग जादा मेहनत कैरी सकदी उथग कैर, कि पिता परमेश्वर त्वे तैं एक इन सेवक का रूप मा पूरा ढंग ल स्वीकार कैर, जु अपड़ा कामों का कारण शर्मिंदा नि हूंद, अर जु सच्चा संदेश तैं ठिक ढंग से सिखांद।
16
पर बेकार की बकवास कन से बच्युं रौ, किलैकि इन लोग और भि जादा अधर्मी हवे जाला अर पिता परमेश्वर बट्टी दूर हवे जाला।
17
अर इन कै यु बात सड़यां घाव का जन फैली जालो, अर अंत मा ऊं लुखुं का विश्वास तैं नाश कैरी दयाला जु ऊं तैं सुणदींनि। ऊंमा बट्टी दुई हुमिनयुस अर फिलेतुस ऊं मदि छिनी
18
ऊंल सचै पर विश्वास कन बंद कैरेले, उ बुल्दींनि कि पिता परमेश्वर ल पैली बट्टी ही मुरयां विश्वासियों तैं अनन्त जीवन कु ज्यून्दो कैरेले, जै कारण, उ कुछ विश्वासियों तैं मसीह की शिक्षाओं पर विश्वास कन से रुकणा छिनी।
19
पिता परमेश्वर का लोग एक बुनियाद का जन छिनी, जु हिलदी नि च, यांका बारा मा “प्रभु जंणदु च कि वेका लोग कु छिनी” अर यु भि की “जु कुई पिता परमेश्वर की आराधना करद वे तैं बुरै कन बंद कैर दींण चयणु च।”
20
कै भि बड़ा घौर मा न भस सोना-चाँदी का ही बल्कि काठ अर माटा का भांडा भि हूंदींनि कुई आदर अर कुई अनादर पांणु कु।
21
इन ही, जु विश्वासी अपड़ा आप तैं ऊं सभि बुरा कामों बट्टी अलग कैरी ल्यो, जैको जीवन शुद्ध होलो उ एक कीमती भांडा का जन च, जु खास मौकों कु इस्तेमाल किये जांद, अर इलै वेको मालिक वेको इस्तेमाल करद।
22
इलै, ऊं पापी इच्छाओं बट्टी बच जु जवान लुखुं तैं आकर्षित करदींनि, अर जु लोग शुद्ध मन से प्रभु को नौं लिंदिनि ऊं दगड़ी धार्मिकता विश्वास प्रेम अर शान्ति अर मेल मिलाप को पीछा कैर।
23
पर मूर्खता, अर अज्ञान का झगड़ो से बच्युं रौ; किलैकि तु जंणदी छै, कि यां बट्टी झगड़ा पैदा हूंदींनि।
24
प्रभु का सेवक तैं झगड़ा कन वलो नि हूंण चयणु च, वे तैं सभियूं का प्रति दयालु, अर पिता परमेश्वर का वचन तैं अच्छा ढंग ल सिखांण वलो हूंण चयणु च अर लुखुं दगड़ी धीरज रखण चयणु च।
25
उ विरोधियों तैं नम्रता से समझौ, क्य पता पिता परमेश्वर ऊं तैं पश्चताप कनु को मन द्यो, कि उ भि मसीह का बारा मा सचै तैं जनण को मौका दे।
26
कि उ अपड़ा होश मा ऐ जौं, अर शैतान की शक्ति बट्टी बची सको, जैल ऊं तैं धोखा द्ये के उ करवै जु उ चांदो च कि उ कैरा।
← Chapter 1
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 3 →
All chapters:
1
2
3
4