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Matthew 14
Hindi 2017 (नया नियम)
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1
उस समय चौथाई देश के राजा हेरोदेस ने यीशु की चर्चा सुनी।
2
और अपने सेवकों से कहा, “यह यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला है: वह मरे हुओं में से जी उठा है, इसी लिये उससे सामर्थ्य के काम प्रगट होते हैं।”
3
क्योंकि हेरोदेस ने अपने भाई फिलिप्पुस की पत्नी हेरोदियास के कारण, यूहन्ना को पकड़कर बान्धा, और जेलखाने में डाल दिया था।
4
क्योंकि यूहन्ना ने उससे कहा था, कि इस को रखना तुझे उचित नहीं है।
5
और वह उसे मार डालना चाहता था, पर लोगों से डरता था, क्योंकि वे उसे भविष्यद्वक्ता जानते थे।
6
पर जब हेरोदेस का जन्म दिन आया, तो हेरोदियास की बेटी ने उत्सव में नाच दिखाकर हेरोदेस को खुश किया।
7
इसलिये उसने शपथ खाकर वचन दिया, कि जो कुछ तू माँगेगी, मैं तुझे दूँगा।
8
वह अपनी माता की उस्काई हुई बोली, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले का सिर थाल में यहीं मुझे मँगवा दे।
9
राजा दुखित हुआ, पर अपनी शपथ के, और साथ बैठनेवालों के कारण, आज्ञा दी, कि दे दिया जाए।
10
और उसने जेलखाने में लोगों को भेजकर यूहन्ना का सिर कटवा दिया।
11
और उसका सिर थाल में लाया गया, और लड़की को दिया गया; और वह उसको अपनी माँ के पास ले गई।
12
और उसके चेलों ने आकर और उसकी शव को ले जाकर गाढ़ दिया और जाकर यीशु को समाचार दिया।
13
जब यीशु ने यह सुना, तो नाव पर चढ़कर वहाँ से किसी सुनसान जगह को, एकान्त में चला गया; और लोग यह सुनकर नगर-नगर से पैदल उसके पीछे हो लिए।
14
उसने निकलकर एक बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, और उसने उनके बीमारों को चंगा किया।
15
जब साँझ हुई, तो उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा, “यह तो सुनसान जगह है और देर हो रही है, लोगों को विदा किया जाए कि वे बस्तियों में जाकर अपने लिये भोजन मोल लें।”
16
यीशु ने उनसे कहा, “उनका जाना आवश्यक नहीं! तुम ही इन्हें खाने को दो।”
17
उन्होंने उससे कहा, “यहाँ हमारे पास पाँच रोटी और दो मछलियों को छोड़ और कुछ नहीं है।”
18
उसने कहा, “उनको यहाँ मेरे पास ले आओ।”
19
तब उसने लोगों को घास पर बैठने को कहा, और उन पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया; और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियाँ तोड़-तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को।
20
और सब खाकर तृप्त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों से भरी हुई बारह टोकरियाँ उठाई।
21
और खानेवाले स्त्रियों और बालकों को छोड़कर पाँच हजार पुरूषों के लगभग थे।
22
और उसने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढ़ाया, कि वे उससे पहले पार चले जाएँ, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
23
वह लोगों को विदा करके, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया; और साँझ को वह वहाँ अकेला था।
24
उस समय नाव झील के बीच लहरों से डगमगा रही थी, क्योंकि हवा सामने की थी।
25
और वह रात के चौथे पहर झील पर चलते हुए उनके पास आया।
26
चेले उसको झील पर चलते हुए देखकर घबरा गए, और कहने लगे, “वह भूत है,” और डर के मारे चिल्ला उठे।
27
यीशु ने तुरन्त उनसे बातें की, और कहा, “ढाढ़स बान्धो, मैं हूँ; डरो मत।”
28
पतरस ने उसको उत्तर दिया, “हे प्रभु, यदि तू ही है, तो मुझे अपने पास पानी पर चलकर आने की आज्ञा दे।”
29
उसने कहा, “आ!” तब पतरस नाव पर से उतरकर यीशु के पास जाने को पानी पर चलने लगा।
30
पर हवा को देखकर डर गया, और जब डूबने लगा तो चिल्लाकर कहा, “हे प्रभु, मुझे बचा।”
31
यीशु ने तुरन्त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया, और उससे कहा, “हे अल्प-विश्वासी, तू ने क्यों सन्देह किया?”
32
जब वे नाव पर चढ़ गए, तो हवा थम गई।
33
इस पर जो नाव पर थे, उन्होंने उसे दण्डवत करके कहा, “सचमुच, तू परमेश्वर का पुत्र है।”
34
वे पार उतरकर गन्नेसरत प्रदेश में पहुँचे।
35
और वहाँ के लोगों ने उसे पहचानकर आस-पास के सारे देश में कहला भेजा, और सब बीमारों को उसके पास लाए।
36
और उससे विनती करने लगे कि वह उन्हें अपने वस्त्र के आँचल ही को छूने दे; और जितनों ने उसे छूआ, वे चंगे हो गए।
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