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John 13
Hindi 2017 (नया नियम)
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1
फसह के पर्व से पहले जब यीशु ने जान लिया, कि मेरी वह घड़ी आ पहुँची है कि जगत छोड़कर पिता के पास जाऊँ, तो अपने लोगों से, जो जगत में थे, जैसा प्रेम वह रखता था, अन्त तक वैसा ही प्रेम रखता रहा।
2
और जब शैतान शमौन के पुत्र यहूदा इस्करियोती के मन में यह डाल चुका था, कि उसे पकड़वाए, तो भोजन के समय।
3
यीशु ने यह जानकर कि पिता ने सब कुछ मेरे हाथ में कर दिया है और मैं परमेश्वर के पास से आया हूँ, और परमेश्वर के पास जाता हूँ।
4
भोजन पर से उठकर अपने कपड़े उतार दिए, और अँगोछा लेकर अपनी कमर बान्धी। यीशु का चेलों के पैर धोना
5
तब बरतन में पानी भरकर चेलों के पाँव धोने और जिस अँगोछा से उसकी कमर बन्धी थी उसी से पोंछने लगा।
6
जब वह शमौन पतरस के पास आया: तब उसने उससे कहा, “हे प्रभु, क्या तू मेरे पाँव धोता है?”
7
यीशु ने उसको उत्तर दिया, “जो मैं करता हूँ, तू अब नहीं जानता, परन्तु इस के बाद समझेगा।”
8
पतरस ने उससे कहा, “तू मेरे पाँव कभी न धोने पाएगा!” यह सुनकर यीशु ने उससे कहा, “यदि मैं तुझे न धोऊँ, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी साझा नहीं।”
9
शमौन पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, तो मेरे पाँव ही नहीं, वरन् हाथ और सिर भी धो दे।”
10
यीशु ने उससे कहा, “जो नहा चुका है, उसे पाँव के सिवा और कुछ धोने का प्रयोजन नहीं; परन्तु वह बिलकुल शुद्ध है: और तुम शुद्ध हो; परन्तु सब के सब नहीं।”
11
वह तो अपने पकड़वानेवाले को जानता था इसी लिये उसने कहा, “तुम सब के सब शुद्ध नहीं।”
12
जब वह उनके पाँव धो चुका और अपने कपड़े पहिनकर फिर बैठ गया तो उनसे कहने लगा, “क्या तुम समझे कि मैं ने तुम्हारे साथ क्या किया?
13
तुम मुझे गुरू, और प्रभु, कहते हो, और भला कहते हो, क्योंकि मैं वहीं हूँ।
14
यदि मैं ने प्रभु और गुरू होकर तुम्हारे पाँव धोए; तो तुम्हें भी एक दुसरे के पाँव धोना चाहिए।
15
क्योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो।
16
मैं तुम से सच सच कहता हूँ, दास अपने स्वामी से बड़ा नहीं; और न भेजा हुआ* अपने भेजनेवाले से।
17
तुम तो ये बातें जानते हो, और यदि उन पर चलो, तो धन्य हो।
18
मैं तुम सब के विषय में नहीं कहता: जिन्हें मैं ने चुन लिया है, उन्हें मैं जानता हूँ: परन्तु यह इसलिये है, कि पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हो, ‘जो मेरी रोटी खाता है, उसने मुझ पर लात उठाई।’
19
अब मैं उसके होने से पहले तुम्हें जताए देता हूँ कि जब हो जाए तो तुम विश्वास करो कि मैं वहीं हूँ।
20
मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि जो मेरे भेजे हुए को ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है, और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है।”
21
ये बातें कहकर यीशु आत्मा में व्याकुल हुआ और यह गवाही दी, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि तुम में से एक मुझे पकड़वाएगा।”
22
चेले यह संदेह करते हुए, कि वह किस के विषय में कहता है, एक दूसरे की ओर देखने लगे।
23
उसके चेलों में से एक जिस से यीशु प्रेम रखता था, यीशु की छाती की ओर झुका हुआ बैठा था।
24
तब शमौन पतरस ने उसकी ओर सैन करके पूछा, “बता तो, वह किस के विषय में कहता है?”
25
तब उसने उसी तरह यीशु की छाती की ओर झुक कर पूछा, “हे प्रभु, वह कौन है?” यीशु ने उत्तर दिया, “जिसे मैं यह रोटी का टुकड़ा डुबोकर दूँगा, वही है।”
26
और उसने टुकड़ा डुबोकर शमौन के पुत्र यहूदा इस्करियोती को दिया।
27
और टुकड़ा लेते ही शैतान उसमें समा गया: तब यीशु ने उससे कहा, “जो तू करता है, तुरन्त कर।”
28
परन्तु बैठनेवालों में से किसी ने न जाना कि उसने यह बात उससे किस लिये कही।
29
यहूदा के पास थैली रहती थी, इसलिये किसी किसी ने समझा, कि यीशु उससे कहता है, कि जो कुछ हमें पर्व के लिये चाहिए वह मोल ले, या यह कि कंगालों को कुछ दे।
30
तब वह टुकड़ा लेकर तुरन्त बाहर चला गया, और रात्रि का समय था।
31
जब वह बाहर चला गया तो यीशु ने कहा, “अब मनुष्य का पुत्र की महिमा हुई, और परमेश्वर की महिमा उसमें हुई;
32
और परमेश्वर भी अपने में उसकी महिमा करेगा, वरन तुरन्त करेगा।
33
हे बालको, मैं और थोड़ी देर तुम्हारे पास हूँ: फिर तुम मुझे ढूँढोगे, और जैसा मैं ने यहूदियों से कहा, ‘जहाँ मैं जाता हूँ, वहाँ तुम नहीं आ सकते,’ वैसा ही मैं अब तुम से भी कहता हूँ।
34
मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूँ, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो।
35
यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।”
36
शमौन पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, तू कहाँ जाता है?” यीशु ने उत्तर दिया, “जहाँ मैं जाता हूँ, वहाँ तू अब मेरे पीछे आ नहीं सकता! परन्तु इस के बाद मेरे पीछे आएगा।”
37
पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, अभी मैं तेरे पीछे क्यों नहीं आ सकता? मैं तो तेरे लिये अपना प्राण दूँगा।”
38
यीशु ने उत्तर दिया, “क्या तू मेरे लिये अपना प्राण देगा? मैं तुझ से सच सच कहता हूँ कि मुर्ग बाँग न देगा जब तक तू तीन बार मेरा इन्कार न कर लेगा।
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